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4 min read | अपडेटेड March 11, 2026, 11:00 IST
सारांश
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) का 'राजमार्ग इन्फ्रा इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट' आज अपना 6,000 करोड़ रुपये का आईपीओ लेकर आया है। 11 से 13 मार्च तक चलने वाले इस आईपीओ में निवेशक 99-100 रुपये के प्राइस बैंड पर बोली लगा सकते हैं। यह पैसा टोल रोड एसेट्स को मैनेज करने में इस्तेमाल होगा।

राजमार्ग इन्फ्रा इन्विट देश के प्रमुख नेशनल हाईवे से होने वाली टोल कमाई को मैनेज करेगा।
शेयर बाजार के निवेशकों के लिए आज एक बड़ा मौका खुलकर सामने आया है। सरकारी संस्था नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी एनएचएआई अपना दूसरा इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) बाजार में लेकर आई है। इस आईपीओ का नाम 'राजमार्ग इन्फ्रा इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट' है और यह आज यानी 11 मार्च 2026 से सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया है। इस आईपीओ के जरिए सरकार अपने सड़क प्रोजेक्ट्स का मोनेटाइजेशन कर रही है। इसमें निवेश करने वालों को देश के प्रमुख हाईवे पर इकट्ठा होने वाले टोल टैक्स की कमाई से हिस्सा मिलने की उम्मीद है। यह पूरा आईपीओ फ्रेश इशू पर आधारित है, जिसका मतलब है कि जुटाया गया सारा पैसा सीधे कंपनी के कामकाज और एसेट्स खरीदने में इस्तेमाल होगा।
राजमार्ग इन्फ्रा के इस आईपीओ का कुल साइज 6,000 करोड़ रुपये तय किया गया है। कंपनी ने इसके लिए 99 रुपये से लेकर 100 रुपये प्रति यूनिट का प्राइस बैंड रखा है। अगर आप इसमें पैसा लगाना चाहते हैं, तो आपको कम से कम 150 यूनिट के लिए बोली लगानी होगी। इसका मतलब है कि एक लॉट के लिए आपको करीब 15,000 रुपये का इन्वेस्टमेंट करना होगा। यह आईपीओ 13 मार्च तक खुला रहेगा और इसके बाद 18 मार्च को शेयरों का अलॉटमेंट फाइनल किया जाएगा। अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक रहा, तो 24 मार्च को इसकी लिस्टिंग शेयर बाजार में हो जाएगी।
इस ट्रस्ट का मुख्य काम नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स को खरीदना और उनका रखरखाव करना है। फिलहाल इसके पोर्टफोलियो में पांच बड़े टोल रोड शामिल हैं, जो झारखंड, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में फैले हुए हैं। ये सड़कें करीब 260 किलोमीटर लंबी हैं और गोल्डन क्वाड्रिलैटरल नेटवर्क का हिस्सा हैं। कंपनी इन सड़कों पर टोल वसूलने का अधिकार एनएचएआई से ले रही है। बिजनेस का सीधा सा फंडा यह है कि इन सड़कों पर जितना ज्यादा ट्रैफिक चलेगा, टोल के जरिए उतनी ही ज्यादा कमाई होगी। इन्विट के नियमों के मुताबिक, कंपनी को अपनी कुल कैश कमाई का 90 पर्सेंट हिस्सा अपने यूनिट होल्डर्स को डिविडेंड या ब्याज के रूप में बांटना होता है।
कंपनी के फाइनेंस की बात करें, तो इसके पास मौजूद हाईवे प्रोजेक्ट्स ने पिछले कुछ समय में अच्छी ग्रोथ दिखाई है। साल 2025 के दौरान इन सड़कों से होने वाले रेवेन्यू में करीब 8.7 पर्सेंट की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। आने वाले सालों यानी 2027 से 2032 के बीच कंपनी को उम्मीद है कि उसके रेवेन्यू में 5 से 7 पर्सेंट की सालाना बढ़त देखने को मिलेगी। कंपनी ने अपने ऑपरेशन को चलाने के लिए करीब 4,000 करोड़ रुपये का कर्ज लेने की भी योजना बनाई है। हालांकि, मैनेजमेंट का कहना है कि वे अपने कर्ज को एक सीमा के अंदर ही रखेंगे ताकि निवेशकों को मिलने वाले रिटर्न पर कोई बुरा असर न पड़े।
किसी भी आईपीओ में पैसा लगाने से पहले उसके खतरों को समझना बहुत जरूरी है। राजमार्ग इन्फ्रा एक नया ट्रस्ट है, जिसे दिसंबर 2025 में ही रजिस्टर किया गया है। इसका मतलब है कि इसके पास कोई बहुत पुराना ट्रैक रिकॉर्ड नहीं है जिसे देखकर निवेशक भरोसा कर सकें। दूसरा सबसे बड़ा रिस्क ट्रैफिक का है। अगर भविष्य में इन हाईवे के पास कोई दूसरी वैकल्पिक सड़क बन जाती है, तो ट्रैफिक कम हो सकता है और टोल रेवेन्यू घट सकता है। इसके अलावा, कंपनी पर भारी कर्ज होने की वजह से ब्याज दरों में होने वाली बढ़ोतरी भी इसके मुनाफे पर असर डाल सकती है। सरकारी नीतियों में होने वाले बदलाव भी इस तरह के प्रोजेक्ट्स के लिए एक चुनौती बन सकते हैं।
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