मार्केट न्यूज़
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4 min read | अपडेटेड May 04, 2026, 07:14 IST
सारांश
इस हफ्ते शेयर बाजार में भारी उठापटक देखने को मिल सकती है। पांच राज्यों के चुनावी नतीजे, ईरान-अमेरिका तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें बाजार की दिशा तय करेंगी। इसके अलावा कोटक बैंक और डीमार्ट के नतीजों का भी असर दिखेगा। रुपया भी रिकॉर्ड निचले स्तर पर है।

अगले हफ्ते ये फैक्टर तय करेंगे बाजार की चाल
इस हफ्ते शेयर बाजार में निवेशकों को काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसकी कई बड़ी वजहें हैं जो एक साथ बाजार पर असर डालने वाली हैं। आने वाले दिनों में जहां जियो पॉलिटिकल टेंशन, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और रुपए की चाल बाजार को प्रभावित करेगी, वहीं पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणाम और कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बड़ी हलचल मचा सकते हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि यह हफ्ता निवेशकों के लिए काफी संभलकर चलने वाला होगा क्योंकि ग्लोबल और घरेलू दोनों मोर्चों पर बड़ी खबरें आने वाली हैं।
इस हफ्ते बाजार के लिए सबसे बड़ा ट्रिगर पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणाम होंगे। इसमें पश्चिम बंगाल के नतीजों को सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ज्यादातर एग्जिट पोल में बंगाल में बीजेपी की सरकार आने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, पिछले कुछ सालों में बंगाल को लेकर एग्जिट पोल के अनुमान गलत भी साबित हुए हैं, जैसा कि 2021 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में देखा गया था, जहां टीएमसी को बड़ी बढ़त मिली थी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर बीजेपी बंगाल में सरकार बनाती है, तो शेयर बाजार में 5 पर्सेंट या उससे ज्यादा की तेजी देखने को मिल सकती है। निवेशक यह भी देख रहे हैं कि क्या केंद्र की सत्ताधारी पार्टी केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में अपनी पैठ बना पाती है।
ग्लोबल मोर्चे पर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव बाजार की चिंता बढ़ा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे ईरान के ताजा बातचीत के प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हैं। ट्रंप के बयानों से लगता है कि पिछले दो महीने से चला आ रहा यह संघर्ष अभी और खिंच सकता है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही तेहरान का 'होर्मुज स्ट्रेट' पर से कंट्रोल हटाने का दबाव भी बढ़ रहा है। यह एक ऐसा समुद्री मार्ग है जहां से दुनिया के तेल और गैस प्रवाह का लगभग 20 पर्सेंट हिस्सा गुजरता है और इस संघर्ष की वजह से यह बाधित हुआ है।
कच्चे तेल के बाजार में भी भारी हलचल है। हालांकि शुक्रवार को कीमतों में थोड़ी गिरावट आई थी, लेकिन साप्ताहिक आधार पर कीमतें अभी भी ऊपर बनी हुई हैं। इसका बड़ा कारण ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद रखना और अमेरिका द्वारा ईरानी तेल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाना है। जुलाई डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड 108.17 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर से 150 डॉलर की रेंज तक पहुंच सकती हैं। तेल की इन कीमतों का सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ता है जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं।
बाजार में कंपनियों के तिमाही नतीजों का भी असर दिखेगा। कोटक महिंद्रा बैंक और एफएमसीजी सेक्टर की दिग्गज कंपनी डीमार्ट (एवेन्यू सुपरमार्ट्स) ने अपने मार्च तिमाही के आंकड़े जारी कर दिए हैं। डीमार्ट ने मार्च तिमाही में 656.6 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 19 पर्सेंट ज्यादा है। वहीं कोटक महिंद्रा बैंक का नेट प्रॉफिट भी 13.3 पर्सेंट बढ़कर 4,026.55 करोड़ रुपये रहा है। बैंक की नेट ब्याज आय (NII) भी 8.1 पर्सेंट की बढ़त के साथ 7,876 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। इन मजबूत नतीजों का असर सोमवार को इन कंपनियों के शेयरों पर देखने को मिल सकता है।
भारतीय रुपये की कमजोरी ने भी निवेशकों की नींद उड़ा रखी है। गुरुवार को रुपया गिरकर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 95.33 रुपये पर पहुंच गया था। कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने भारत में महंगाई और आर्थिक विकास के संतुलन को लेकर चिंता पैदा कर दी है। रुपए के लिए फिलहाल 95 रुपये से 95.20 रुपये का लेवल एक बड़ा रेजिस्टेंस है। अगर रुपया इस लेवल के ऊपर बना रहता है, तो इसमें और गिरावट आ सकती है। हालांकि, डॉलर की लगातार मांग के बीच भू-राजनीतिक तनाव में कमी आने से ही रुपए को थोड़ी स्थिरता मिलने की उम्मीद की जा सकती है। फिलहाल रुपए का रुख सावधानी भरा बना हुआ है।
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