return to news
  1. G-Secs में निवेश को बढ़ावा, विदेशी निवेशकों को अब कमाई पर नहीं देना होगा टैक्स

पर्सनल फाइनेंस

G-Secs में निवेश को बढ़ावा, विदेशी निवेशकों को अब कमाई पर नहीं देना होगा टैक्स

Shubham Singh Thakur

2 min read | अपडेटेड June 05, 2026, 11:16 IST

सारांश

सरकार का मानना है कि टैक्स हटने से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय सरकारी बॉन्ड अधिक आकर्षक बनेंगे और देश में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा। इससे रुपये पर दबाव कम करने और चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।

FII

विदेशी निवेशकों को सरकारी बॉन्ड में निवेश पर टैक्स छूट का यह नया नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू माना जाएगा।

केंद्र सरकार ने विदेशी निवेशकों को भारतीय सरकारी बॉन्ड (Government Securities) में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 5 जून 2026 को आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 जारी किया है, जिसके तहत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को सरकारी बॉन्ड से होने वाली आय पर कई तरह के टैक्स से छूट दे दी गई है। यह नया नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू माना जाएगा।

Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

पहले क्या था नियम?

पहले विदेशी निवेशकों को सरकारी बॉन्ड 12 महीने से अधिक समय तक रखने पर होने वाले मुनाफे (Long-Term Capital Gain) पर 12.5% टैक्स देना पड़ता था। वहीं, 12 महीने से कम समय में बॉन्ड बेचने पर होने वाले मुनाफे (Short-Term Capital Gain) पर 20% टैक्स लगता था।

अब सरकार ने इन दोनों टैक्स को पूरी तरह खत्म कर दिया है। इसके अलावा सरकारी बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज (Interest Income) पर लगने वाला 20% विदहोल्डिंग टैक्स (TDS जैसा टैक्स) भी समाप्त कर दिया गया है।

क्यों लिया गया यह फैसला?

सरकार का मानना है कि टैक्स हटने से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय सरकारी बॉन्ड अधिक आकर्षक बनेंगे और देश में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा। इससे रुपये पर दबाव कम करने और चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और ईरान युद्ध के बाद रुपये पर दबाव बढ़ा है। 28 फरवरी से अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 5% कमजोर हो चुका है।

भारतीय निवेशकों पर क्या होगा असर?

इस बदलाव का आम भारतीय निवेशकों, उनके आयकर रिटर्न (ITR) या टैक्स स्लैब पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। यह फैसला मुख्य रूप से विदेशी संस्थागत निवेशकों को भारतीय सरकारी बॉन्ड बाजार में निवेश के लिए आकर्षित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

अगला लेख