मार्केट न्यूज़

4 min read | अपडेटेड February 16, 2026, 10:34 IST
सारांश
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा कैपिटल मार्केट के लिए कर्ज के नियमों को सख्त करने के बाद सोमवार को बीएसई और एंजेल वन जैसी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। नए नियमों के तहत ब्रोकर्स के लिए प्रोप्रायटरी ट्रेडिंग के लिए बैंक फंडिंग पर रोक लगा दी गई है, जिससे बाजार में हलचल मच गई है।
शेयर सूची

शेयर बाजार की इंटरमीडियरीज कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव।
सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत होते ही कैपिटल मार्केट से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में जोरदार गिरावट देखने को मिली। इसकी मुख्य वजह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई द्वारा पिछले हफ्ते के अंत में जारी किए गए नए और सख्त नियम हैं। आरबीआई ने उन कंपनियों के लिए कर्ज के नियमों को कड़ा कर दिया है जो प्रोप्रायटरी ट्रेडिंग यानी अपनी खुद की पूंजी से शेयरों और कमोडिटी में कारोबार करती हैं। इस खबर के सामने आते ही बीएसई लिमिटेड और एंजेल वन जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर धड़ाम हो गए। बाजार के जानकारों का मानना है कि इन नियमों से सट्टेबाजी वाली गतिविधियों पर लगाम लगेगी, लेकिन इससे बाजार में ट्रेडिंग वॉल्यूम कम होने का भी डर पैदा हो गया है।
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि प्रोप्रायटरी ट्रेडिंग क्या होती है? जब कोई वित्तीय संस्थान या ब्रोकरेज फर्म अपने ग्राहकों के बजाय अपने खुद के पैसे से स्टॉक, बॉन्ड, करेंसी या डेरिवेटिव्स में मुनाफा कमाने के लिए ट्रेड करती है, तो उसे प्रोप्रायटरी ट्रेडिंग कहा जाता है। आरबीआई ने अब साफ कर दिया है कि ब्रोकर्स को मिलने वाली सभी क्रेडिट सुविधाएं पूरी तरह से कोलैटरल यानी सुरक्षा गारंटी पर आधारित होंगी। सबसे बड़ी बात यह है कि बैंक अब ब्रोकर्स को उनके अपने खाते में ट्रेडिंग या निवेश करने के लिए पैसा नहीं दे पाएंगे। यह नया नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होने जा रहा है।
आरबीआई ने बैंकों को यह निर्देश भी दिया है कि वे ब्रोकर्स की ओर से दी जाने वाली गारंटी के बदले कड़ी शर्तें रखें। अब प्रोप्रायटरी ट्रेड्स के लिए बैंक जो गारंटी देंगे, उसे पूरी तरह सुरक्षित करना होगा। इसमें शर्त यह है कि कोलैटरल का 50 पर्सेंट हिस्सा कैश में होना चाहिए, जबकि बाकी हिस्सा कैश के बराबर की संपत्तियों या सरकारी सिक्योरिटीज के रूप में हो सकता है। इस नियम से उन ट्रेडिंग फर्मों के लिए मुश्किलें बढ़ जाएंगी जो बैंकों को कोलैटरल के रूप में अलग-अलग तरह की सिक्योरिटीज देते थे। अब कैश की ज्यादा जरूरत होने की वजह से इन फर्मों के पास कामकाज के लिए पूंजी की कमी हो सकती है।
बाजार में इस बात को लेकर काफी चिंता है कि इन नियमों से शेयरों और ऑप्शंस में होने वाले कारोबार की रफ्तार धीमी पड़ जाएगी। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई पर इक्विटी ऑप्शंस के कुल टर्नओवर में प्रोप्रायटरी ट्रेडिंग फर्मों की हिस्सेदारी 50 पर्सेंट से ज्यादा थी। वहीं कैश मार्केट में भी इनका हिस्सा करीब 30 पर्सेंट रहा है, जो पिछले 21 सालों में सबसे ज्यादा है। हाल ही में बजट में ट्रांजैक्शन टैक्स यानी एसटीटी बढ़ाए जाने के बाद अब आरबीआई की इस सख्ती से बाजार के खिलाड़ियों को लग रहा है कि मार्केट में लिक्विडिटी कम हो जाएगी और ट्रेडिंग करना महंगा हो जाएगा।
आरबीआई के इन सख्त कदमों का सीधा असर लिस्टेड कंपनियों के भाव पर पड़ा है। बीएसई लिमिटेड के शेयर एनएसई पर करीब 9.5 पर्सेंट टूटकर 2,736 रुपये के निचले लेवल पर पहुंच गए। वहीं एंजेल वन के शेयरों में भी 6 पर्सेंट की गिरावट देखी गई और यह 2,540.40 रुपये पर आ गया। ग्रो की पैरेंट कंपनी के शेयर भी 4 पर्सेंट से ज्यादा की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहे थे। निवेशकों को डर है कि इन नियमों से ब्रोकरेज कंपनियों की कमाई पर बुरा असर पड़ेगा, क्योंकि प्रोप्रायटरी डेस्क से होने वाला मुनाफा अब कम हो सकता है। फिलहाल बाजार इस बड़े बदलाव को पचाने की कोशिश कर रहा है और आने वाले दिनों में इसका असर और साफ होगा।
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