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5 min read | अपडेटेड July 03, 2026, 12:59 IST
सारांश
वित्त मंत्रालय द्वारा चार चीनी बिजली उपकरण निर्माता कंपनियों को सरकारी टेंडरों में भाग लेने के लिए दो साल की विशेष छूट दिए जाने की खबर से आज भारतीय पावर इक्विपमेंट कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई है। Hitachi Energy, सीजी पावर और जीई वर्नोवा के शेयर आज 9 पर्सेंट तक टूट गए हैं।

पावर इक्विपमेंट स्टॉक्स में आज भारी बिकवाली देखी जा रही है।
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार 3 जुलाई 2026 को पावर इक्विपमेंट यानी बिजली उपकरण बनाने वाली प्रमुख घरेलू कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट का माहौल देखा जा रहा है। सरकार की तरफ से आई एक बड़ी खबर के बाद निवेशकों में घबराहट फैल गई, जिसके चलते Hitachi Energy इंडिया, सीजी पावर और जीई वर्नोवा टीएंडडी लिमिटेड के स्टॉक्स में 9 पर्सेंट तक की जोरदार बिकवाली दर्ज की गई। आज के कारोबारी सेशन के दौरान Hitachi Energy का शेयर करीब 9.3 पर्सेंट तक टूट गया, जबकि सीजी पावर में लगभग 6.7 पर्सेंट की कमजोरी देखी गई। वहीं मिडकैप सेगमेंट में सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में जीई वर्नोवा टीएंडडी भी शामिल रहा, जिसका भाव 9 पर्सेंट से ज्यादा लुढ़क गया। इस अचानक आई मंदी के पीछे वित्त मंत्रालय का एक हालिया आदेश है, जिसके लीक होने के बाद घरेलू कंपनियों के लिए बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने का डर पैदा हो गया है।
वित्त मंत्रालय के 24 जून के एक आधिकारिक मेमो के अनुसार, सरकार ने भारत में ही अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट या उत्पादन सुविधाएं चलाने वाली चार बड़ी चीनी पावर इक्विपमेंट कंपनियों को एक विशेष राहत दी है। इन चीनी कंपनियों को राज्य-संचालित सरकारी संस्थाओं द्वारा जारी किए जाने वाले टेंडरों में भाग लेने के लिए पूरे दो साल की विशेष छूट प्रदान की गई है। इस छूट के दायरे में आने वाली कंपनियों में टीबीईए एनर्जी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, नानजिंग इलेक्ट्रिक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और ताईकाई इलेक्ट्रिक (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। विद्युत मंत्रालय की सिफारिश पर दी गई यह छूट इन कंपनियों को भारत के महत्वपूर्ण बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के सरकारी टेंडरों में सीधे बोली लगाने की अनुमति देती है। हालांकि, सरकार ने यह भी साफ किया है कि यह ढील केवल दो वर्षों के लिए ही वैध रहेगी और इसे भविष्य में अन्य कंपनियों के लिए एक मिसाल या नजीर के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
इस सरकारी फैसले पर शेयर बाजार की इतनी नकारात्मक प्रतिक्रिया होने की सबसे बड़ी वजह यह है कि इससे भारतीय बिजली उपकरण निर्माताओं के सामने बहुत तगड़ी प्रतिस्पर्धा खड़ी होने की आशंका है। पिछले कुछ सालों के दौरान घरेलू कंपनियों को बाजार में सीमित कॉम्पिटिशन का सीधा फायदा मिल रहा था और उनके ऑर्डर बुक काफी मजबूत थे। लेकिन अब जिन चार चीनी कंपनियों को मंजूरी मिली है, वे पहले से ही भारत में बेहद स्पेशलाइज्ड और अत्याधुनिक ट्रांसमिशन उपकरण बनाने की क्षमता रखती हैं।
उदाहरण के लिए, टीबीईए एनर्जी के पास एक्स्ट्रा-हाई-वोल्टेज ट्रांसफार्मर बनाने की बड़ी सुविधाएं हैं, जबकि नानजिंग इलेक्ट्रिक हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स का निर्माण करती है। इसके अलावा ताईकाई इलेक्ट्रिक भी हाई-वोल्टेज गैस-इंसुलेटेड स्विचगियर (GIS) उपकरण बनाने में माहिर है। इन कंपनियों के टेंडरों में वापस आने से ट्रांसमिशन और ग्रिड उपकरण सेगमेंट में घरेलू दिग्गजों पर प्राइसिंग प्रेशर बढ़ सकता है, जिससे उनके प्रॉफिट मार्जिन पर बुरा असर पड़ने की आशंका है।
आपको बता दें कि साल 2020 में भारत और चीन के बीच हुए सीमा विवाद और हिंसक झड़पों के बाद, भारत सरकार ने उन देशों की कंपनियों के लिए सरकारी खरीद के नियमों को बेहद कड़ा कर दिया था जो भारत के साथ भूमि सीमा साझा करते हैं। उस समय लागू किए गए नियमों के तहत चीनी कंपनियों को किसी भी सरकारी खरीद या टेंडर में भाग लेने से पहले एक विशेष सरकारी समिति के पास रजिस्ट्रेशन कराना और राजनीतिक और सुरक्षा मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया गया था। सरकार के इस ताजा फैसले से वे पुराने व्यापक सुरक्षा नियम पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं, बल्कि यह केवल उन चार चुनिंदा चीनी कंपनियों के लिए एक विशिष्ट और अस्थाई राहत है जिन्होंने भारत के भीतर ही भारी निवेश करके अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित की हैं।
यह पूरा घटनाक्रम इस समय इसलिए बहुत ज्यादा मायने रखता है क्योंकि भारत वर्तमान में अपनी तेजी से बढ़ती बिजली की मांग को पूरा करने और रिन्यूएबल एनर्जी को नेशनल ग्रिड से जोड़ने के लिए देश के इतिहास का सबसे बड़ा पावर ट्रांसमिशन विस्तार कार्यक्रम चला रहा है। आने वाले सालों में देश भर में हजारों नए ट्रांसमिशन लाइन्स, सब-स्टेशन और मजबूत ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जाना है, जिसके लिए सरकारी टेंडर ही इन पावर इक्विपमेंट कंपनियों के बिजनेस और रेवेन्यू का सबसे मुख्य जरिया बने रहेंगे। ऐसे में टेंडरों के भीतर अतिरिक्त योग्य बोलीदाताओं की एंट्री होने से प्रोजेक्ट्स को हासिल करने की रेस बेहद कठिन हो जाएगी। यही वजह है कि घरेलू कंपनियों के निवेशक काफी सतर्क हो गए हैं और आज बाजार में इन स्टॉक्स में भारी मुनाफावसूली और बिकवाली का दौर देखने को मिला है।
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