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बाजार में लिस्ट होने से पहले भी रिटेल खरीद सकते हैं अनलिस्टेड शेयर, समझिए क्यों बढ़ रहा क्रेज?

विकास तिवारी

4 min read | अपडेटेड May 21, 2026, 12:54 IST

सारांश

भारत के इनवेस्टमेंट बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। निवेशक अब पारंपरिक तरीकों से हटकर अनलिस्टेड शेयर्स और प्री-आईपीओ में जमकर पैसा लगा रहे हैं। खासकर युवा और डिजिटल रूप से एक्टिव निवेशक कंपनियों के शुरुआती दौर में ही इनवेस्टमेंट करके बड़ी वेल्थ बनाने के मौके तलाश रहे हैं।

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अनलिस्टेड शेयर्स उन कंपनियों के स्टॉक होते हैं जो अभी एनएसई या बीएसई जैसे पब्लिक प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं हुए हैं। | Image: Shutterstock

भारत के इनवेस्टमेंट सेक्टर में इस समय एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। देश के आम निवेशक अब केवल शेयर बाजार के पुराने और पारंपरिक तौर-तरीकों से आगे निकलने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले कुछ समय से भारतीय निवेशकों के बीच अनलिस्टेड शेयर्स और प्री-आईपीओ इनवेस्टमेंट को लेकर एक अलग ही क्रेज और उत्साह देखा जा रहा है। स्टॉकइफाई के फाउंडर और सीईओ पीयूष झुनझुनवाला के मुताबिक, इस नए ट्रेंड में देश के युवा और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करने वाले निवेशक सबसे आगे हैं। ये युवा निवेशक किसी कंपनी के स्थापित होने का इंतजार करने के बजाय उसके शुरुआती दौर में ही पैसे लगाकर अपने लिए बड़ी वेल्थ बनाने की इच्छा रख रहे हैं।

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क्या होते हैं अनलिस्टेड शेयर्स?

अनलिस्टेड शेयर्स का सीधा सा मतलब उन कंपनियों के स्टॉक से होता है जो अभी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE या बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE जैसे किसी भी पब्लिक प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड नहीं हैं। इन कंपनियों में तेजी से आगे बढ़ने वाले नए स्टार्टअप, फिनटेक और टेक्नोलॉजी ग्रुप शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा कई ऐसे पुराने और स्थापित बिजनेस भी इस लिस्ट में आते हैं जो आने वाले समय में शेयर बाजार में अपनी एंट्री यानी पब्लिक डेब्यू करने की तैयारी में जुटे हुए हैं। आज के निवेशक किसी भी कंपनी के आईपीओ आने से पहले ही उसमें अपना पैसा लगा देना चाहते हैं ताकि फ्यूचर में जब कंपनी की वैल्यू बढ़े, तो उन्हें उसका पूरा फायदा मिल सके।

स्टार्टअप इकोसिस्टम और रिटेल निवेशकों की एंट्री

इस पूरे बदलाव के पीछे भारत का तेजी से बढ़ता हुआ स्टार्टअप इकोसिस्टम एक मुख्य वजह है। पिछले कुछ सालों के दौरान देश ने फिनटेक, एडटेक, हेल्थटेक, लॉजिस्टिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे कई सेक्टर्स में बड़ी संख्या में यूनिकॉर्न और हाई-ग्रोथ वेंचर्स को जन्म दिया है। जैसे-जैसे ये कंपनियां अपने बिजनेस को बढ़ा रही हैं, प्राइवेट मार्केट में इनवेस्टमेंट करने का रास्ता केवल बड़े संस्थागत निवेशकों या वेंचर कैपिटल फर्म्स तक ही सीमित नहीं रह गया है। इंटरनेट और डिजिटल इनवेस्टमेंट प्लेटफॉर्म्स के आने से अब आम रिटेल निवेशकों के लिए भी प्री-आईपीओ के मौकों का फायदा उठाना बेहद आसान हो गया है। लोग अब डिजिटल माध्यमों से इन कंपनियों के कामकाज को आसानी से ट्रैक कर पा रहे हैं।

क्यों युवाओं को पसंद आ रहा है यह विकल्प?

देश के युवा निवेशक अब पारंपरिक इनवेस्टमेंट के तरीकों से अलग हटकर नए और वैकल्पिक रास्ते तलाशने के लिए पूरी तरह तैयार दिख रहे हैं। जहां पुराने और पारंपरिक इनवेस्टमेंट के तरीकों में पैसे बढ़ने की रफ्तार काफी धीमी और स्थिर महसूस होती है, वहीं प्री-आईपीओ इनवेस्टमेंट लोगों को कंपनी के विस्तार वाले दौर में ही शामिल होने का मौका देता है। बहुत से निवेशकों को लगता है कि अनलिस्टेड शेयर्स के जरिए वे किसी होनहार कंपनी की ग्रोथ स्टोरी का हिस्सा उस समय बन सकते हैं जब वह कंपनी बाजार में एक बड़ा और मशहूर नाम बनने की प्रक्रिया में होती है। यही वजह है कि आज के दौर में रिटेल भागीदारी लगातार बढ़ रही है।

भारी मुनाफे के साथ जुड़े हैं बड़े रिस्क भी

भले ही इस सेक्टर में मिलने वाला संभावित रिटर्न निवेशकों को अपनी तरफ बहुत ज्यादा आकर्षित करता है, लेकिन अनलिस्टेड शेयर्स के बाजार के साथ कुछ वास्तविक और बड़े रिस्क भी जुड़े हुए हैं। इस मार्केट में सबसे बड़ी चिंता लिक्विडिटी यानी पैसे की तरलता को लेकर होती है, क्योंकि इन शेयर्स को सामान्य शेयर्स की तरह जब चाहे तब तुरंत बाजार में बेचा नहीं जा सकता है। इसके साथ ही, इन कंपनियों की वैल्यूएशन को लेकर स्पष्टता भी लिस्टेड कंपनियों जैसी नहीं होती है और रिटर्न मिलने में कभी-कभी बहुत लंबा समय लग सकता है। इसके अलावा नियमों में बदलाव, आईपीओ की योजनाओं में देरी होना या कंपनी के खराब प्रदर्शन की वजह से निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे कमजोर भी हो सकता है।

इन तमाम रिस्क और चिंताओं के बावजूद पीयूष झुनझुनवाला का मानना है कि आने वाले कुछ सालों में यह सेक्टर और तेजी से आगे बढ़ेगा। भारत में बिजनेस करने का नया माहौल, स्टार्टअप्स को मिलने वाली फंडिंग की रफ्तार और निवेशकों के बीच बढ़ती जागरूकता इस प्राइवेट मार्केट इनवेस्टमेंट को आगे ले जाने का काम करेगी। जैसे-जैसे सफल स्टार्टअप्स पब्लिक लिस्टिंग की तरफ कदम बढ़ाएंगे, प्री-आईपीओ डील्स में निवेशकों की भागीदारी और ज्यादा बढ़ती जाएगी। भारत में आईपीओ और प्री-आईपीओ इनवेस्टमेंट का फ्यूचर काफी शानदार नजर आ रहा है, बशर्ते निवेशक बिना अच्छी रिसर्च और रिस्क का आकलन किए बिना इसमें कदम न बढ़ाएं।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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