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4 min read | अपडेटेड October 01, 2026, 19:16 IST
सारांश
अक्टूबर के महीने में अगर आप म्यूचुअल फंड में एसआईपी शुरू करने का मन बना रहे हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। बाजार के मौजूदा उतार-चढ़ाव में बिना सोचे-समझे फैसला लेने से नुकसान हो सकता है। जानिए वे 5 बड़ी गलतियां जिनसे बचकर आप बेहतर रिटर्न हासिल कर सकते हैं।

अक्टूबर में SIP शुरू करने से पहले इन 5 आम गलतियों के बारे में जानना बहुत जरूरी है।
म्यूचुअल फंड में SIP यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान के जरिए हर महीने छोटा-छोटा निवेश करके बड़ा फंड तैयार करना काफी लोकप्रिय हो चुका है। अक्टूबर का महीना नए वित्तीय लक्ष्यों की शुरुआत के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। त्यौहारों के इस सीजन में कई लोग अपनी बचत को सही जगह लगाने के लिए SIP की शुरुआत करने की योजना बनाते हैं। लेकिन अक्सर देखा जाता है कि सही जानकारी न होने की वजह से नए निवेशक कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे उनका फ्यूचर का बजट बिगड़ जाता है और उन्हें मनचाहा रिटर्न नहीं मिल पाता है। अगर आप भी इस महीने SIP शुरू करने जा रहे हैं, तो आपको 5 मुख्य गलतियों से बचना चाहिए।
जब शेयर बाजार में गिरावट आती है या करेक्शन का दौर चलता है, तो कई नए निवेशक घबरा जाते हैं। वे अपनी चलती हुई SIP को रोक देते हैं या नई SIP शुरू करने का प्लान टाल देते हैं। यह निवेश की सबसे बड़ी गलतियों में से एक है। बाजार की गिरावट में ही आपको कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स खरीदने का मौका मिलता है। जब बाजार वापस ऊपर जाता है, तो यही कम कीमत पर खरीदी गई यूनिट्स आपको सबसे ज्यादा फायदा पहुंचाती हैं। इसलिए बाजार के उतार-चढ़ाव से डरे बिना लगातार निवेश करते रहना ही समझदारी है।
ज्यादातर लोग SIP शुरू करते समय केवल उन्हीं फंड्स को चुनते हैं, जिन्होंने पिछले एक या दो सालों में सबसे ज्यादा पर्सेंट रिटर्न दिया हो। यह तरीका पूरी तरह से गलत साबित हो सकता है। जरूरी नहीं कि जिस फंड ने बीते समय में बेहतरीन प्रदर्शन किया है, वह आगे भी वैसा ही प्रदर्शन जारी रखेगा। किसी भी फंड का चुनाव करते समय उसके ट्रैक रिकॉर्ड, फंड मैनेजर के अनुभव और रिस्क मैनेजमेंट को देखना चाहिए। सिर्फ पिछले रिटर्न के आधार पर फैसला लेने से आपका पैसा गलत जगह फंस सकता है।
कुछ निवेशकों को लगता है कि जितने ज्यादा फंड्स में SIP करेंगे, उनका रिस्क उतना ही कम हो जाएगा और रिटर्न ज्यादा मिलेगा। इस सोच के चक्कर में वे 8 से 10 अलग-अलग फंड्स में पैसा लगाने लगते हैं। जरूरत से ज्यादा फंड्स रखने से पोर्टफोलियो का ओवरलैपिंग बढ़ जाता है। इसका मतलब है कि अलग-अलग फंड्स भी एक ही जैसी कंपनियों में पैसा लगा रहे होते हैं। इससे आपके निवेश को मैनेज करना मुश्किल हो जाता है और रिटर्न भी औसतन कम हो जाता है। हमेशा 3 से 4 अच्छे फंड्स चुनना ही काफी होता है।
इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में किया गया निवेश लंबे समय में ही अच्छा फल देता है। कई लोग अपनी पूरी बचत को सीधे इक्विटी SIP में डाल देते हैं और अपने पास कोई इमरजेंसी फंड नहीं रखते हैं। ऐसे में जब अचानक कोई मेडिकल या पारिवारिक जरूरत पड़ती है, तो उन्हें अपनी SIP बीच में ही तोड़नी पड़ती है या नुकसान में पैसे निकालने पड़ते हैं। SIP की शुरुआत करने से पहले कम से कम 3 से 6 महीने के खर्च के बराबर रकम किसी सेफ जगह पर इमरजेंसी फंड के रूप में अलग रखनी चाहिए।
अगर आपका गोल 1 से 3 साल जैसे छोटे समय का है, जैसे कार खरीदना या कहीं घूमने जाना, तो उसके लिए इक्विटी SIP चुनना भारी पड़ सकता है। इक्विटी मार्केट में छोटे समय के लिए काफी उतार-चढ़ाव रहता है। हो सकता है कि जब आपको पैसे की जरूरत हो, तब बाजार नीचे हो और आपका मूल धन भी कम हो जाए। शॉर्ट टर्म गोल्स के लिए हमेशा डेट फंड्स या एफडी जैसे सुरक्षित विकल्पों को चुनना चाहिए। इक्विटी SIP का फायदा केवल 5 साल या उससे ज्यादा समय के लंबे गोल्स के लिए ही मिलता है।
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