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3 min read | अपडेटेड March 16, 2026, 12:43 IST
सारांश
फरवरी महीने में थोक महंगाई दर यानी डब्ल्यूपीआई बढ़कर 2.13 पर्सेंट पर पहुंच गई है। जनवरी में यह आंकड़ा 1.81 पर्सेंट था। खाने-पीने की चीजों और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की बढ़ती कीमतों की वजह से थोक महंगाई में यह तेजी देखी गई है, जिसका सीधा असर अब आम जनता की जेब पर पड़ने वाला है।

देश में महंगाई की मार एक बार फिर बढ़ती दिख रही है।
भारत में महंगाई की मार एक बार फिर तेज होती दिख रही है। थोक बाजार से आए ताजा आंकड़े बताते हैं कि फरवरी के महीने में महंगाई की रफ्तार उम्मीद से थोड़ी ज्यादा रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सालाना आधार पर थोक महंगाई दर यानी WPI फरवरी 2026 में बढ़कर 2.13 पर्सेंट पर पहुंच गई है। अगर हम इसकी तुलना पिछले महीने यानी जनवरी से करें, तो तब यह 1.81 पर्सेंट के स्तर पर थी। यानी एक महीने के भीतर ही थोक महंगाई में अच्छी खासी बढ़त दर्ज की गई है। सरकार का कहना है कि महंगाई में इस तेजी की मुख्य वजह मैन्युफैक्चरिंग, बेसिक मेटल्स, फूड आर्टिकल्स और टेक्सटाइल जैसी चीजों की कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी है। थोक बाजार में कीमतों का इस तरह बढ़ना आने वाले समय में रिटेल मार्केट के लिए भी एक संकेत हो सकता है।
प्राइमरी आर्टिकल्स की कैटेगरी में सालाना महंगाई दर 3.27 पर्सेंट रही है। इसमें सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात फूड इंडेक्स की है। सालाना आधार पर फूड इंडेक्स में 1.85 पर्सेंट की महंगाई देखी गई है। हालांकि, अगर हम महीने दर महीने के हिसाब से देखें, तो फरवरी में जनवरी के मुकाबले खाने-पीने की चीजों के दाम थोड़े कम जरूर हुए हैं। सब्जियों की कीमतों में जनवरी के मुकाबले 17 पर्सेंट से ज्यादा की गिरावट आई है। आलू और प्याज के दाम भी मंथली बेसिस पर काफी कम हुए हैं, लेकिन पिछले साल की तुलना में इनका दबाव अब भी बना हुआ है। दूसरी तरफ, फलों की कीमतों में 8.5 पर्सेंट से ज्यादा का मंथली उछाल देखा गया है, जो आम आदमी की जेब पर असर डाल रहा है। दालों की कीमतों में भी सालाना आधार पर गिरावट देखी गई है जो एक राहत की बात है।
फ्यूल और पावर सेक्टर में सालाना आधार पर अभी भी राहत बनी हुई है क्योंकि यहां महंगाई दर माइनस 3.78 पर्सेंट रही है। हालांकि, जनवरी के मुकाबले फरवरी में ईंधन की कीमतों में 1.17 पर्सेंट की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कच्चे पेट्रोलियम और नेचुरल गैस की कीमतों में मंथली आधार पर 4.17 पर्सेंट का बड़ा उछाल आया है। वहीं मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की बात करें तो इसकी सालाना महंगाई दर 2.92 पर्सेंट रही है। इसमें शामिल 22 मुख्य ग्रुप्स में से 16 ग्रुप्स ऐसे रहे जिनके दाम फरवरी में बढ़े हैं। टेक्सटाइल, केमिकल प्रोडक्ट्स और बिजली के सामान बनाने वाली कंपनियों की लागत बढ़ी है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आई यह तेजी बताती है कि औद्योगिक स्तर पर चीजों के उत्पादन की लागत अब बढ़ रही है।
महंगाई के ये आंकड़े बताते हैं कि इकोनॉमी में अभी भी कीमतों का दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। थोक महंगाई का बढ़ना सीधे तौर पर फैक्ट्रियों और बड़े व्यापारियों की लागत को बढ़ाता है। जब थोक स्तर पर चीजें महंगी होती हैं, तो कंपनियां धीरे-धीरे इसका बोझ ग्राहकों पर डालना शुरू कर देती हैं। इससे आने वाले हफ्तों में रिटेल महंगाई यानी आपके पास की दुकानों पर मिलने वाले सामान के दाम भी बढ़ सकते हैं। सरकार और रिजर्व बैंक इन आंकड़ों पर बहुत पैनी नजर रखते हैं क्योंकि इन्हीं के आधार पर ब्याज दरों और फ्यूचर की आर्थिक नीतियों को तय किया जाता है।
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