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4 min read | अपडेटेड June 15, 2026, 07:27 IST
सारांश
वेदांता ग्रुप के शेयरहोल्डर्स के लिए 15 जून 2026 का दिन बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है। कंपनी के डिमर्जर प्रोसेस के तहत चार नई कंपनियां शेयर बाजार में अलग से लिस्ट होने जा रही हैं। इसके बाद बाजार में वेदांता ग्रुप की कुल पांच कंपनियां ट्रेड करेंगी, जिसमें वेदांता ऑयल एंड गैस भी शामिल है।

वेदांता ग्रुप की कंपनियां सोमवार से शेयर बाजार में अलग-अलग ट्रेड करना शुरू करेंगी। Image: Vedanta Aluminium website
वेदांता ग्रुप के शेयरहोल्डर्स और शेयर बाजार के निवेशकों के लिए 15 जून 2026 यानी कि आज का दिन एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। माइनिंग सेक्टर के इस बड़े ग्रुप की चार डिमर्ज यानी अलग हुई कंपनियां सोमवार से देश के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंजों NSE और BSE पर अलग से अपनी ट्रेडिंग शुरू करने जा रही हैं। इस लिस्टिंग के बाद बाजार में मूल कंपनी वेदांता लिमिटेड के साथ-साथ ग्रुप की कुल पांच कंपनियां ट्रेड के लिए उपलब्ध होंगी। अलग होने वाली कंपनियों में वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड, वेदांता पावर लिमिटेड, वेदांता एल्युमिनियम मेटल लिमिटेड और वेदांता आयरन एंड स्टील लिमिटेड शामिल हैं। इनमें से वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड को लेकर निवेशकों में काफी उत्साह देखा जा रहा है।
वेदांता लिमिटेड के डिमर्जर प्रोसेस के तहत वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड के इक्विटी शेयर 15 जून से बाजार में आ जाएंगे। कंपनी को NSE और BSE से इसके लिए जरूरी मंजूरियां मिल चुकी हैं। शेयर बाजार में इस कंपनी के शेयरों की ट्रेडिंग "VOGL" नाम से की जाएगी। इस लिस्टिंग के बाद निवेशकों को कंपनी के तेल और गैस बिजनेस का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करने, इसके परफॉर्मेंस को समझने और इसके वैल्यूएशन के आधार पर सीधे निवेश करने का मौका मिलेगा। यह कंपनी मुख्य रूप से 'केर्न' ब्रांड के तहत काम करती है और भारत में प्राइवेट सेक्टर की सबसे बड़ी तेल और गैस उत्पादक कंपनियों में से एक है। देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए घरेलू उत्पादन पर काफी निर्भर है, ऐसे में इस कंपनी की भूमिका बेहद अहम हो जाती है।
कंपनी ने पब्लिक संकेतकों के साथ बाजार में कदम रखने के साथ ही अपने फ्यूचर प्लान का भी खुलासा किया है। कंपनी का लक्ष्य फाइनेंशियल ईयर 2029 तक अपने प्रोडक्शन को बढ़ाकर 1 लाख 50 हजार बैरल ऑयल इक्विवेलेंट प्रति दिन (kboepd) से अधिक करने का है। इसके लिए कंपनी नए प्रोजेक्ट्स, गहरे गैस प्रोजेक्ट्स, ऑफशोर डेवलपमेंट और बेहतर तेल रिकवरी तकनीकों का इस्तेमाल करने जा रही है। वर्तमान में कंपनी के पास देश भर में 47,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैले 44 तेल और गैस ब्लॉक मौजूद हैं। कंपनी के पोर्टफोलियो में लगभग 1.4 बिलियन बैरल ऑयल इक्विवेलेंट का बड़ा रिसोर्स बेस है। इसके मुख्य एसेट्स राजस्थान, आंध्र प्रदेश, गुजरात और असम के प्रमुख बेसिन में स्थित हैं।
अगर इस कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो फाइनेंशियल ईयर 2026 की चौथी तिमाही यानी क्यू4 में वेदांता ऑयल एंड गैस का रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले 3 पर्सेंट गिरकर 2,583 करोड़ रुपये रहा है। वहीं इस दौरान कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट यानी EBITDA भी 12 पर्सेंट की गिरावट के साथ 1,065 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। हालांकि इस तिमाही में कंपनी का एवरेज ऑयल प्राइस रियलाइजेशन पिछले साल के 70.9 डॉलर के मुकाबले बढ़कर 79.4 डॉलर प्रति बैरल रहा। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2025-26 की बात करें तो कंपनी का रेवेन्यू 13 पर्सेंट घटकर 9,582 करोड़ रुपये और EBITDA 7 पर्सेंट घटकर 4,350 करोड़ रुपये रहा है।
कंपनी की वेबसाइट के अनुसार, फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के दौरान कंपनी का कुल ग्रॉस ऑपरेटेड प्रोडक्शन 103 kboepd रहा, जो पिछले साल से 19 पर्सेंट कम था। प्रोडक्शन में यह कमी मुख्य रूप से एमबीए फील्ड्स में नेचुरल रिसोर्स की गिरावट के कारण आई थी। हालांकि कंपनी ने मंगला, ऐश्वर्या, टाइट ऑयल और रागेश्वरी डीप गैस फील्ड्स में नए कुएं खोदकर इस कमी को पाटने की कोशिश की है। इसके अलावा ओएएलपी एसेट्स के तहत मिली जया डिस्कवरी से भी प्रोडक्शन को सपोर्ट मिला है। भारत सरकार की ओएएलपी पॉलिसी के तहत कंपनियों को अपनी पसंद के ब्लॉक चुनने और उन पर साल भर बोली लगाने की आजादी मिलती है।
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