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3 min read | अपडेटेड March 27, 2026, 09:05 IST
सारांश
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के एनर्जी प्लांटों पर होने वाले हमलों को 10 दिनों के लिए टालने का ऐलान किया है। ट्रंप का कहना है कि यह फैसला ईरान सरकार की गुजारिश पर लिया गया है। हालांकि, ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान समझौते के लिए गिड़गिड़ा रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
मिडिल ईस्ट में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला फैसला लिया है। ट्रंप ने 26 मार्च को ऐलान किया कि अमेरिका ईरान के एनर्जी ठिकानों पर होने वाले हमलों को अगले 10 दिनों के लिए रोक रहा है। ट्रंप के मुताबिक यह रोक 6 अप्रैल 2026 की रात 8 बजे तक लागू रहेगी। इस फैसले के पीछे का कारण बताते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान सरकार ने खुद उनसे यह गुजारिश की थी कि हमलों को कुछ समय के लिए थाम दिया जाए ताकि बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके। इस ऐलान के बाद पूरी दुनिया की नजरें अब 6 अप्रैल की डेडलाइन पर टिक गई हैं।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कई पोस्ट किए हैं। उन्होंने लिखा कि मीडिया चाहे जो भी कहे, लेकिन ईरान के साथ बातचीत बहुत अच्छी चल रही है। हालांकि, ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज में ईरान पर निशाना साधने से भी परहेज नहीं किया। उन्होंने एक अन्य पोस्ट में दावा किया कि ईरानी अधिकारी बहुत ही अजीब हैं और वे समझौते के लिए अमेरिका के सामने गिड़गिड़ा रहे हैं। ट्रंप का कहना है कि ईरान की मिलिट्री पावर पूरी तरह खत्म हो चुकी है और उनके पास वापसी का कोई मौका नहीं बचा है। उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर ईरान इस बार गंभीर नहीं हुआ, तो फिर वापस लौटने का कोई रास्ता नहीं बचेगा और अंजाम बहुत बुरा होगा।
अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के सामने शांति के लिए एक 15 सूत्रीय प्लान पेश किया है। इस प्लान की सबसे अहम शर्त होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलना है। आपको बता दें कि यह रास्ता कच्चे तेल और नेचुरल गैस की सप्लाई के लिए दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग है। पिछले कुछ हफ्तों से यहां ऑपरेशन बंद होने या बाधित होने की वजह से पूरी दुनिया में तेल और गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं। ट्रंप चाहते हैं कि अगर ईरान को शांति चाहिए, तो उसे इस रास्ते को पूरी तरह खोलना होगा ताकि ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई सामान्य हो सके। हालांकि ईरान अभी भी आधिकारिक तौर पर किसी भी तरह की बातचीत से इनकार कर रहा है।
इस पूरे संकट के बीच ट्रंप ने एक बार फिर नाटो देशों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि नाटो देशों ने ईरान जैसे देश से निपटने में अमेरिका की कोई मदद नहीं की। ट्रंप ने साफ लहजे में कहा कि अमेरिका को नाटो से कुछ नहीं चाहिए, लेकिन दुनिया को यह याद रखना चाहिए कि इस मुश्किल समय में किसने साथ दिया और किसने नहीं। ट्रंप के इन कड़े बयानों और ग्लोबल अनिश्चितता का असर आज शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है।
भारतीय निवेशकों के लिए आज सुबह की शुरुआत अच्छी नहीं दिख रही है। गिफ्ट निफ्टी (GIFT NIFTY) से मिल रहे संकेत बता रहे हैं कि निफ्टी इंडेक्स आज 125 पॉइंट की गिरावट के साथ खुल सकता है। ट्रंप के इस 10 दिन के ब्रेक के बावजूद मार्केट में डर का माहौल बना हुआ है क्योंकि यह शांति सिर्फ 6 अप्रैल तक के लिए है। अगर इन 10 दिनों में बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचती है, तो हमलों का दौर फिर से शुरू हो सकता है।
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