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India-NZ FTA: PM नरेंद्र मोदी से मिलेंगे न्यूजीलैंड के PM, 10 साल बाद खुलेंगे व्यापार समझौते के दरवाजे

Upstox

3 min read | अपडेटेड March 17, 2025, 12:32 IST

सारांश

India-NZ FTA Talks: भारत और न्यूजीलैंड के बीच 10 साल बाद एक बार फिर व्यापार समझौते पर बातचीत होने जा रही है। इसी सिलसिले में किवी PM क्रिस्टफर लक्सन भारत दौरे पर आए हैं। न्यूजीलैंड की औसत इंपोर्ट ड्यूटी केवल 2.3% है जबकि भारत का औसत शुल्क 17.8% है। दोनों देशों के बीच कई मुद्दों को सुलझाया जाना है जिनमें डेयरी उद्योग एक बड़ा पॉइंट होगा।

साल 2010 में दोनों देशों के बीच FTA पर बातचीत शुरू हुई थी। (तस्वीर: Shutterstock)

साल 2010 में दोनों देशों के बीच FTA पर बातचीत शुरू हुई थी। (तस्वीर: Shutterstock)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टफर लक्सन के साथ मुलाकात करेंगे। 4 दिन के दौरे पर पहुंचे लक्सन ने भारत को न्यूजीलैंड की संपन्ना, सुरक्षा और समाज के लिए बेहद अहम बताया। उनके पहुंचने के पहले दोनों देशों के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement, FTA) के लिए बातचीत बहाल करने की घोषणा की गई थी।

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FTA पर बातचीज 10 साल पहले 2015 में स्थगित हो गई थी। भारत और न्यूजीलैंड ने वस्तुओं, सेवाओं और निवेश में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए अप्रैल, 2010 में व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (सीईसीए) पर बातचीत शुरू की थी। हालांकि, नौ दौर की चर्चाओं के बाद 2015 में यह सिलसिला रुक गया था।

भारत पहुंचे लक्सन ने X (ट्विटर) पर पोस्ट किया, ‘भारतीय समुदाय न्यूजीलैंड में तीसरा सबसे बड़ा एथनिक ग्रुप है, भारत कुशल पलायनकर्ताओं का सबसे बड़ा स्रत है और अंतरराष्ट्रीय छात्रों का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है।’

उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड में रहने वाले भारतीय उसकी ओर बड़ा योगदान देते हैं और उन्हें देश के लिए यह समुदाय जो करता है उस पर गर्व है।

रविवार को वाणिज्य मंत्रालय ने जानकारी दी कि दोनों देश एक व्यापक और पारस्परिक रूप से लाभकारी भारत-न्यूजीलैंड FTA के लिए बातचीत शुरू कर रहे हैं। मंत्रालय ने वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले के बीच बैठक के बाद यह घोषणा की थी।

सरकार की ओर से जारी बयान में बताया गया कि इस FTA का उद्देश्य संतुलित परिणाम प्राप्त करना है, जिससे सप्लाई चेन इंटग्रेशन बढ़े और बाजार पहुंच बेहतर हो सके।

डेयरी इंडस्ट्री का मुद्दा अहम

शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, नए सिरे से होने वाली वार्ता में एक बड़ी चुनौती टैरिफ स्ट्रक्चर में असमानता होगी। न्यूजीलैंड की औसत इंपोर्ट ड्यूटी केवल 2.3% है, जबकि इसकी आधी से अधिक शुल्क लाइनें पहले से ही शुल्क-मुक्त हैं।

इसका मतलब है कि भारतीय सामान की पहले से ही उसके बाजार में पर्याप्त पहुंच है। इससे उलट, भारत का औसत शुल्क 17.8% है, यानी उसे महत्वपूर्ण कटौती करनी होगी, जिससे भारत के लिए पारंपरिक FTA कम आकर्षक हो जाएगा।

GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के मुताबिक न्यूजीलैंड भारत के डेयरी बाजार में अधिक पहुंच की मांग कर रहा था, जिसका भारत ने अपने घरेलू डेयरी उद्योग की रक्षा के लिए विरोध किया, जो लाखों किसानों का समर्थन करता है।

श्रीवास्तव ने कहा कि वर्तमान में, न्यूजीलैंड से भारत का डेयरी आयात न्यूनतम (लगभग 5.7 लाख डॉलर) है, और जबकि भारत मूल्यवर्धित डेयरी उत्पादों के सीमित आयात पर विचार कर सकता है, वह कच्चे डेयरी आयात की अनुमति देने के खिलाफ है।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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