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New CAFE Norms: पेट्रोल-डीजल कारों की घटेगी ईंधन खपत, कब से लागू होंगे नए नियम?

Namita Shukla

3 min read | अपडेटेड September 30, 2026, 13:53 IST

सारांश

भारत में परिवहन क्षेत्र ऊर्जा की बड़ी मात्रा का इस्तेमाल करता है और पैसेंजर वाहन पेट्रोल-डीजल की खपत में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसे में ईंधन दक्षता बढ़ाने से देश की कुल ऊर्जा खपत को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

पेट्रोल-डीजल

क्या हैं नए CAFE नियम और कार कंपनियों पर क्या होगा असर? (Photo: Shutterstock)

भारत सरकार ने पैसेंजर वाहनों की ईंधन दक्षता बढ़ाने के लिए नए Corporate Average Fuel Economy (CAFE) Norms जारी किए हैं। नए नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे और 31 मार्च 2032 तक प्रभावी रहेंगे। इन नियमों का उद्देश्य कार कंपनियों को ज्यादा ईंधन-कुशल वाहन बनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि पेट्रोल-डीजल की खपत कम हो और देश की ऊर्जा जरूरतों पर दबाव घटाया जा सके।

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हर साल सख्त होंगे ईंधन दक्षता के नियम

नए CAFE नियमों के तहत कार कंपनियों को हर साल अपनी गाड़ियों की औसत ईंधन दक्षता में सुधार करना होगा। 2027-28 में ईंधन खपत का निर्धारित मानक 3.996 लीटर प्रति 100 किलोमीटर रखा गया है। इसे धीरे-धीरे कम करते हुए 2031-32 तक 3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर किया जाएगा।

इस तरह पांच साल की अवधि में ईंधन दक्षता में करीब 16.7 फीसदी सुधार का लक्ष्य रखा गया है। इसका मतलब है कि कंपनियों को ऐसी तकनीक और वाहन विकसित करने होंगे जो कम ईंधन में ज्यादा दूरी तय कर सकें।

हल्की और भारी कारों के लिए अलग दृष्टिकोण

नए CAFE नियमों में वाहनों के वजन को भी ध्यान में रखा गया है। सरकार ने रेफरेंस वेट यानी संदर्भ वजन को मौजूदा 1,082 किलोग्राम से बढ़ाकर 1,229 किलोग्राम कर दिया है। इसमें करीब 13.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

नए फ्रेमवर्क में हल्के वाहनों के लिए अपेक्षाकृत नरम लक्ष्य रखे गए हैं, जबकि भारी वाहनों से ज्यादा ईंधन दक्षता की उम्मीद की जाएगी। इससे अलग-अलग वजन वाली कारों के लिए नियमों को ज्यादा संतुलित बनाने की कोशिश की गई है।

नई तकनीकों को अपनाने की मिलेगी आजादी

नए CAFE Norms केवल पेट्रोल और डीजल इंजन की दक्षता पर ही निर्भर नहीं हैं। कार कंपनियों को क्लीनर टेक्नोलॉजी, वैकल्पिक ईंधन और इलेक्ट्रिफिकेशन जैसी तकनीकों को अपनाने की भी सुविधा मिलेगी।

इसके अलावा सोलर रिफ्लेक्टिव पेंट, बेहतर ग्लेजिंग और ज्यादा दक्ष एयर-कंडीशनिंग सिस्टम जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करके भी वाहन की कुल ईंधन दक्षता में सुधार किया जा सकता है।

क्यों महत्वपूर्ण हैं नए CAFE Norms?

भारत में परिवहन क्षेत्र ऊर्जा की बड़ी मात्रा का इस्तेमाल करता है और पैसेंजर वाहन पेट्रोल-डीजल की खपत में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसे में ईंधन दक्षता बढ़ाने से देश की कुल ऊर्जा खपत को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

सरकार का नया CAFE फ्रेमवर्क बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन इस्तेमाल, वैकल्पिक और नवीकरणीय ईंधन की उपलब्धता तथा ऑटोमोबाइल क्षेत्र में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों के अनुरूप तैयार किया गया है।

कुल मिलाकर, नए CAFE Norms का फोकस कार कंपनियों को ज्यादा फ्यूल-एफिशिएंट और नई तकनीक वाली गाड़ियां विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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