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REC-PFC Merger: दो सरकारी कंपनियों के मर्जर को मंजूरी, आपका अगर लगा है दांव, तो क्या होगा शेयरों का?

Namita Shukla

3 min read | अपडेटेड June 29, 2026, 13:00 IST

सारांश

REC-PFC Merger: यह मर्जर कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 230-232 और अन्य लागू प्रावधानों के तहत किया जाएगा जिसमें संबंधित शेयरधारकों और कर्जदाताओं को भी शामिल किया गया है। यह मर्जर कई शर्तों पर निर्भर है।

REC-PFC मर्जर

आरईसी के पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन में विलय की योजना को दोनों कंपनियों के निदेशक मंडल की मंजूरी (Photo: Shutterstock)

पब्लिक सेक्टर की पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लि. (पीएफसी) और आरईसी (Rural Electrification Corporation) लि. के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने आरईसी के पीएफसी में मर्जर के प्लान को मंजूरी दे दी है। दोनों कंपनियों ने रविवार देर रात शेयर मार्केट को दी सूचना में यह जानकारी दी। आरईसी के पीएफसी में मर्जर से एक ऐसी वित्तीय कंपनी बनेगी, जिसका कुल कर्ज खाता 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक का होगा। दिन में करीब 12 बजे आरईसी के शेयर .3% यानी कि करीब 1.30 रुपये चढ़कर 365-366 रुपये प्रति शेयर पर ट्रेड हो रहे थे, जबकि पीएफसी के शेयर 1.5% यानी कि करीब 6-7 रुपये गिरकर 425-426 रुपये प्रति शेयर पर ट्रेड हो रहे थे।

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प्लान और इवैल्यूएशन रिपोर्ट के मुताबिक आरईसी का पीएफसी में प्रस्तावित मर्जर के लिए शेयर विनिमय अनुपात (शेयर एक्सचेंज रेशियो) के तहत आरईसी के शेयरधारकों को 10-10 रुपये अंकित मूल्य वाले प्रत्येक चुकता 100 शेयर के बदले पीएफसी के 10-10 रुपये अंकित मूल्य के 88 चुकता शेयर जारी किए जाएंगे। ये शेयर उन शेयरहोल्डर्स को जारी किए जाएंगे जिनके पास पीएफसी और आरईसी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स द्वारा तय की जाने वाली रिकॉर्ड डेट पर कंपनी के शेयर होंगे।

यह मर्जर कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 230-232 और अन्य लागू प्रावधानों के तहत किया जाएगा जिसमें संबंधित शेयरधारकों और कर्जदाताओं को भी शामिल किया गया है। यह मर्जर कई शर्तों पर निर्भर है। इनमें दोनों कंपनियों के शेयरधारकों और कर्जदाताओं की मंजूरी और सभी संबंधित नियामकीय और सरकारी प्राधिकरणों की मंजूरी शामिल है। दोनों कंपनियों के जॉइंट स्टेटमेंट के अनुसार, मर्जर के बाद बनी कंपनी का कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत 'सरकारी कंपनी' का दर्जा बनाए रखना और भारत सरकार का मर्जर के बाद बनी कंपनी में (डायरेक्ट या इनडायरेक्ट रूप से) ज्यादातर मतदान अधिकार और कंट्रोल बनाए रखना भी जरूरी है।

पीएफसी और आरईसी दोनों के लिए डेलॉयट तोचे तोहमत्सु इंडिया एलएलपी सौदा और कर सलाहकार और सिरिल अमरचंद मंगलदास कानूनी सलाहकार के तौर पर काम कर रही है। इसके अलावा, पीएफसी ने आरबीएसए इवैल्यूएशन सलाहकार एलएलपी और आरईसी ने ईएंडवाई मर्चेन्ट बैंकिंग सर्विसेज एलएलपी को जॉइंट इवैल्यूएशन रिपोर्ट देने के लिए नियुक्त किया था। इसके साथ पीएफसी ने एसबीआई कैपिटल मार्केट्स और आरईसी ने नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट को जॉइंट इवैल्यूएशन रिपोर्ट पर अपनी-अपनी राय देने के लिए नियुक्त किया था। गौरतलब है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026 में सरकारी बिजली वित्त कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ाने और उनके कामकाज का दायरा व्यापक करने के लिए उन्हें पुनर्गठित करने की योजना की घोषणा की थी।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)
PTI इनपुट के साथ

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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