मार्केट न्यूज़
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4 min read | अपडेटेड November 06, 2026, 16:13 IST
सारांश
मंजूरी पाने वाली 12 परियोजनाओं में सबसे बड़ा निवेश Indo Asia Copper की ओर से किया जाएगा। कंपनी गुजरात में 3,546 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इसके बाद TACC का नंबर है, जो मध्य प्रदेश में 2,438 करोड़ रुपये लगाएगी। ये दोनों कंपनियां लिस्टेड कंपनियों की सब्सिडियरी हैं।

सरकार का अनुमान है कि इन परियोजनाओं के शुरू होने के बाद करीब 39,045 करोड़ रुपये के इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट का उत्पादन होगा।
केंद्र सरकार ने देश में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत 12 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में 7500 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया जाएगा। सरकार का अनुमान है कि इन परियोजनाओं के शुरू होने के बाद करीब 39,045 करोड़ रुपये के इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट का उत्पादन होगा। इस योजना का मकसद भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और घरेलू कंपनियों की क्षमता बढ़ाना है।
मंजूरी पाने वाली 12 परियोजनाओं में सबसे बड़ा निवेश Indo Asia Copper की ओर से किया जाएगा। कंपनी गुजरात में 3,546 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इसके बाद TACC का नंबर है, जो मध्य प्रदेश में 2,438 करोड़ रुपये लगाएगी। ये दोनों कंपनियां लिस्टेड कंपनियों की सब्सिडियरी हैं। Indo Asia Copper, Kiri Industries की सब्सिडियरी है, जबकि TACC, HEG Advanced Materials की सब्सिडियरी है।
इसके अलावा Vidyuta Materials उत्तर प्रदेश में 400 करोड़ रुपये और Enerfolie गुजरात में 236 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। Voltix Semicon महाराष्ट्र में 65 करोड़ रुपये, Rockwell Automation तमिलनाडु में 91 करोड़ रुपये और Wipro Pari Robotics महाराष्ट्र में 120 करोड़ रुपये लगाएगी।
वहीं, TDConnex को तमिलनाडु में दो परियोजनाओं के लिए मंजूरी मिली है। इनमें 103 करोड़ और 50 करोड़ रुपये का निवेश होगा। Modern Automotives पंजाब में 75 करोड़ रुपये और NeST ICELR तमिलनाडु में 363 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। Surface Modification Tech कर्नाटक में 17 करोड़ रुपये लगाएगी।
इन 12 नई परियोजनाओं की मंजूरी के बाद ECMS के तहत स्वीकृत कुल परियोजनाओं की संख्या बढ़कर 118 हो गई है। इन सभी परियोजनाओं में कुल 77,000 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। यह सरकार के 59,350 करोड़ रुपये के तय लक्ष्य से काफी ज्यादा है।
इन परियोजनाओं से कुल 5,73,146 करोड़ रुपये के उत्पादन की उम्मीद है। यह भी योजना के 4,56,500 करोड़ रुपये के लक्ष्य से अधिक है। सरकार ने इस योजना के लिए कुल 40,000 करोड़ रुपये का बजट रखा है। इसका उद्देश्य देश में इलेक्ट्रॉनिक्स के जरूरी कंपोनेंट का उत्पादन बढ़ाना है, ताकि कंपनियों को इनके लिए दूसरे देशों पर निर्भर न रहना पड़े।
इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट स्कीम पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार ने इस योजना के लिए जितना पैसा आवंटित किया है, वह टैक्स के रूप में वापस आ जाएगा। उन्होंने कहा कि ECMS पर खर्च किया गया पैसा सरकार को टैक्स के जरिए लौटेगा। ऐसे में वित्त मंत्री को भी इससे खुशी होनी चाहिए।
वैष्णव ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर में केवल गंभीर कंपनियों और टेक्नोलॉजी पर ध्यान देने वाले आवेदकों का स्वागत किया जाएगा। सरकार ने इस मिशन के तहत आवेदन जमा करने के लिए वेब पोर्टल भी शुरू किया है।
उन्होंने साफ कहा कि सरकार ऐसे आवेदकों को मौका नहीं देना चाहती, जो सिर्फ सरकारी योजनाओं का फायदा उठाने के मकसद से आ रहे हैं। सरकार की प्राथमिकता उन कंपनियों को मौका देना है, जिनके पास टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग को आगे बढ़ाने की गंभीर योजना है।
वैष्णव ने माना कि विदेशी कंपनियों को भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने के लिए तैयार करना आसान नहीं होगा, क्योंकि उनके अपने देश भी उन्हें बाहर जाने से रोक सकते हैं। इसके बावजूद सरकार इस दिशा में प्रयास जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि भारत तीन बड़े इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स और केमिकल्स व गैस के पांच निर्माताओं को देश में लाना चाहता है। इससे भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम और मजबूत हो सकेगा।
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