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Budget 2026: जमीन अधिग्रहण पर टैक्स खत्म, खेती और गैर-खेती दोनों जमीनों को छूट

Upstox

2 min read | अपडेटेड February 02, 2026, 18:22 IST

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सारांश

Budget 2026: इस कानून के तहत केंद्र या राज्य सरकार पब्लिक प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन ले सकती है, लेकिन इसके बदले जमीन मालिक को उचित मुआवजा देना, सोशल इंपैक्ट असेसमेंट करना, और प्रभावित परिवारों का पुनर्वास और पुनर्स्थापन करना जरूरी होता है।

Budget 2026

Budget 2026: कानून के तहत केंद्र या राज्य सरकार पब्लिक प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन ले सकती है।

Union Budget 2026-27 में सरकार ने साफ कर दिया है कि अगर आपकी जमीन सरकार किसी पब्लिक पर्पस जैसे सड़क, रेलवे, एयरपोर्ट, डैम के लिए जबरन अधिग्रहित करती है, तो आपको मिलने वाला पूरा मुआवजा पूरी तरह टैक्स-फ्री होगा। आपकी जमीन एग्रीकल्चर हो या नॉन-एग्रीकल्चर, उसपर मिलने वाले मुआवजे पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। ये छूट Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013 (RFCTLARR Act) के तहत मिलने वाले मुआवजे पर लागू होगी।

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RFCTLARR Act क्या है?

इस कानून के तहत केंद्र या राज्य सरकार पब्लिक प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन ले सकती है, लेकिन इसके बदले जमीन मालिक को उचित मुआवजा देना, सोशल इंपैक्ट असेसमेंट करना, और प्रभावित परिवारों का पुनर्वास और पुनर्स्थापन करना जरूरी होता है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में कहा है कि इस कानून के तहत जमीन लिए जाने पर जो भी राशि सरकार देती है, चाहे वह सरकारी आदेश से मिले या आपसी समझौते से, वह व्यक्ति और HUF दोनों के लिए पूरी तरह कर-मुक्त होगी। यानी इस पैसे पर कोई कैपिटल गेन टैक्स भी नहीं लगेगा।

अब तक स्थिति साफ नहीं थी। आयकर कानून में सिर्फ खेती वाली जमीन के जबरन अधिग्रहण पर कर छूट थी, जबकि भूमि अधिग्रहण कानून खेती और गैर-खेती में फर्क नहीं करता था। इसी वजह से गैर-खेती वाली जमीन के मामलों में भ्रम बना हुआ था कि कर लगेगा या नहीं।

नए नियम से क्या बदलेगा?

अब सरकार ने दोनों कानूनों को एक जैसा कर दिया है। आयकर विभाग ने बजट से जुड़े सवाल-जवाब में बताया कि नए बदलाव के बाद भूमि अधिग्रहण कानून के तहत किसी भी तरह की जमीन लेने पर मिलने वाली राशि व्यक्ति और HUF के लिए पूरी तरह कर-मुक्त रहेगी, चाहे जमीन खेती की हो या नहीं।

यह नया नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। हालांकि जिन लोगों की जमीन इससे पहले, यानी 2025–26 वित्त वर्ष तक ली गई है, उन्हें भी पुराने सरकारी निर्देश के अनुसार कर छूट मिलती रहेगी।

इन मामलों में देना होगा टैक्स

लेकिन इसमें एक जरूरी अपवाद भी है। अगर जमीन निजी कंपनियों या सरकार-निजी साझेदारी वाले कामों के लिए ली जाती है, तो ऐसे मामलों में मिलने वाला पैसा कर-मुक्त नहीं होगा। क्योंकि इन स्थितियों में सरकार सिर्फ प्रक्रिया आसान बनाती है, असली फायदा निजी कंपनी को होता है। इसलिए इसे पूरी तरह सरकारी अधिग्रहण नहीं माना जाता, बल्कि व्यापारिक सौदा समझा जाता है।

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Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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