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4 min read | अपडेटेड February 23, 2026, 17:15 IST
सारांश
US-Iran Tensions: दूतावास ने यह भी कहा कि पासपोर्ट और पहचान से जुड़े कागज हमेशा तैयार रखें। मदद के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर और ई-मेल साझा किए गए हैं। जो भारतीय अब तक दूतावास में रजिस्टर नहीं हुए हैं, उनसे ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करने को कहा गया है।

अमेरिका और ईरान के बीच अगली परमाणु वार्ता इस हफ्ते गुरुवार को Geneva में होने वाली है।
दूतावास ने यह भी कहा कि पासपोर्ट और पहचान से जुड़े कागज हमेशा तैयार रखें। मदद के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर और ई-मेल साझा किए गए हैं। जो भारतीय अब तक दूतावास में रजिस्टर नहीं हुए हैं, उनसे ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करने को कहा गया है। अगर ईरान में इंटरनेट दिक्कत के कारण रजिस्ट्रेशन संभव न हो, तो भारत में मौजूद परिवार से यह प्रक्रिया पूरी कराने की अपील की गई है।
यह एडवाइजरी ऐसे समय आई है जब अमेरिका द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई की अटकलें तेज हैं और साथ ही परमाणु समझौते को लेकर बातचीत फिर शुरू होने वाली है। Donald Trump ने शुक्रवार को कहा कि बातचीत के दौरान भी सीमित सैन्य कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को “न्यायपूर्ण समझौता” करना चाहिए।
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि ईरान 2–3 दिनों में एक ड्राफ्ट समझौता तैयार कर वॉशिंगटन भेजने की तैयारी में है। उनके मुताबिक, एक हफ्ते के भीतर गंभीर बातचीत शुरू होकर नतीजे तक पहुंचा जा सकता है। उन्होंने साफ किया कि ईरान कूटनीति के लिए भी तैयार है और अगर बातचीत विफल होती है तो टकराव के लिए भी।
अमेरिका और ईरान के बीच अगली परमाणु वार्ता इस हफ्ते गुरुवार को Geneva में होने वाली है। इससे पहले Oman में अप्रत्यक्ष बातचीत और संपर्क हुए थे। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कहा कि बातचीत में “व्यावहारिक प्रस्तावों का आदान-प्रदान” हुआ है और संकेत सकारात्मक हैं, लेकिन उन्होंने चेतावनी भी दी कि ईरान हर संभावित स्थिति के लिए तैयार है।
अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी काफी बढ़ा दी है। Pentagon दशकों में पहली बार इतनी बड़ी नौसैनिक और वायु शक्ति तैनात कर रहा है। इसमें दो एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप शामिल हैं। शुक्रवार को USS Gerald R. Ford कैरियर स्ट्राइक ग्रुप Strait of Gibraltar से गुजरकर भूमध्य सागर में दाखिल हुआ।
वॉशिंगटन का रुख है कि ईरान को परमाणु हथियार रखने या बनाने की क्षमता नहीं दी जा सकती और वह यूरेनियम संवर्धन नहीं कर सकता। वहीं अराघची ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तहत ईरान को यूरेनियम संवर्धन का अधिकार है। ट्रंप के विशेष दूत Steve Witkoff ने Fox News से कहा कि ट्रंप यह जानने को “उत्सुक” हैं कि ईरान ने अब तक अपने परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने के लिए क्यों पूरी तरह सहमति नहीं दी।
तेहरान लंबे समय से कहता रहा है कि बातचीत सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहे। वह अमेरिका और इजराइल की उन मांगों को खारिज करता है जिनमें मिसाइल कार्यक्रम रोकने और क्षेत्र के सशस्त्र सहयोगी समूहों से रिश्ते तोड़ने की बात है।
भारत के लिए ईरान रणनीतिक और आर्थिक रूप से अहम है। कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स, ऊर्जा संबंध और व्यापार के साथ-साथ हजारों भारतीय नागरिक वहां पढ़ाई, कारोबार और धार्मिक यात्रा के लिए रहते या जाते हैं। मौजूदा अनिश्चित और तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए ही भारत ने अपने नागरिकों को एहतियातन ईरान छोड़ने की सलाह दी है।
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