return to news
  1. EPFO के नए नियम से कितना आसान हुआ पीएफ क्लेम? यहां समझें अपने फायदे की बात

पर्सनल फाइनेंस

EPFO के नए नियम से कितना आसान हुआ पीएफ क्लेम? यहां समझें अपने फायदे की बात

Upstox

4 min read | अपडेटेड September 22, 2026, 17:28 IST

सारांश

ईपीएफओ ने अपने मेंबरों के लिए पीएफ क्लेम और निकासी के नियमों को काफी आसान बना दिया है। अब 13 अलग-अलग कैटेगरी को घटाकर सिर्फ 3 मुख्य कैटेगरी में बदल दिया गया है। इसके अलावा ऑटो सेटलमेंट की लिमिट बढ़कर 5 लाख रुपये हो गई है, जिससे क्लेम का पैसा जल्द सीधे बैंक अकाउंट में आ जाता है।

epfo-new-rules-pf-claim-settlement-

ईपीएफओ के नए नियमों से पीएफ क्लेम का प्रोसेस तेज और आसान हो गया है।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO ने अपने करोड़ों मेंबरों को बड़ी राहत देते हुए पीएफ क्लेम और सर्विस के नियमों में ऐतिहासिक बदलाव किए हैं। पहले पीएफ का पैसा निकालने के लिए कर्मचारियों को कई तरह के फॉर्म भरने पड़ते थे और दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब EPFO ने पूरे सिस्टम को डिजिटल और सरल बना दिया है। इन नए बदलावों का सीधा मकसद यह है कि इमरजेंसी के समय मेंबरों को बिना किसी परेशानी के उनका पैसा तुरंत मिल सके।

Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

कैटेगरी हुई आसान, खत्म हुई पुरानी उलझन

पहले पीएफ से एडवांस या पार्टशियल निकासी के लिए लगभग 13 अलग-अलग कैटेगरी हुआ करती थीं, जिससे आम मेंबरों को क्लेम अप्लाई करते वक्त काफी उलझन होती थी। EPFO ने इस पूरी व्यवस्था को बदलकर अब सिर्फ 3 मुख्य कैटेगरी में बांट दिया है। इनमें जरूरी जरूरतें, घर से जुड़ी जरूरतें और विशेष परिस्थितियां शामिल हैं। अब कर्मचारी अपनी जरूरत के हिसाब से सही ऑप्शन चुनकर आसानी से क्लेम सबमिट कर सकते हैं। इसके अलावा पहले जहां सिर्फ कर्मचारी के खुद के योगदान का हिस्सा ही निकाला जा सकता था, वहीं अब नियोक्ता यानी एम्प्लॉयर के अंशदान और उस पर मिले ब्याज को भी निकासी में शामिल कर लिया गया है।

ऑटो सेटलमेंट से 3 दिन में खाते में आएगा पैसा

EPFO ने क्लेम प्रोसेस को स्पीड देने के लिए ऑटो सेटलमेंट सिस्टम को और मजबूत किया है। पहले ऑटो क्लेम की लिमिट कम थी, जिसे अब बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है। अगर किसी मेंबर का UAN एक्टिव है और आधार, पैन तथा बैंक अकाउंट की KYC डिजिटल रूप से अप्रूव्ड है, तो क्लेम का पैसा सीधे बैंक अकाउंट में बिना किसी मैनुअल चेकिंग के ट्रांसफर हो जाता है। इस नए सिस्टम के इंप्लिमेंटेशन से अब मेडिकल, एजुकेशन या शादी जैसे कामों के लिए क्लेम सिर्फ 3 दिन के अंदर अप्रूव होकर खाते में जमा हो जाता है। इसके लिए एम्प्लॉयर के दस्तखत की जरूरत भी नहीं पड़ती है।

नए नियमों के तहत कई तरह के क्लेम के लिए मिनिमम सर्विस की शर्त को घटाकर केवल 12 महीने यानी 1 साल कर दिया गया है। यानी अब 1 साल की नौकरी पूरी होने के बाद कर्मचारी पीएफ से बैलेंस निकाल सकते हैं। हालांकि EPFO ने कर्मचारियों के फ्यूचर और रिटायरमेंट के बाद की सुरक्षा का भी ध्यान रखा है। इसके लिए नियम बनाया गया है कि किसी भी स्थिति में पीएफ अकाउंट में कुल बैलेंस का 25% हिस्सा हमेशा जमा रहेगा, ताकि रिटायरमेंट फंड पूरी तरह खत्म न हो। इसके साथ ही पेंशन स्कीम यानी ईपीएस से पूरा पैसा निकालने के लिए वेटिंग पीरियड को बढ़ाकर 36 महीने कर दिया गया है, जिससे लोग बार-बार नौकरी बदलने पर पेंशन का पैसा न निकालें और बुढ़ापे में उनको रेगुलर पेंशन का फायदा मिल सके।

डिजिटल सर्विस से मेंबरों को मिली सहूलियत

EPFO के इस नए ऑपरेशन से दफ्तरी कामकाज में पारदर्शिता आई है। अब मेंबर घर बैठे ही EPFO पोर्टल या उमंग ऐप के जरिए अपना क्लेम ट्रैक कर सकते हैं। जॉइंट डिक्लेरेशन की सुविधा को भी ऑनलाइन कर दिया गया है, जिससे नाम, जन्मतिथि या जॉइनिंग डेट में किसी भी सुधार के लिए महीनों का इंतजार नहीं करना पड़ता है। अगर मेंबर ने अपना ई-नॉमिनेशन पूरा कर लिया है, तो किसी भी अनहोनी की स्थिति में परिवार को बीमा और पेंशन क्लेम मिलने में कोई देरी नहीं होगी। इन तमाम सुधारों से EPFO की सर्विस पहले से कहीं ज्यादा पारदर्शी और यूजर फ्रेंडली बन गई हैं, जिसका सीधा फायदा देश के करोड़ों कर्मचारियों को मिल रहा है।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

अगला लेख