पर्सनल फाइनेंस
.png)
3 min read | अपडेटेड March 13, 2026, 13:31 IST
सारांश
अगर आप होम लोन की ईएमआई समय पर नहीं भरते हैं, तो बैंक आपके घर की नीलामी कर सकता है। लेकिन यह प्रक्रिया रातों-रात नहीं होती है। सरफेसी एक्ट और आरबीआई के नियमों के तहत बैंक को कई नोटिस देने होते हैं। अगर आप समय रहते बकाया पैसा चुका देते हैं, तो नीलामी रोकी जा सकती है।

होम लोन डिफॉल्ट होने पर बैंक कानूनी प्रक्रिया के तहत कर सकता है घर की नीलामी।
घर खरीदना हर किसी का सपना होता है, लेकिन इसके लिए लिया गया होम लोन कभी-कभी मुश्किल खड़ी कर देता है। अगर आप अपनी EMI समय पर नहीं चुका पा रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। बैंक आपकी मेहनत की कमाई से खरीदे गए घर को नीलाम कर सकता है। हालांकि, बैंक ऐसा अपनी मर्जी से तुरंत नहीं कर सकता है। भारत में इसके लिए सरफेसी एक्ट और रिजर्व बैंक के कड़े नियम बने हुए हैं। इन नियमों का पालन करना बैंक के लिए अनिवार्य है।
कानूनी जानकारों की मानें तो बैंक आपको कुछ समय की मोहलत जरूर देता है। अगर कोई व्यक्ति लगातार 90 दिनों यानी तीन महीनों तक अपने होम लोन की किस्त नहीं भरता है, तो बैंक उस लोन खाते को एनपीए यानी नॉन-परफॉर्मिंग एसेट की कैटेगरी में डाल देता है। एनपीए घोषित होने का सीधा मतलब है कि अब बैंक की नजर में यह लोन डूबने की कगार पर है। इसके बाद बैंक उधारकर्ता को 60 दिनों का एक लीगल नोटिस भेजता है। इस नोटिस में आपसे पूरा बकाया पैसा ब्याज के साथ चुकाने को कहा जाता है। अगर आप इस नोटिस पर कोई आपत्ति जताते हैं या जवाब देते हैं, तो बैंक को 15 दिनों के भीतर उस पर अपनी प्रतिक्रिया देनी होती है।
एक्सपर्ट की मानें तो घर की नीलामी की प्रक्रिया शुरू होने से पहले बैंक को करीब 105 दिनों का समय देना पड़ता है। इसमें सबसे पहले 60 दिन का शुरुआती नोटिस पीरियड शामिल होता है। इसके बाद 15 दिन आपके जवाब और बैंक की कार्यवाही के लिए रखे जाते हैं। जब बैंक नीलामी करने का पक्का फैसला कर लेता है, तो उसे कम से कम 30 दिन पहले इसकी सार्वजनिक सूचना या बिक्री की जानकारी देनी पड़ती है। अगर पहली कोशिश में घर की बिक्री नहीं हो पाती है, तो बैंक 15 दिनों का एक और अतिरिक्त नोटिस भी दे सकता है। कुल मिलाकर, आपके पास अपना घर बचाने के लिए 100 दिन से ज्यादा का समय होता है।
एक जरूरी बात जो आपको जान लेनी चाहिए, वो यह है कि सरफेसी कानून के तहत बैंक को ऐसी वसूली के लिए कोर्ट से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होती है। बैंक सीधे आपकी गिरवी रखी हुई संपत्ति पर कब्जा ले सकता है। हालांकि, यह पूरी प्रक्रिया तय नियमों के तहत ही की जाती है। संपत्ति पर कब्जा लेने के बाद उसकी वैल्यूएशन यानी कीमत लगवाई जाती है। फिर उसे टेंडर, पब्लिक ऑक्शन या ई-ऑक्शन के जरिए बाजार में बेचा जा सकता है ताकि बैंक अपना बकाया पैसा वसूल सके। यह नियम बैंकों को कर्ज वसूली में मदद करते हैं ताकि सिस्टम में पैसा वापस आ सके।
अच्छी बात यह है कि नीलामी रुकने के रास्ते हमेशा खुले रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर उधारकर्ता समय रहते बकाया रकम ब्याज के साथ चुका देता है, तो नीलामी की प्रक्रिया को किसी भी स्तर पर रोका जा सकता है। इसलिए ईएमआई मिस होने की स्थिति में डरने के बजाय जल्द से जल्द बैंक अधिकारियों से बात करना और भुगतान की व्यवस्था करना बेहतर होता है। बैंक भी चाहते हैं कि उनका पैसा वापस मिल जाए, इसलिए वे अक्सर बातचीत का रास्ता खुला रखते हैं।
संबंधित समाचार
लेखकों के बारे में
.png)
अगला लेख
What Is NIIF? How India's National Investment and Infrastructure Fund Works
What Is Yield to Maturity (YTM) in Bonds? A Complete Guide
Employees' Provident Fund Scheme 2026: Everything EPF Members Need to Know
Explore Learning Centre
All topics · stocks, MFs, derivatives, IPOs