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3 min read | अपडेटेड November 27, 2025, 15:40 IST
सारांश
एसबीआई के चेयरमैन ने साथ ही भरोसा जताया कि अगर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अगले सप्ताह की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर में 0.25% की कटौती करने का फैसला लेता है तब भी वह 3% शुद्ध ब्याज मुनाफे के लक्ष्य को हासिल कर लेगा।

एसबीआई को पांच-छह साल तक इक्विटी कैपिटल की जरूरत नहींः SBI चेयरमैन
State Bank of India (SBI) के चेयरमैन सी एस शेट्टी ने कहा कि इस साल की शुरुआत में पात्र संस्थागत नियोजन (Qualified Institutional Placement, QIP) के जरिए जुटाई गई 25,000 करोड़ रुपये की इक्विटी कैपिटल से 12 लाख करोड़ रुपये की ऋण वृद्धि को सपोर्ट मिलेगा। साथ ही पांच से छह साल तक पूंजी पर्याप्तता अनुपात (Capital Adequacy Ratio, CAR) 15% बना रहेगा। उन्होंने कहा कि ऋण पूंजी (Debt Capital) के संबंध में बैंक पीरियॉडिक प्रोसेस के तहत बॉन्ड के जरिए 12,500 करोड़ रुपये जुटाएगा। शेट्टी ने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘इस क्यूआईपी के शुरू होने से पहले भी, ऋण वृद्धि को वित्तपोषित करने की हमारी क्षमता कभी समस्या नहीं रही। हम कैपिटल रेशियो को मजबूत करना चाहते थे, इसलिए हमने ऐसा किया। हमारी लॉन्ग-टर्म रणनीति सीआरएआर (Capital to Risk Weighted Assets Ratio) को 15% और ‘कॉमन इक्विट टियर-1’ को 12% पर बनाए रखना है।’
उन्होंने कहा कि इस तरह का पूंजी-जोखिम परिसंपत्ति अनुपात (Capital to Risk Weighted Assets Ratio, CRAR) बैंक को 12,000 अरब रुपये से अधिक के अग्रिमों को वित्तपोषित करने की क्षमता देता है। एसबीआई के चेयरमैन ने कहा, ‘आज की लाभ दर के साथ, अगर यही लाभप्रदता अगले पांच से छह साल तक बनी रहती है, तो हमें कम से कम सीईटी-1 पर कोई भी कैपिटल जुटाने की जरूरत नहीं होगी।’ एसबीआई ने इस साल जुलाई में अपने इक्विटी शेयर के पात्र संस्थागत नियोजन (क्यूआईपी) के जरिए 25,000 करोड़ रुपये जुटाए। इससे यह भारतीय कैपिटल मार्केट में अब तक का सबसे बड़ा क्यूआईपी बन गया। इससे पहले बैंक ने जून 2017 में क्यूआईपी के जरिए 15,000 करोड़ रुपये की इक्विटी कैपिटल जुटाई थी। टियर-II बॉन्ड से कोष जुटाने को लेकर शेट्टी ने कहा कि इस साल बैंक ऐसे बॉन्ड के जरिए और 12,500 करोड़ रुपये जुटाएगा…
टियर-1 बॉन्ड से मतलब इक्विटी कैपिटल से है। वहीं टियर-II बॉन्ड निश्चित अवधि के लिए जुटाए जाना वाला फंड है। एसबीआई के चेयरमैन ने साथ ही भरोसा जताया कि अगर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अगले सप्ताह की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर में 0.25% की कटौती करने का फैसला लेता है तब भी वह 3% शुद्ध ब्याज मुनाफे के लक्ष्य को हासिल कर लेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अगले शुक्रवार को आरबीआई का निर्णय एक ‘कड़ी चुनौती’ होगा। शेट्टी ने कहा कि एसबीआई का मानना है कि ब्याज दरों में 0.25% की मामूली कटौती की जा सकती है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश है और अक्टूबर में पिछली द्विमासिक नीति में इसका उल्लेख किया गया था। हालिया वक्तव्य और व्यापक आर्थिक संकेतकों ने 5 दिसंबर को होने वाली मौद्रिक नीति समिति के निर्णय में ब्याज दरों में कटौती की व्यापक उम्मीदें जगा दी हैं। देश के सबसे बड़े ऋणदाता के प्रमुख शेट्टी ने कहा कि वृद्धि दर उच्च स्तर पर बनी हुई है। बैंक को उम्मीद है कि दूसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी 7.5% और फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7% रहेगी। इसलिए आरबीआई को इस पर कड़ा रुख अपनाना होगा।
भाषा इनपुट के साथ
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