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IOC, HPCL, BPCL क्यों इनके शेयरों पर गड़ी नजरें? क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें निगल सकती हैं पूरा प्रॉफिट

Namita Shukla

3 min read | अपडेटेड May 12, 2026, 09:08 IST

सारांश

Iran-US Tension: इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड बड़े स्तर पर अंडर रिकवरी यानी नुकसान का सामना कर रही हैं।

शेयर सूची

IOC
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HINDPETRO
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BPCL
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इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन

ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में हलचल की उम्मीद

Iran-US टेंशन के बीच कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की बढ़ती कीमतों और सरकार के रिटेल दाम को स्थिर बनाए रखने के कारण मार्केटिंग मार्जिन में भारी गिरावट आई है। इससे देश की सरकारी रिटेल पेट्रोलियम कंपनियों को पहले क्वार्टर में इतना बड़ा घाटा होने का खतरा है, जिससे पूरे फाइनेंशियल ईयर का मुनाफा खत्म हो सकता है। पश्चिम एशिया में 10 हफ्ते पहले युद्ध शुरू होने के बाद से, सरकारी पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने लागत से कम दर पर पेट्रोल, डीजल और खाना पकाने की गैस एलपीजी की बिना रुकावट सप्लाई सुनिश्चित की है, जबकि कई अन्य देशों में राशनिंग लागू की गई या कीमतों में भारी वृद्धि की गई। ऐसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड बड़े स्तर पर अंडर रिकवरी यानी नुकसान का सामना कर रही हैं।

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हर दिन हो रहा कितना नुकसान?

उन्होंने कहा कि पेट्रोल, डीजल और खाना पकाने की गैस (एलपीजी) पर मिलाकर नुकसान (लागत और रिटेल कीमतों के बीच अंतर) प्रतिदिन 1,000 करोड़ रुपये से 1,200 करोड़ रुपये है। कच्चे तेल की कीमतों में 50% की बढ़ोतरी के बावजूद, पेट्रोल और डीजल की कीमतें दो साल पुराने लेवल क्रम से 94.77 रुपये प्रति लीटर और 87.67 रुपये प्रति लीटर पर बनी हुई हैं। वहीं एलपीजी की कीमतों में मार्च में 60 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई थी, लेकिन ये कीमतें अभी भी वास्तविक लागत से काफी कम हैं।

ऐसे तो खत्म हो जाएगा पूरा प्रॉफिट

उन्होंने कहा, ‘मौजूदा तेल कीमतों पर, चालू तिमाही (अप्रैल-जून) में हुए नुकसान से कंपनी का पूरे साल का लगभग 76,000 करोड़ रुपये का मुनाफा खत्म हो जाएगा।’ सूत्र ने कहा कि संकट के पहले महीने (मार्च) में हुए नुकसान को भी शामिल करने पर कुल नुकसान लगभग एक लाख करोड़ रुपये बैठता है। पेट्रोलियम कंपनियां मौजूदा समय में पेट्रोल पर 14 रुपये प्रति लीटर, डीजल पर 42 रुपये प्रति लीटर और खाना पकाने की गैस (एलपीजी) पर 674 रुपये प्रति लीटर का घाटा उठा रही हैं।

क्या आने वाले समय में बढ़ाना पड़ेगा पेट्रोल-डीजल का दाम?

इस बारे में इक्रा लि. के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और सह-समूह प्रमुख (कॉरपोरेट रेटिंग्स) प्रशांत वशिष्ठ ने कहा, ‘ग्लोबल लेवल पर कच्चे तेल और उत्पादों की ऊंची कीमतों के कारण पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियां वाहन ईंधन और घरेलू एलपीजी बिक्री पर भारी घाटा उठा रही हैं।’ इक्रा का अनुमान है, ‘120 से 125 डॉलर प्रति बैरल के कच्चे तेल की कीमतों पर.... मार्केटिंग कंपनियों को वाहन ईंधन और घरेलू एलपीजी की बिक्री पर प्रतिदिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये का घाटा होता है। इस स्तर का नुकसान कंपनियों के लिए टिकाऊ मामला नहीं है और अगर कच्चे तेल और अन्य उत्पादों की ऊंची कीमतें लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो इस पर ध्यान देना होगा।’

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)
PTI इनपुट के साथ

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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