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4 min read | अपडेटेड October 12, 2026, 11:31 IST
सारांश
सोमवार को सरकारी बॉन्ड की यील्ड में तेज बढ़ोतरी हुई। इसकी मुख्य वजह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए कदम हैं, जिनसे बाजार में नकदी कम होने की आशंका है। RBI के सख्त रुख अपनाने से यह चिंता भी बढ़ गई है कि आने वाले समय में ब्याज दरें और बढ़ सकती हैं।

शेयर बाजार में दबाव की एक और बड़ी वजह हाल ही में RBI द्वारा की गई रेपो रेट में बढ़ोतरी है।
भारतीय शेयर बाजार में आज 12 अक्तूबर को भारी उतार-चढ़ाव का माहौल है। आज शुरुआती कारोबार में बाजार में तेजी थी, लेकिन जल्द ही यह लाल निशान पर चला गया। आज के कारोबार में BSE Sensex में करीब 315 अंकों तक की गिरावट नजर आई और यह 72156.03 के स्तर तक लुढ़क गया। दूसरी तरफ Nifty 50 भी करीब 65 अंक टूटकर 22455.10 के लेवल पर ट्रेड करता दिखा। आज शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 412 अंक उछलकर 72884.25 के लेवल पर पहुंच गया था। इसका मतलब है कि आज के हाई से सेंसेक्स करीब 728 अंक टूट चुका है। यहां हम जानेंगे कि बाजार में आज की गिरावट के लिए कौन से फैक्टर्स जिम्मेदार हैं।
शेयर बाजार में आज की रैली के पीछे प्रॉफिट बुकिंग एक बड़ी वजह है। आज लगातार दूसरे कारोबारी दिन बाजार में तेजी देखी गई, जिसके बाद निवेशकों ने प्रॉफिट निकालना बेहतर समझा। इसके पहले शुक्रवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला इंडेक्स सेंसेक्स 879.09 अंक की बढ़त के साथ 72,472.33 के स्तर पर पहुंच गया था। दूसरी तरफ निफ्टी 50 भी 288.65 अंक का उछाल लेकर 22,520.45 के स्तर पर बंद हुआ। इसके बाद अब लगातार दूसरे दिन शुरुआती कारोबार में रैली के बाद निवेशकों ने प्रॉफिट निकालना शुरू कर दिया। इसके चलते बाजार में गिरावट आई।
सोमवार को सरकारी बॉन्ड की यील्ड में तेज बढ़ोतरी हुई। इसकी मुख्य वजह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए कदम हैं, जिनसे बाजार में नकदी कम होने की आशंका है। RBI के सख्त रुख अपनाने से यह चिंता भी बढ़ गई है कि आने वाले समय में ब्याज दरें और बढ़ सकती हैं। 2036 में मैच्योर होने वाले 6.94 फीसदी ब्याज दर वाले सरकारी बॉन्ड की यील्ड सोमवार को बाजार खुलते ही बढ़कर 7.3553 फीसदी हो गई, जबकि शुक्रवार को यह 7.2994 फीसदी थी। बता दें कि RBI ने 9 अक्टूबर को 13 अक्टूबर के लिए ₹25,000 करोड़ के सरकारी बॉन्ड बेचने की घोषणा की।
शेयर बाजार में दबाव की एक और बड़ी वजह हाल ही में RBI द्वारा की गई रेपो रेट में बढ़ोतरी है। RBI ने रेपो रेट को 25 बेसिस प्वॉइंट्स बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर दिया है। इसके साथ ही रुख को 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' भी किया गया है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी से कंपनियों के लिए लोन महंगा होता है, जिससे उनकी कमाई प्रभावित होती है और बाजार पर दबाव आता है।
पिछले कुछ समय में विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली की रफ्तार बढ़ी है। बीते कारोबारी दिन यानी 09 अक्तूबर को FIIs ने 3,568.90 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। इसके पहले 08 अक्तूबर को 12,943.58 करोड़ रुपये, 07 अक्तूबर को 6,121.37 करोड़ रुपये और 06 अक्तूबर को 2,961.30 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई थी। FIIs की सेलिंग ने भी बाजार का सेंटीमेंट खराब किया है।
आज क्रूड ऑयल के भाव में हल्की गिरावट तो दिख रही है लेकिन यह अभी भी 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है। आज ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव 0.77 फीसदी टूटकर 104 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये की गिरती कीमत को रोकने और उसमें स्थिरता लाने के लिए कुछ कदम उठाए हैं। इसके तहत तेल कंपनियों को जरूरत के डॉलर उपलब्ध कराने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। साथ ही, विदेशी मुद्रा में होने वाले कुछ लेन-देन और जोखिम से बचाव (हेजिंग) को महंगा किया गया है। इन कदमों से बाजार में डॉलर की मांग कम हो सकती है, रुपये पर गिरने का दबाव घट सकता है और रुपये के खिलाफ सट्टेबाजी पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, इन उपायों से बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
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