पर्सनल फाइनेंस
.png)
3 min read | अपडेटेड February 26, 2026, 17:18 IST
सारांश
सेबी ने अपने सर्कुलर में स्कीमों को मोटे तौर पर पांच कैटेगरी- इक्विटी, ऋण (Debt) (बॉन्ड), हाइब्रिड, लाइफ साइकल और अन्य स्कीम्स- फंड ऑफ फंड्स स्कीम्स और इंडेक्स फंड या ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) जैसी पैसिव स्कीमों… में वर्गीकृत किया है।

सेबी ने म्यूचुअल फंड क्लासिफिकेशन नियम में किया सुधार
बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India, SEBI) ने गुरुवार को म्यूचुअल फंड स्कीमों के वर्गीकरण के लिए एक संशोधित रूपरेखा जारी की। इसके तहत ‘लाइफ साइकल फंड’ को शामिल किया गया है, सॉल्यूशन्स ओरिएंटेड स्कीमों की कैटेगरी को खत्म किया गया है और एकरूपता और निवेशक संरक्षण को बढ़ाने के लिए खुलासा मानदंडों को सख्त किया गया है। यह कदम, स्कीमों के नाम में बढ़ा-चढ़ाकर किए गए रिटर्न दावों पर अंकुश लगाने और ‘नाम के अनुरूप’ स्थिति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। सेबी म्यूचुअल फंड के बदलते परिदृश्य और विभिन्न एसेट क्लासेज में उभरते मौकों के हिसाब से नियामकीय रूपरेखा बनाने की कोशिश कर रहा है। सेबी ने अपने सर्कुलर में स्कीमों को मोटे तौर पर पांच कैटेगरी- इक्विटी, ऋण (Debt) (बॉन्ड), हाइब्रिड, लाइफ साइकल और अन्य स्कीम्स- फंड ऑफ फंड्स स्कीम्स और इंडेक्स फंड या ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) जैसी पैसिव स्कीमों… में वर्गीकृत किया है।
सेबी ने कहा, ‘स्कीम का नाम स्कीम कैटेगरी के हिसाब से होगा। इसका मकसद निवेशकों के लिए योजनाओं की पहचान को आसान बनाना और म्यूचुअल फंड में एक खास कैटेगरी की स्कीमों के नामों में एकरूपता लाना है।’ बाजार नियामक ने कहा, ‘स्कीम के नाम में ऐसे शब्दों/वाक्यांशों का प्रयोग नहीं किया जाएगा जो केवल स्कीम के प्रतिफल पहलू को बताते हों।’ पेशकश दस्तावेजों और विज्ञापनों में ‘स्कीम के प्रकार’ के विवरण में सेबी के निर्धारित फॉर्मेट का सख्ती से पालन करना चाहिए।
चॉइस वेल्थ के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) निकुंज सर्राफ ने कहा कि सेबी के नए वर्गीकरण नियम रिटेल इन्वेस्टरों के लिए लगातार कॉम्प्लेक्स होती जा रही इस इंडस्ट्री को सिंपल बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने कहा, ‘इक्विटी, डेट (बॉन्ड), हाइब्रिड और सॉल्यूशन्स-ओरिएंटेड फंड में कैटेगरी को साफ तौर से परिभाषित करके और एक समान एसेट अलॉटमेंट लिमिट्स निर्धारित करके, नियामक यह सुनिश्चित कर रहा है कि स्कीमें वास्तव में अपने दावों को प्रतिबिंबित करें। इससे दोहराव कम होता है, तुलनात्मक स्थिति बेहतर होती है और प्रोडक्ट की स्थिति में आवश्यक पारदर्शिता आती है।’
सर्कुलर के मुताबिक, सॉल्यूशन्स ओरिएंटेड स्कीमों की कैटेगरी को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। इस कैटेगरी के अंतर्गत मौजूदा स्कीमों के तहत नए निवेश स्वीकार नहीं किए जाएंगे और सेबी की पूर्व स्वीकृति के अधीन समान परिसंपत्ति अलॉटमेंट और जोखिम प्रोफाइल वाली अन्य योजनाओं में इनका विलय हो जाएगा।
सॉल्यूशन्स ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड स्कीम स्पेशलाइज्ड, लॉन्ग-टर्म निवेश साधन हैं, जो रिटायरमेंट या बच्चों की एजुकेशन जैसे खास लक्ष्यों के लिए तैयार किए गए हैं। इन स्कीमों में अनिवार्य पांच साल का ‘लॉक-इन’ पीरियड होता है। इसके अलावा, सेबी ने कहा कि विदेशी प्रतिभूतियों को अब एक अलग परिसंपत्ति वर्ग के रूप में नहीं माना जाएगा।
साथ ही, नियामक ने पूर्व-निर्धारित मैच्योरिटी और लक्ष्य-आधारित निवेश के लिए ‘ग्लाइड पाथ’ रणनीति के साथ ओपन-एंडेड स्कीमों के रूप में ‘लाइफ साइकल फंड’ की शुरुआत की है। इसमें इक्विटी, डेट, इनविट (बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट) और गोल्ड/सिल्वर ईटीएफ आदि में निवेश करने की सुविधा प्रदान की जाती है। इसके अलावा, जैसे-जैसे स्कीम मैच्योरिटी के करीब आती है, इक्विटी में अलॉटमेंट निरंतर कम होता जाता है, जबकि बॉन्ड यानी निश्चित आय वाले प्रोडक्ट्स में अलॉटमेंट बढ़ता जाता है।
संबंधित समाचार
लेखकों के बारे में
.png)
अगला लेख
What Is Yield to Maturity (YTM) in Bonds? A Complete Guide
Employees' Provident Fund Scheme 2026: Everything EPF Members Need to Know
Employees’ Deposit Linked Insurance, 2026: All You Need to Know
Explore Learning Centre
All topics · stocks, MFs, derivatives, IPOs