मार्केट न्यूज़
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4 min read | अपडेटेड March 08, 2026, 14:42 IST
सारांश
पिछले हफ्ते शेयर बाजार में आई भयावह गिरावट की वजह से सेंसेक्स की टॉप 10 में से 8 कंपनियों का मार्केट कैप 2,81,581.53 करोड़ रुपये घट गया। सबसे ज्यादा नुकसान भारतीय स्टेट बैंक को हुआ। विदेशी निवेशकों ने भी बाजार से 21,000 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।

ईरान पर हुए हमले के बाद दुनिया भर के शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखी गई है।
भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला हफ्ता किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। बाजार में आई भयावह गिरावट ने देश की सबसे बड़ी और मजबूत कंपनियों की वैल्यू को मिट्टी में मिला दिया। बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स में पिछले हफ्ते 2.91 प्रतिशत यानी 2368.29 अंकों की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट का सबसे बुरा असर बाजार की टॉप 10 कंपनियों पर पड़ा है। आंकड़ों के मुताबिक इन 10 में से 8 बड़ी कंपनियों का मार्केट कैप 2,81,581.53 करोड़ रुपये कम हो गई है।
पिछले हफ्ते बाजार में मची तबाही में सबसे ज्यादा नुकसान पब्लिक सेक्टर के सबसे बड़े बैंक यानी भारतीय स्टेट बैंक को उठाना पड़ा है। एसबीआई का मार्केट कैप 53,952.96 करोड़ रुपये घटकर 10,55,567.27 करोड़ रुपये रह गया है। बैंक के निवेशकों के लिए यह हफ्ता काफी भारी रहा। बैंकिंग सेक्टर की अन्य कंपनियों की हालत भी कुछ खास अच्छी नहीं रही। आईसीआईसीआई बैंक की वैल्यूएशन में 46,936.82 करोड़ रुपये की कमी आई है, जिससे इसकी हैसियत घटकर 9,40,049.82 करोड़ रुपये पर आ गई।
वहीं प्राइवेट सेक्टर के दिग्गज एचडीएफसी बैंक का मार्केट कैप भी 46,552.3 करोड़ रुपये कम होकर 13,19,107.08 करोड़ रुपये रह गया है। केवल बैंक ही नहीं बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की बड़ी कंपनी लार्सन एंड टुब्रो के मार्केट कैप में भी 45,629.03 करोड़ रुपये की गिरावट आई। इसके अलावा बजाज फाइनेंस की वैल्यूएशन 28,934.56 करोड़ रुपये घट गई। आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी टीसीएस और एफएमसीजी सेक्टर की हिंदुस्तान यूनिलीवर को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा। भारती एयरटेल की मार्केट हैसियत में भी करीब 4,732 करोड़ रुपये की कमी आई है।
हैरानी की बात यह है कि जहां पूरी मार्केट लाल निशान में डूबी हुई थी, वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज और इंफोसिस ने निवेशकों को थोड़ी राहत दी। रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप पिछले हफ्ते के दौरान 14,750.39 करोड़ रुपये बढ़ गया, जिससे इसकी कुल वैल्यू 19,01,583.05 करोड़ रुपये हो गई। इसी तरह दिग्गज आईटी कंपनी इंफोसिस की वैल्यूएशन में भी 3,459.99 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। इन दो कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन की वजह से इंडेक्स को थोड़ा सहारा मिला, वरना गिरावट और भी ज्यादा गहरी हो सकती थी।
बाजार में आई इस गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई की भारी बिकवाली रही। पिछले हफ्ते केवल 4 दिनों के कारोबार में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 21,000 करोड़ रुपये निकाल लिए। आपको बता दें कि 3 मार्च को होली की वजह से बाजार बंद था, इसलिए यह बिकवाली केवल चार दिनों के भीतर हुई है। फरवरी के महीने में इन्हीं निवेशकों ने रिकॉर्ड 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था, लेकिन मार्च की शुरुआत होते ही उनका रुख बदल गया। इससे पहले नवंबर से जनवरी तक भी विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली ही कर रहे थे।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बड़ी गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में शुरू हुआ युद्ध है। इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद खाड़ी देशों में तनाव बहुत बढ़ गया है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की धमकी के बाद कच्चे तेल यानी ब्रेंट क्रूड की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने पूरी दुनिया के बाजारों को डरा दिया है।
इसके अलावा भारतीय रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 92 के पार चला गया है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में हुई बढ़ोतरी ने भी विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार से पैसा निकालने पर मजबूर कर दिया। जानकारों का कहना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक बाजार में ऐसी ही अनिश्चितता बनी रह सकती है। निवेशकों को फिलहाल बड़े निवेश से बचने और बाजार की चाल पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है।
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