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4 min read | अपडेटेड July 08, 2025, 12:50 IST
सारांश
Gold एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) की बात करें तो हाल ही में इसमें निवेश बढ़ा है। मई 2025 में गोल्ड ETF में ₹292 करोड़ तक का शुद्ध निवेश हुआ। यहां हम समझेंगे कि पेपर गोल्ड और फिजिकल गोल्ड में से कौन सा बेहतर है और इनमें निवेश के क्या फायदे-नुकसान हैं।

Gold Jewellery vs ETFs: गोल्ड ETF फिजिकल गोल्ड की डोमेस्टिक प्राइस को ट्रैक करता है।
गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) की बात करें तो हाल ही में इसमें निवेश बढ़ा है। मई 2025 में गोल्ड ETF में ₹292 करोड़ तक का शुद्ध निवेश हुआ। यहां हम समझेंगे कि पेपर गोल्ड और फिजिकल गोल्ड में से कौन सा बेहतर है और इनमें निवेश के क्या फायदे-नुकसान हैं।
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के अनुसार, मई में गोल्ड ETF की कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर ₹62,453 करोड़ हो गई, जबकि अप्रैल में यह ₹61,422 करोड़ थी। 2025 में अब तक सोने की कीमतों में 25% से अधिक की उछाल आई है।
भारतीय घरों में सोना एक भरोसेमंद निवेश और समृद्धि का प्रतीक रहा है। देश में लोग सिर्फ निवेश के लिए ही सोना नहीं खरीदते, बल्कि इसे ज्वेलरी के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, पिछले कुछ सालों में, गोल्ड ETF की लोकप्रियता में अच्छी बढ़ोतरी हुई है।
गोल्ड ETF फिजिकल गोल्ड की डोमेस्टिक प्राइस को ट्रैक करता है। इसमें आपको फिजिकल गोल्ड रखे बिना सोने की कीमत में होने वाले उतार-चढ़ाव के अनुसार मुनाफा या नुकसान हो सकता है। यह मूल रूप से स्टॉक एक्सचेंजों पर ट्रेड किया जाने वाला पेपर गोल्ड है।
भौतिक सोना (जैसे गहने, सिक्के) खरीदने में सबसे बड़ी दिक्कत इसकी शुद्धता और सुरक्षा होती है। कई बार लोग ऐसा सोना खरीद लेते हैं जिसमें दूसरे धातु मिलाए होते हैं और सोना शुद्ध नहीं होता। इससे पैसे की सही कीमत नहीं मिलती। इसके अलावा, सोना सुरक्षित रखना भी मुश्किल होता है क्योंकि चोरी या नुकसान का डर बना रहता है।
इस मामले में Gold ETF बेहतर विकल्प है क्योंकि इसमें न तो शुद्धता की चिंता होती है और न ही स्टोरेज की। Gold ETF पूरी तरह वित्तीय उत्पाद होता है, जो सोने की कीमतों को फॉलो करता है लेकिन इसे भौतिक रूप में रखने की जरूरत नहीं होती। एक यूनिट Gold ETF आमतौर पर 1 ग्राम सोने के बराबर होती है। इसमें चोरी का भी खतरा नहीं रहता।
Gold ETF का बड़ा फायदा यह है कि इसे शेयर बाजार की तरह कभी भी खरीदा और बेचा जा सकता है। निवेशक बाजार के कामकाजी घंटों में इसे आसानी से खरीद-बेच सकते हैं। इसके लेन-देन में खर्च भी कम आता है क्योंकि इसमें गहनों की तरह मेकिंग चार्ज नहीं लगते।
भारत में आज भी अधिकतर लोग गहनों में निवेश करना पसंद करते हैं। यह सिर्फ एक निवेश नहीं बल्कि सुरक्षा, सामाजिक प्रतिष्ठा और परंपरा का प्रतीक माना जाता है। शादियों, त्योहारों जैसे अक्षय तृतीया, दिवाली और धार्मिक आयोजनों में सोने का बहुत महत्व होता है। हालांकि, गहने खरीदते समय मेकिंग चार्ज और GST के कारण इनकी कीमत 10-20% तक बढ़ जाती है। जब इन्हें बेचा जाता है तो पूरा पैसा वापस नहीं मिल पाता।
Gold ETF में लोग छोटी-छोटी रकम से निवेश शुरू कर सकते हैं। यह उन निवेशकों के लिए फायदेमंद है जो निवेश में नए हैं और धीरे-धीरे अपना पोर्टफोलियो बनाना चाहते हैं। इसके मुकाबले, गहनों में निवेश करने के लिए ज्यादा बड़ी रकम की जरूरत होती है।
फिजिकल गोल्ड और Gold ETF दोनों पर टैक्स लगता है। सोना खरीदने पर 3% GST देना पड़ता है। जब आप सोना बेचते हैं तो अगर आपने तीन साल से ज्यादा समय तक होल्ड किया है तो लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (LTCG) 12.5% देना होता है। तीन साल से कम में बेचने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) आपकी इनकम स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होता है। यही नियम Gold ETF पर भी लागू होते हैं।
यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी प्राथमिकता क्या है। अगर आप केवल निवेश के उद्देश्य से सोना खरीदना चाहते हैं तो Gold ETF बेहतर विकल्प है क्योंकि यह पारदर्शिता, लिक्विडिटी और लागत में बचत देता है। अगर आप व्यक्तिगत उपयोग या गिफ्टिंग के लिए खरीदना चाहते हैं तो सोने के गहने ही बेहतर रहेंगे। इसलिए निवेश से पहले अपनी जरूरतों और लक्ष्यों को ध्यान में रखकर ही सही फैसला लें।
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