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3 min read | अपडेटेड May 12, 2026, 10:15 IST
सारांश
अपस्ट्रीम कंपनियों में रॉयल्टी वह शुल्क है, जो ओएनजीसी और ऑयल इंडिया लिमिटेड जैसी तेल और गैस कंपनियां देश के प्राकृतिक भंडारों से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के निष्कर्षण के लिए सरकार को देती हैं।
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ओएनजीसी और ऑयल इंडिया के शेयरों में आज क्यों दिख रहा उछाल? (Photo: Shutterstock)
सरकार ने डोमेस्टिक एक्सप्लोरेशन और उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए गहरे (डीपवॉटर) और अति गहरे (अल्ट्रा-डीपवॉटर) क्षेत्रों समेत कई श्रेणियों के कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस उत्पादन पर रॉयल्टी दरों में कमी करने का फैसला लिया है। इसके बाद आज ONGC और ऑयल इंडिया लिमिटेड जैसी अपस्ट्रीम तेल कंपनियों के शेयरों में कुछ तेजी देखने को मिली है। ONGC का शेयर NSE पर 4.63% बढ़कर 294 रुपये प्रति शेयर पर ट्रेड हो रहा था, जबकि ऑयल इंडिया (OIL) का शेयर 7% से अधिक बढ़कर 488.80 रुपये प्रति शेयर पर कारोबार कर रहा था।
अपस्ट्रीम ऑयल कंपनियां कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के एक्सप्लोरेशन और उत्पादन में शामिल फर्म हैं। उनका अहम काम तेल और गैस भंडार की खोज, कुओं की खुदाई और जमीन या अपतटीय क्षेत्रों से हाइड्रोकार्बन निकालना शामिल है। भारत में, प्रमुख अपस्ट्रीम कंपनियों में ONGC और ऑयल इंडिया लिमिटेड शामिल हैं। ये कंपनियां रिफाइनरियों और ईंधन खुदरा विक्रेताओं को कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई करती हैं।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 8 मई को संशोधित रॉयल्टी दरों और कार्यप्रणालियों (Methodologies) को अधिसूचित किया। यह अधिसूचना भारत के अपस्ट्रीम ऑयल और गैस क्षेत्र के लिए अधिक स्थिर और निवेशक-अनुकूल ढांचा तैयार करने के उद्देश्य से किए गए व्यापक सुधारों का हिस्सा है। सरकार ने कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और केसिंग हेड कंडेनसेट के लिए रॉयल्टी दरों और कार्यप्रणालियों के युक्तिकरण को भारत के अपस्ट्रीम तेल और गैस क्षेत्र के लिए एक बड़ा सुधार बताया है।
भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने X पर एक पोस्ट में इसे अपस्ट्रीम इंडस्ट्री के लिए ‘बड़ा प्रोत्साहन’ बताते हुए कहा कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लंबे समय से चली आ रही विसंगतियों को दूर करके और अधिक स्थिर और निवेशक-अनुकूल ढांचा तैयार करके भारत के तेल और गैस नियामक तंत्र के लिए एक नए युग की शुरुआत करता है।
उन्होंने कहा कि तेल क्षेत्र (विनियमन और विकास) अधिनियम और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियमों में साल 2025 में किए गए ऐतिहासिक संशोधनों के बाद, सरकार ने नियामक स्पष्टता और पूर्वानुमान में सुधार लाने के लिए हाइड्रोकार्बन के सभी क्षेत्रों में रॉयल्टी दरों और कार्यप्रणालियों को संशोधित किया है। बयान के अनुसार, संशोधित अनुसूची का उद्देश्य विभिन्न रॉयल्टी व्यवस्थाओं में विसंगतियों को दूर करना और अपस्ट्रीम क्षेत्र में लॉन्ग-टर्म विकास को बढ़ावा देना है।
अपस्ट्रीम कंपनियों में रॉयल्टी वह शुल्क है, जो ओएनजीसी और ऑयल इंडिया लिमिटेड जैसी तेल और गैस कंपनियां देश के प्राकृतिक भंडारों से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के निष्कर्षण के लिए सरकार को देती हैं। यह आमतौर पर उत्पादित तेल या गैस के मूल्य के प्रतिशत के रूप में लिया जाता है। ‘रॉयल्टी दर’ सरकार द्वारा निर्धारित इस प्रतिशत को रिफर करती है। उदाहरण के लिए, अगर कोई कंपनी 100 रुपये मूल्य का कच्चा तेल उत्पादित करती है और रॉयल्टी दर 10% है, तो उसे सरकार को 10 रुपये रॉयल्टी के रूप में देना होता है। उच्च रॉयल्टी दरें अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए लागत बढ़ाती हैं, जबकि कम दरें प्रॉफिटिबिलिटी में सुधार करती हैं और अधिक एक्सप्लोरेशन और उत्पादन को प्रोत्साहित कर सकती हैं, खासकर महंगे गहरे पानी और अति गहरे पानी की परियोजनाओं में।
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