मार्केट न्यूज़
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4 min read | अपडेटेड September 27, 2026, 13:52 IST
सारांश
भारतीय शेयर बाजार में इस हफ्ते भी दबाव बना रहा और निफ्टी लगातार सातवें हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुआ। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और FII की बिकवाली से बाजार का मूड बिगड़ा है। हालांकि DII की खरीदारी और क्रूड में थोड़ी नरमी से निचले स्तरों पर कुछ सपोर्ट मिला है।

लगातार सात हफ्तों की गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार में अगले हफ्ते की चाल ग्लोबल संकेतों पर निर्भर करेगी।
भारतीय शेयर बाजार में इस हफ्ते भी बिकवाली का दबाव हावी रहा। निफ्टी 50 इंडेक्स में लगातार सातवें हफ्ते गिरावट दर्ज की गई है, जो पिछले छह सालों में सबसे लंबा गिरावट का दौर है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल, जियोपॉलिटिकल तनाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की भारी बिकवाली के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है। हालांकि हफ्ते के दौरान तेल की कीमतों में आई थोड़ी नरमी और निचले स्तरों पर हुई वैल्यू बाइंग की वजह से कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन इसके बावजूद निफ्टी में इस हफ्ते लगभग 0.88% की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार में सबसे ज्यादा दबाव विदेशी निवेशकों की तरफ से देखने को मिला है। आंकड़ों के मुताबिक FII ने इस महीने 25 सितंबर तक भारतीय बाजार से लगभग 18,531 करोड़ रुपये की निकासी की है। दूसरी तरफ घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने बाजार को संभालने में बड़ी भूमिका निभाई है। DII ने इसी दौरान लगभग 52,617 करोड़ रुपये की मजबूत खरीदारी करके विदेशी निवेशकों की बिकवाली के असर को कम करने की कोशिश की है। व्यापक रिस्क में कमी आने के कारण मिडकैप शेयर्स का परफॉर्मेंस भी बड़े शेयर्स के मुकाबले कमजोर रहा है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि अगले हफ्ते शेयर बाजार की चाल मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड और अमेरिका-ईरान के बीच होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगी। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर के अनुसार, निवेशक अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हो सकने वाली बातचीत और अमेरिका-चीन चर्चाओं पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने बताया कि ईरान ने अमेरिका को एक सात दिनों का प्रस्ताव दिया है, जिसका मकसद जारी टकराव खत्म करके 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को फिर से खोलना है। अगर इस बातचीत में प्रगति होती है तो कच्चे तेल में जियोपॉलिटिकल रिस्क कम हो सकता है।
अगले हफ्ते निवेशकों की नजर अमेरिकी इकोनॉमिक डेटा पर भी रहने वाली है। अमेरिका के लेबर मार्केट इंडिकेटर्स, महंगाई के आंकड़े, जीडीपी और कोर PCE डिफ्लेटर से फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी का अंदाजा मिलेगा। अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी यील्ड अभी 5.2% के पास बनी हुई है, जो इमर्जिंग मार्केट्स में पैसों के बहाव को प्रभावित कर रही है। अगर अमेरिकी आंकड़े उम्मीद से ज्यादा मजबूत आते हैं, तो डॉलर और बॉन्ड यील्ड में तेजी बनी रहेगी जिससे भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं घरेलू स्तर पर सितंबर के लिए भारत का फ्लैश PMI अनुमान उम्मीद से बेहतर रहा है, और आगे आने वाला इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन यानी आईआईपी डेटा भारत की ग्रोथ की मजबूती तय करेगा।
टेक्निकल स्ट्रक्चर के हिसाब से निफ्टी 50 अभी कमजोर बना हुआ है और अपने अहम मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है। पोनमुडी आर के मुताबिक, इंडेक्स के लिए 23,000 का लेवल तुरंत और सबसे अहम सपोर्ट के रूप में काम कर रहा है। अगर निफ्टी 23,000 के नीचे मजबूती से टूटता है, तो बिकवाली बढ़कर 22,800 के स्तर तक जा सकती है। वहीं ऊपर की तरफ 23,200 का लेवल तुरंत रेजिस्टेंस बना हुआ है। अगर इंडेक्स 23,300 के ऊपर लगातार टिकने में कामयाब होता है, तो बाजार में स्थिरता आ सकती है और यह 23,500 के लेवल तक रिकवरी दिखा सकता है।
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