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ITR Filing 2026: इन मामलों में हो सकती है आपके रिटर्न की पूरी जांच, CBDT ने जारी किए नियम

Upstox

2 min read | अपडेटेड June 09, 2026, 19:01 IST

सारांश

सबसे पहले, जिन टैक्सपेयर्स के यहां 1 अप्रैल 2024 या उसके बाद धारा 133A के तहत सर्वे हुआ है, उनके रिटर्न अपने आप कम्पल्सरी स्क्रूटिनी में जाएंगे। इसके अलावा, जिन मामलों में 1 अप्रैल 2024 के बाद धारा 132 के तहत सर्च या धारा 132A के तहत रिक्विजिशन की कार्रवाई हुई है, उनके रिटर्न की भी जांच होगी।

ITR Filing 2026

ITR Filing 2026: करदाता को जरूरी दस्तावेज व स्पष्टीकरण ऑनलाइन जमा करने होते हैं।

CBDT ने FY 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) की कम्पल्सरी स्क्रूटिनी के नियम जारी किए हैं। इसका मतलब है कि कुछ खास मामलों में टैक्स विभाग रिटर्न की गहराई से जांच करेगा, भले ही मामला सामान्य रिस्क असेसमेंट में न आया हो। अगर किसी का ITR कम्पल्सरी स्क्रूटिनी के लिए चुना जाता है, तो उसे धारा 143(2) के तहत नोटिस भेजा जाता है और करदाता को जरूरी दस्तावेज व स्पष्टीकरण ऑनलाइन जमा करने होते हैं।

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ये टैक्सपेयर्स होंगे जांच के दायरे में

सबसे पहले, जिन टैक्सपेयर्स के यहां 1 अप्रैल 2024 या उसके बाद धारा 133A के तहत सर्वे हुआ है, उनके रिटर्न अपने आप कम्पल्सरी स्क्रूटिनी में जाएंगे। इसके अलावा, जिन मामलों में 1 अप्रैल 2024 के बाद धारा 132 के तहत सर्च या धारा 132A के तहत रिक्विजिशन की कार्रवाई हुई है, उनके रिटर्न की भी जांच होगी।

चैरिटेबल ट्रस्ट, धार्मिक संस्थाएं और ITR-7 फाइल करने वाले अन्य संगठन भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। यदि उन्होंने टैक्स छूट (Exemption) का दावा किया है, जबकि उनकी रजिस्ट्रेशन या मंजूरी पहले ही रद्द, अस्वीकृत या वापस ली जा चुकी है, तो उनका मामला कम्पल्सरी स्क्रूटिनी के लिए चुना जाएगा।

ऐसे करदाता भी जांच का सामना कर सकते हैं जिनके खिलाफ पिछले वर्षों में किसी कानूनी या तथ्यात्मक मुद्दे पर बड़ी टैक्स जोड़ की गई थी और जिसे अपीलीय प्राधिकरणों ने भी सही माना था। मेट्रो शहरों में यह सीमा 50 लाख रुपये से अधिक और अन्य शहरों में 20 लाख रुपये से अधिक तय की गई है।

इसके अलावा, यदि किसी सरकारी एजेंसी, जांच एजेंसी, इंटेलिजेंस यूनिट या रेगुलेटर से ऐसी विश्वसनीय जानकारी मिलती है जो टैक्स चोरी, अघोषित आय, फर्जी दावों, बेनामी लेनदेन, विदेशी संपत्ति या अन्य कर अनियमितताओं की ओर इशारा करती हो, तो ऐसे मामलों को भी कम्पल्सरी स्क्रूटिनी के लिए चुना जाएगा।

CBDT के अनुसार FY 2025-26 में दाखिल किए गए रिटर्न के लिए धारा 143(2) का नोटिस 30 जून 2026 तक जारी किया जाना जरूरी है। यदि इस समय सीमा के भीतर नोटिस जारी नहीं होता, तो आमतौर पर उस रिटर्न को इन नियमों के तहत स्क्रूटिनी के लिए नहीं लिया जा सकता।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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