मार्केट न्यूज़

3 min read | अपडेटेड July 07, 2026, 09:19 IST
सारांश
सरकार के पास मौजूदा समय में सीएसएल में 67.91% हिस्सेदारी है। चालू फाइनेंशियल ईयर में सरकार अब तक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, कोल इंडिया, एनएचपीसी, एनएलसी इंडिया, जीआईसी और आईआरएफसी में ओएफएस के जरिये हिस्सेदारी बेचकर कुल 18,561 करोड़ रुपये जुटा चुकी है।
शेयर सूची

कोचीन शिपयार्ड में ओएफएस के जरिए 5% हिस्सेदारी बेच रही है सरकार (Photo: Shutterstock)
सरकार कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (Cochin Shipyard Ltd. CSL) में आज से बिक्री पेशकश (Offer for sale, OFS) के जरिए 5%तक हिस्सेदारी बेचेगी। इसके लिए 1,400 रुपये प्रति शेयर का न्यूनतम मूल्य (Floor Price) तय किया गया है। निवेश एवं लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (Department of Investment and Public Asset Management, DIPAM) के सचिव अरुणीश चावला ने बताया कि पेशकश में 2.52 प्रतिशत शेयर बेचे जाएंगे, जबकि अधिक मांग आने की स्थिति में उतनी ही अतिरिक्त हिस्सेदारी ‘ग्रीन-शू’ ऑप्शन के तहत बेची जाएगी। ओएफएस आज नॉन-रिटेल इन्वेस्टरों के लिए खुलेगा, जबकि रिटेल इन्वेस्टर्स 8 जुलाई को इसके लिए बोली लगा सकेंगे। आज कोचीन शिपयार्ड के शेयरों में 3% से ज्यादा यानी कि करीब 50 रुपये की गिरावट देखने को मिली है।
कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के शेयरों में पिछले पांच सालों में 700% से ज्यादा की तेजी आई है, हालांकि पिछले एक साल में शेयर 20% से ज्यादा लुढ़के हैं। पिछले एक महीने में शेयरों में 4% से ज्यादा की तेजी देखी गई है, वहीं पिछले एक सप्ताह में भी शेयर 4% के करीब उछले हैं। निर्धारित फ्लोर प्राइस, बीएसई पर सोमवार के बंद भाव के मुकाबले करीब 7% कम है। कंपनी का शेयर सोमवार को 1.25% के नुकसान के साथ 1,504.75 रुपये पर बंद हुए थे।
सरकार के पास मौजूदा समय में सीएसएल में 67.91% हिस्सेदारी है। चालू फाइनेंशियल ईयर में सरकार अब तक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, कोल इंडिया, एनएचपीसी, एनएलसी इंडिया, जीआईसी और आईआरएफसी में ओएफएस के जरिये हिस्सेदारी बेचकर कुल 18,561 करोड़ रुपये जुटा चुकी है। पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए सरकार ने विनिवेश और परिसंपत्ति मौद्रीकरण के जरिये 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का बजट टारगेट रखा है।
कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) भारत की सबसे बड़ी जहाज निर्माण और रखरखाव सुविधा है। कंपनी भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत जैसे युद्धपोतों के निर्माण के लिए दुनिया में प्रसिद्ध है। कोचीन शिपयार्ड की स्थापना साल 1972 में भारत सरकार की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी के रूप में हुई थी। पिछले तीन दशकों में यह कंपनी भारतीय जहाज निर्माण और मरम्मत उद्योग में अग्रणी बनकर उभरी है। यह शिपयार्ड भारत के सबसे बड़े जहाजों का निर्माण और मरम्मत करने में सक्षम है। यह 1,10,000 डीडब्ल्यूटी तक के जहाजों का निर्माण और 1,25,000 डीडब्ल्यूटी तक के जहाजों की मरम्मत कर सकता है।
इस शिपयार्ड ने भारत के दो सबसे बड़े डबल हल अफ्रामैक्स टैंकर (प्रत्येक 95,000 डीडब्ल्यूटी) का निर्माण किया है। सीएसएल को यूरोप और मध्य पूर्व की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध कंपनियों से जहाज निर्माण के ऑर्डर मिले हैं और इसे देश के पहले स्वदेशी वायु रक्षा जहाज के निर्माण का ठेका दिया गया है। शिपयार्ड ने साल 1982 में जहाज मरम्मत काम शुरू किया और तेल अन्वेषण उद्योग के जहाजों के अपग्रेडेशन के साथ-साथ नौसेना, यूटीएल, तटरक्षक बल, मत्स्य पालन और बंदरगाह ट्रस्ट के जहाजों की आवधिक मरम्मत और जीवन विस्तार सहित सभी प्रकार के जहाजों की मरम्मत का काम किया है। इसके अलावा, यह एससीआई और ओएनजीसी के व्यापारिक जहाजों का भी काम करता है।
संबंधित समाचार
लेखकों के बारे में

अगला लेख
How To Use Open Interest For Intraday Trading: Complete Guide
What Is Stop Loss In Trading? Meaning, Types, & How To Use It
What Is ICRA? Why Its Credit Ratings Matter To Investors
Explore Learning Centre
All topics · stocks, MFs, derivatives, IPOs