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3 min read | अपडेटेड December 04, 2025, 08:50 IST
सारांश
साल 2022 के बाद पुतिन का यह पहला भारत दौरा है। 30 घंटे के इस दौरे में रक्षा मंत्री और वित्त मंत्री समेत 7 बड़े रूसी मंत्री भी उनके साथ हैं। दोनों देशों के बीच 63.6 बिलियन डॉलर का व्यापार हुआ है। इस दौरान S-400 मिसाइल सिस्टम और ब्रह्मोस को लेकर भी चर्चा हो सकती है।

पीएम मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज से अपने भारत दौरे की शुरुआत कर रहे हैं। यह दौरा दोनों देशों के रिश्तों के लिए बहुत खास माना जा रहा है क्योंकि भारत और रूस अपनी रणनीतिक साझेदारी की 25वीं सालगिरह मना रहे हैं। साल 2022 में यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद पुतिन का यह पहला भारत दौरा है। दिल्ली पहुंचने पर उनका कार्यक्रम काफी व्यस्त रहने वाला है। वह अपने इस दो दिवसीय दौरे के दौरान व्यापार, स्वास्थ्य, कृषि और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे कई अहम क्षेत्रों में समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे। इससे दोनों देशों के पुराने रिश्तों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
पुतिन के दौरे की शुरुआत आज शाम 4 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक निजी डिनर से होगी। यह डिनर पीएम मोदी के आधिकारिक आवास पर आयोजित किया गया है। इसके बाद अगले दिन यानी 5 दिसंबर की सुबह राष्ट्रपति भवन में पुतिन का औपचारिक स्वागत किया जाएगा। यहां उन्हें तीनों सेनाओं की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। इसके बाद रूसी राष्ट्रपति राजघाट जाएंगे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। वहां से वह सीधे हैदराबाद हाउस पहुंचेंगे, जहां पीएम मोदी के साथ उनकी आधिकारिक बातचीत होगी। इस द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के बाद कई बड़े ऐलान हो सकते हैं और एक साझा बयान भी जारी किया जाएगा।
इस दौरे की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पुतिन अकेले नहीं आ रहे हैं। उनके साथ रूस के 7 वरिष्ठ मंत्री भी भारत आ रहे हैं। इस प्रतिनिधिमंडल में रूस के रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव, वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव और स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराश्को शामिल हैं। इसके अलावा रूस के सेंट्रल बैंक की गवर्नर एल्विरा नबीउलीना भी उनके साथ होंगी।
इस दौरे का एक मुख्य फोकस व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ाना है। साल 2024 में दोनों देशों के बीच कई स्तरों पर बातचीत हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, इस साल द्विपक्षीय व्यापार में 12% की बढ़ोतरी हुई है और यह 63.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। हालांकि, रूस ने भारत के साथ व्यापार असंतुलन पर चिंता जताई है और इसे दूर करने के लिए नए तरीके खोजने पर जोर दिया है। दोनों पक्ष 2030 तक आर्थिक सहयोग के लिए रोडमैप पर चर्चा करेंगे। इसमें ऊर्जा, कृषि, स्वास्थ्य और मीडिया जैसे सेक्टर शामिल हैं।
रक्षा सहयोग हमेशा से भारत और रूस के रिश्तों का मजबूत आधार रहा है। 5 दिसंबर को पीएम मोदी और पुतिन भारत मंडपम में इंडिया-रूस बिजनेस फोरम को संबोधित करेंगे। रक्षा क्षेत्र में दोनों देश ब्रह्मोस मिसाइल प्रोग्राम में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा कर सकते हैं। इसमें हवा से लॉन्च होने वाली हल्की ब्रह्मोस-एनजी और ज्यादा दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों पर बात हो सकती है। इसके अलावा हाइपरसोनिक तकनीक और भारत द्वारा S-400 मिसाइल सिस्टम की और यूनिट खरीदने की योजना पर भी चर्चा होने की संभावना है।
शिखर सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र, जी-20 और ब्रिक्स जैसे मंचों पर सहयोग को लेकर भी बात होगी। रूस ने 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालने के लिए भारत के साथ तालमेल बिठाने में दिलचस्पी दिखाई है। पुतिन का यह दौरा 5 दिसंबर की शाम को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा आयोजित स्टेट बैंक्वेट के साथ खत्म होगा। इसके बाद वह देर रात रूस के लिए रवाना हो जाएंगे। कुल मिलाकर उनका यह 30 घंटे का छोटा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण दौरा होगा।
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