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  1. ग्लोबल फंड्स से निवेशकों ने निकाले 7 अरब डॉलर, जानिए अब किस खास थीम पर लगा रहे हैं पैसा

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ग्लोबल फंड्स से निवेशकों ने निकाले 7 अरब डॉलर, जानिए अब किस खास थीम पर लगा रहे हैं पैसा

विकास तिवारी

4 min read | अपडेटेड June 01, 2026, 14:50 IST

सारांश

वैश्विक बाजारों में बढ़ते जोखिम के बीच निवेशकों ने कमोडिटी, सोने-चांदी और उभरते बाजारों से दूरी बनाना शुरू कर दिया है। मई महीने में भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों की निकासी करीब 34,000 करोड़ रुपये रही है। हालांकि, इस उतार-चढ़ाव के बीच अमेरिकी टेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े फंड्स में लगातार मजबूत निवेश आ रहा है।

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वैश्विक बाजारों में मची हलचल के बीच निवेशकों ने बदला अपना फोकस। | Photo: Shutterstock.

वैश्विक वित्तीय बाजारों में जारी हलचल के बीच निवेशकों के रुख में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इलारा कैपिटल की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले आठ हफ्तों में पहली बार ग्लोबल इक्विटी फंडों से साप्ताहिक निकासी देखी गई है। ग्लोबल ललिक्विडिटी ट्रैकर रिपोर्ट बताती है कि निवेशकों ने पिछले हफ्ते वैश्विक बाजारों से करीब 7 अरब डॉलर की बड़ी रकम निकाल ली है। वैश्विक शेयरों से इससे पहले इतनी बड़ी शुद्ध निकासी मार्च के महीने में देखी गई थी, जब ईरान संकट अपने चरम पर पहुंच गया था। पिछले हफ्ते चीन, जापान और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में बड़े पैमाने पर रीडम्पशन यानी निवेश की निकासी देखने को मिली है। यह साफ तौर पर दिखाता है कि ईरान समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच निवेशक अब उभरते बाजारों और कमोडिटी से जुड़े सेक्टर्स में ज्यादा रिस्क लेने से बच रहे हैं।

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उभरते बाजारों पर बढ़ता दबाव

दुनिया भर के उभरते बाजारों के लिए पिछले कुछ हफ्ते काफी चुनौतीपूर्ण रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उभरते बाजारों से लगातार सातवें हफ्ते निवेश की निकासी हुई है। इस कमजोरी की सबसे बड़ी वजह चीन के घरेलू बाजार में होने वाली बिकवाली और भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार की जा रही पैसे की निकासी है। इसके साथ ही वैश्विक उभरते बाजार यानी GEM फंड्स में भी लगातार चौथे हफ्ते गिरावट का दौर जारी रहा। मार्च 2025 के बाद यह पहला मौका है जब रीडम्पशन का ऐसा दौर देखा गया है, जिससे कुल निकासी का आंकड़ा बढ़कर 4.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

इलारा कैपिटल के उपाध्यक्ष सुनील जैन का कहना है कि यह रुझान साफ करता है कि उभरते बाजारों की संपत्तियों में निवेशकों की दिलचस्पी अब बहुत कम हो गई है और वे अब केवल कुछ चुनिंदा मौकों पर ही दांव लगा रहे हैं। मई के महीने में इन बाजारों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है, जहां दक्षिण कोरिया और ताइवान में क्रमशः 28 पर्सेंट और 15 पर्सेंट की तेजी आई, वहीं दूसरी ओर इंडोनेशिया में 12 पर्सेंट, ब्राजील में 7 पर्सेंट और भारत में 3 पर्सेंट की गिरावट दर्ज की गई।

भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों की दूरी

भारत के संदर्भ में देखें तो घरेलू बाजार से विदेशी निवेशकों की निकासी का सिलसिला एक बार फिर शुरू हो गया है। पिछले हफ्ते विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 46.3 करोड़ डॉलर की रकम निकाल ली। विदेशी निवेश की आवक में कुछ समय के लिए जो स्थिरता आई थी, उसके बाद यह नई निकासी देखने को मिली है। अगर पूरे मई महीने की बात करें तो 27 मई तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI की कुल निकासी 34,000 करोड़ रुपये रही है। हालांकि, यह निकासी मार्च के 1.22 लाख करोड़ रुपये और अप्रैल के 70,000 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी कम है, लेकिन फिर भी बाजार के सेंटिमेंट पर इसका असर दिख रहा है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस थीम पर बढ़ा भरोसा

इस चौतरफा बिकवाली और अनिश्चितता के बीच कुछ चुनिंदा सेक्टर ऐसे भी हैं जहां निवेशकों का भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है। इलारा कैपिटल के नोट के मुताबिक, इस समय केवल अमेरिका केंद्रित और ग्लोबल मैंडेट फंड ही ऐसी मुख्य कैटेगरी हैं जिनमें लगातार नया निवेश आ रहा है। इसमें भी सबसे ज्यादा निवेश टेक्नोलॉजी, इंडस्ट्रियल और सेमीकंडक्टर फंडों में देखा जा रहा है। इससे यह साफ पता चलता है कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स का सबसे पसंदीदा विषय अभी भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI थीम ही बनी हुई है और वे इसी पर अपना पूरा फोकस रख रहे हैं।

कमोडिटी और कीमती धातुओं में सुस्ती

निवेशकों की पसंद में आया यह बड़ा बदलाव कमोडिटी मार्केट में भी साफ तौर पर महसूस किया जा रहा है। इस हफ्ते कीमती धातुओं से जुड़े फंडों से करीब 1.1 अरब डॉलर की भारी निकासी की गई है। कमोडिटी बाजार के इतिहास को देखें तो जनवरी 2026 में सबसे पहले चांदी ने अपनी तेजी की रफ्तार खोई थी और उसके बाद मार्च से सोने की कीमतों में भी सुस्ती का दौर शुरू हो गया। रिपोर्ट के नोट में यह भी बताया गया है कि जिन सेक्टर्स को पहले एआई और इलेक्ट्रीफिकेशन ट्रेड से भारी फायदा हुआ था, जैसे दक्षिण कोरिया, ताइवान, ब्राजील, चांदी, सोना, कमोडिटी और एनर्जी, उन सभी में अब निवेश या तो बहुत धीमा हो गया है या फिर वहां से पैसे निकाले जा रहे हैं। अब बाजार में एकमात्र मजबूत निवेश सिर्फ यूएस टेक, इंडस्ट्रियल और सेमीकंडक्टर सेगमेंट में ही दिखाई दे रहा है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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