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Budget 2026: बजट डे पर चांदी कैसे कर सकती है रिएक्ट? इन सेक्टर्स पर पॉलिसी से तय हो सकता है अगला ट्रेंड

Shubham Singh Thakur

4 min read | अपडेटेड January 31, 2026, 15:04 IST

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सारांश

Budget 2026: चांदी सिर्फ निवेश की चीज नहीं है, बल्कि इंडस्ट्री में भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होती है। अभी चांदी की कीमतें कई साल के ऊंचे स्तर पर हैं और इसकी मांग के तरीके भी बदल रहे हैं। ऐसे में बजट 2026 में सरकार क्या नीतियां अपनाती है, इसका असर लंबे समय तक चांदी के बाजार पर पड़ सकता है।

Silver Price

Silver Price: 30 जनवरी को चांदी 27 फीसदी या 1,07,971 रुपये टूटकर 2,91,922 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर आ गया।

Budget 2026: भारत में 1 फरवरी को यूनियन बजट 2026 आने वाला है। इस बार निवेशकों और इंडस्ट्री की खास नजर चांदी पर रहने वाली है। पिछले दो दिनों में चांदी के भाव में भारी गिरावट देखी गई है। MCX पर 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम के ऑल-टाइम हाई पर पहुंचने के बाद इसमें जमकर प्रॉफिट बुकिंग देखी गई। कल यानी 30 जनवरी को तो यह 27 फीसदी या 1,07,971 रुपये टूटकर 2,91,922 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर आ गया। इस बार बजट डे पर यानी रविवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) ओपन रहेगा। यहां हम समझेंगे कि बजट के दिन चांदी कैसे रिएक्ट कर सकती है और सरकार के किन फैसलों का इस पर असर इस पर दिख सकता है।
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चांदी क्यों है अहम?

चांदी सिर्फ निवेश की चीज नहीं है, बल्कि इंडस्ट्री में भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होती है। अभी चांदी की कीमतें कई साल के ऊंचे स्तर पर हैं और इसकी मांग के तरीके भी बदल रहे हैं। ऐसे में बजट 2026 में सरकार क्या नीतियां अपनाती है, इसका असर लंबे समय तक चांदी के बाजार पर पड़ सकता है।

दुनिया भर में अनिश्चितता, सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग, रुपये की कमजोरी और निवेशकों की मजबूत दिलचस्पी के चलते चांदी ने पिछले एक साल में जबरदस्त रिटर्न दिया है। जब दुनिया में तनाव, युद्ध या महंगाई बढ़ती है, तो लोग सोना-चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर भागते हैं, जिससे कीमतें ऊपर चली जाती हैं।

इंपोर्ट ड्यूटी का दिख सकता है असर

बजट में सबसे सीधा असर इम्पोर्ट ड्यूटी यानी आयात शुल्क से पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत की 80 फीसदी से ज्यादा चांदी विदेश से मंगाता है। अभी चांदी पर करीब 7.5 फीसदी कस्टम ड्यूटी और 3 फीसदी GST लगता है। अगर बजट में सरकार इम्पोर्ट ड्यूटी कम करती है, तो भारत में चांदी सस्ती हो सकती है, जिससे ज्वेलरी खरीदने वालों और निवेशकों की मांग बढ़ेगी। लेकिन अगर सरकार ड्यूटी बढ़ा देती है या सख्त करती है, तो चांदी और महंगी हो जाएगी और आम ग्राहकों की खरीद घट सकती है।

जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर लगातार सरकार से मांग कर रहा है कि इम्पोर्ट ड्यूटी और GST को तर्कसंगत बनाया जाए, ताकि मांग बढ़े और भारतीय ज्वेलरी दुनिया में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सके। अगर बजट में इस दिशा में कोई राहत मिलती है, तो उससे चांदी की खपत को भी परोक्ष रूप से फायदा मिल सकता है।

रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की पॉलिसी चांदी के लिए होगी अहम

चांदी की मांग सिर्फ निवेश या गहनों से नहीं आती, बल्कि इंडस्ट्री से भी आती है। बजट 2026 में सरकार के ग्रीन एनर्जी और रिन्यूएबल एनर्जी पर जोर देने की पूरी उम्मीद है। सोलर पैनल बनाने में चांदी बहुत जरूरी होती है, क्योंकि इसमें बिजली प्रवाह बहुत अच्छा होता है। अगर सरकार सोलर प्रोजेक्ट्स, सब्सिडी और प्रोडक्शन इंसेंटिव बढ़ाती है, तो आने वाले समय में इंडस्ट्रियल चांदी की मांग 15 से 20 फीसदी तक बढ़ सकती है, हालांकि इसका असर धीरे-धीरे दिखेगा।

EV सेक्टर से जुड़े ऐलानों पर रहेगी नजर

इसके अलावा इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी EV सेक्टर में भी चांदी का बड़ा रोल है। EV की पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में चांदी का इस्तेमाल होता है। अगर बजट में EV अपनाने, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और चार्जिंग नेटवर्क को सपोर्ट मिलता है, तो इससे भी चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड बढ़ेगी।

पिछले कुछ सालों में देखा गया है कि इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल उपकरण, EV और सोलर सेक्टर से चांदी की मांग तेजी से बढ़ी है। आज स्थिति यह है कि इंडस्ट्रियल इस्तेमाल में करीब 68 फीसदी चांदी इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल एप्लिकेशन में जा रही है। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि इतनी ऊंची कीमतों पर यह सवाल भी खड़ा होता है कि क्या इंडस्ट्री इतनी ही तेजी से चांदी खरीदती रहेगी, या फिर कंपनियां सस्ते विकल्प ढूंढने लगेंगी।

बजट से तय हो सकती है चांदी की डिमांड

2025 में सिल्वर ETF में भारी पैसा आया, जिससे कुल मांग और इम्पोर्ट पर दबाव बढ़ा। बजट के टैक्स और पॉलिसी फैसले तुरंत पूरी तस्वीर नहीं बदलेंगे, लेकिन इम्पोर्ट ड्यूटी और इंडस्ट्रियल नीतियों से जुड़े संकेत यह तय करेंगे कि आने वाले समय में चांदी की मांग कितनी तेजी से बढ़ेगी।

(डिस्क्लेमरः डेरिवेटिव ट्रेडिंग केवल उन्हीं व्यापारियों द्वारा की जानी चाहिए, जो इससे जुड़े जोखिमों को पूरी तरह समझते हैं और स्टॉप-लॉस जैसे जोखिम प्रबंधन उपायों का सख्ती से पालन करते हैं। यह जानकारी केवल ग्राहकों के लिए है। हम किसी विशेष स्टॉक, प्रतिभूति या ट्रेडिंग रणनीति की अनुशंसा नहीं करते हैं। निवेश करने से पहले अपना फैसला खुद लें।)
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लेखकों के बारे में

Shubham Singh Thakur
Shubham Singh Thakur is a business journalist with a focus on stock market and personal finance. An alumnus of the Indian Institute of Mass Communication (IIMC), he is passionate about making financial topics accessible and relevant for everyday readers.

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