पर्सनल फाइनेंस
.png)
4 min read | अपडेटेड February 01, 2026, 18:05 IST
सारांश
Budget 2026: विदेश पैसा भेजने वालों के लिए राहत दी गई है। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम के तहत अगर कोई पढ़ाई या मेडिकल इलाज के लिए 10 लाख रुपये से ज्यादा भेजता है, तो अब उस पर TCS सिर्फ 2 फीसदी लगेगा, जबकि पहले यह 5 फीसदी था।

Budget 2026: सरकार ने बजट में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने का ऐलान किया है।
Budget 2026 में सरकार ने टैक्स स्लैब में बड़े बदलाव नहीं किए, लेकिन ऐसे कई छोटे-छोटे फैसले लिए हैं जो आम टैक्सपेयर्स की रोजमर्रा की परेशानियों को कम कर सकते हैं। नौकरीपेशा लोग, प्रोफेशनल्स, निवेशक और विदेश पैसा भेजने वाले सभी इस बजट से सीधे प्रभावित होंगे। सरकार का फोकस इस बार टैक्स सिस्टम को आसान बनाने, नकदी पर दबाव कम करने और ITR से जुड़े नियमों को सरल करने पर रहा है।
सरकार ने बजट में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने का ऐलान किया है। फ्यूचर्स पर STT अब 0.02% से बढ़कर 0.05% हो गया है। यानी करीब 150% की बढ़ोतरी। वहीं ऑप्शंस पर STT 0.1% से बढ़कर 0.15% कर दिया गया है, जो लगभग 50% ज्यादा है। इसका सीधा मतलब है कि डेरिवेटिव ट्रेडिंग अब पहले से महंगी हो जाएगी। इसके अलावा शेयर बायबैक से मिलने वाली रकम को अब कैपिटल गेन माना जाएगा, जिससे छोटे और माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स को फायदा मिलेगा।
विदेश पैसा भेजने वालों के लिए राहत दी गई है। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम के तहत अगर कोई पढ़ाई या मेडिकल इलाज के लिए 10 लाख रुपये से ज्यादा भेजता है, तो अब उस पर TCS सिर्फ 2 फीसदी लगेगा, जबकि पहले यह 5 फीसदी था। विदेश टूर पैकेज पर TCS भी घटाकर सीधे 2 फीसदी कर दिया गया है, रकम की कोई शर्त नहीं रहेगी। हालांकि अन्य वजहों से विदेश पैसा भेजने पर TCS अब भी 20 फीसदी ही रहेगा।
मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल यानी MACT से मिलने वाले मुआवजे पर मिलने वाला ब्याज अब पूरी तरह टैक्स फ्री कर दिया गया है। इस पर TDS भी नहीं कटेगा, चाहे रकम कितनी भी बड़ी क्यों न हो।
मैनपावर सप्लाई से जुड़े भुगतान को अब “वर्क कॉन्ट्रैक्ट” माना जाएगा। इसका मतलब यह है कि अब इस पर TDS कॉन्ट्रैक्टर पेमेंट की तरह कटेगा, न कि प्रोफेशनल फीस की तरह।
छोटे टैक्सपेयर्स के लिए एक और सुविधा दी गई है। अब वे ऑनलाइन आवेदन करके लो या निल TDS सर्टिफिकेट ले सकेंगे। पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी और इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन के बाद सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा।
म्यूचुअल फंड इनकम, सिक्योरिटीज पर ब्याज और डिविडेंड से जुड़ा नो-TDS डिक्लेरेशन अब डिपॉजिटरी के जरिए किया जा सकेगा। डिपॉजिटरी यह जानकारी पेयर और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को हर तिमाही भेजेगी।
ITR फाइलिंग से जुड़े नियम भी बदले गए हैं। अब रिवाइज्ड रिटर्न 31 मार्च तक फाइल की जा सकेगी। अगर कोई 31 दिसंबर के बाद रिटर्न रिवाइज करता है, तो 5 लाख रुपये तक की आय पर 1,000 रुपये और 5 लाख से ज्यादा आय पर 5,000 रुपये फीस देनी होगी।
अलग-अलग कैटेगरी के लिए अलग ड्यू डेट तय की गई है। ITR-1 और ITR-2 की आखिरी तारीख 31 जुलाई होगी, जबकि नॉन-ऑडिट बिजनेस और ट्रस्ट्स के लिए 31 अगस्त रखी गई है।
अगर कोई रेजिडेंट व्यक्ति या HUF किसी NRI से प्रॉपर्टी खरीदता है, तो अब उसे TAN लेने की जरूरत नहीं होगी। PAN के जरिए ही TDS रिपोर्ट किया जा सकेगा, जैसे रेजिडेंट से रेजिडेंट प्रॉपर्टी डील में होता है।
एम्प्लॉयी कॉन्ट्रिब्यूशन को लेकर भी बदलाव किया गया है। अगर एम्प्लॉयर PF, ESI या सुपरएनुएशन फंड में कर्मचारी का पैसा रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख तक जमा कर देता है, तो उस पर डिडक्शन मिल जाएगा। नॉन-लाइफ इंश्योरेंस में डिडक्शन उसी साल मिलेगा जिस साल टैक्स डिडक्ट या पे किया जाएगा। इसके अलावा FAST–DS 2026 नाम की स्कीम लाई गई है, जिसके तहत तय सीमा तक विदेशी एसेट्स और विदेशी इनकम को घोषित किया जा सकेगा।
सरकार ने पेनल्टी और प्रॉसिक्यूशन में भी राहत दी है। अगर कोई इनकम कम दिखाई गई है और टैक्स की पूरी रकम चुका दी जाती है, तो प्रॉसिक्यूशन से छूट मिलेगी। अनएक्सप्लेंड कैश क्रेडिट के मामले में 120 फीसदी टैक्स भरने पर इम्युनिटी दी जाएगी।
कैश क्रेडिट या अनएक्सप्लेंड इन्वेस्टमेंट जैसी स्पेशल इनकम पर टैक्स अब 60 फीसदी से घटाकर 30 फीसदी कर दिया गया है। पेनल्टी को अंडर-रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क में शामिल कर दिया गया है, जिसमें अधिकतम पेनल्टी टैक्स की 200 फीसदी तक हो सकती है।
संबंधित समाचार
इसको साइनअप करने का मतलब है कि आप Upstox की नियम और शर्तें मान रहे हैं।
लेखकों के बारे में
.png)
अगला लेख
इसको साइनअप करने का मतलब है कि आप Upstox की नियम और शर्तें मान रहे हैं।