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4 min read | अपडेटेड May 20, 2026, 11:00 IST
सारांश
दवा दुकानदारों के संगठन AIOCD ने ई-फार्मेसी के विरोध में एक दिन की स्ट्राइक का एलान किया है। इसके बावजूद कई राज्यों के रिटेल एसोसिएशन इस हड़ताल से अलग हो गए हैं। पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में दवाओं की सप्लाई जारी रहेगी और जरूरी मेडिकल सेवाएं प्रभावित नहीं होंगी।

देशव्यापी हड़ताल के बावजूद मरीजों की सुविधा के लिए अस्पताल के मेडिकल स्टोर और सरकारी जन औषधि केंद्र खुले रहेंगे। Image: Shutterstock
देश भर में दवा दुकानदारों और डिस्ट्रीब्यूटर्स के सबसे बड़े संगठन ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट यानी एआईओसीडी ने बुधवार को एक दिन की देशव्यापी हड़ताल बुलाई है। इस स्ट्राइक के एलान के बाद मरीजों और उनके परिवार के लोगों के बीच दवाओं की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई थी। लेकिन राहत की बात यह है कि इस हड़ताल के बावजूद देश के अधिकांश हिस्सों में दवाओं की किल्लत नहीं होगी। देश भर के प्रमुख फार्मेसी चेन, अस्पतालों में मौजूद मेडिकल स्टोर, सरकारी जन औषधि केंद्र और अमृत आउटलेट आम दिनों की तरह ही खुले रहने वाले हैं।
दवा दुकानदारों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन एआईओसीडी से करीब 12.4 लाख केमिस्ट, फार्मासिस्ट और दवा डिस्ट्रीब्यूटर जुड़े हुए हैं। इस संगठन का आरोप है कि नियमों की कमियों का फायदा उठाकर ऑनलाइन दवा बेचने वाली ई-फार्मेसी कंपनियां और तुरंत दवा पहुंचाने वाले क्विक डिलीवरी प्लेटफॉर्म बिना किसी कड़े नियम और निगरानी के काम कर रहे हैं। इसी के विरोध में संगठन ने एक दिन की देशव्यापी स्ट्राइक का फैसला किया है। संगठन का कहना है कि ऑनलाइन बिना सही जांच के दवाएं बेची जा रही हैं, जिससे उनके बिजनेस पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
हालांकि एआईओसीडी ने इस बड़े प्रदर्शन का एलान किया है, लेकिन देश के कई राज्यों के रिटेल फार्मेसी संगठनों ने खुद को इस हड़ताल से पूरी तरह अलग कर लिया है। इन संगठनों ने सरकार और प्रशासन को लिखित में भरोसा दिया है कि वे अपनी दुकानों को खुला रखेंगे। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल, केरल, पंजाब, महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, लद्दाख, गुजरात, छत्तीसगढ़, सिक्किम और उत्तराखंड के रिटेल दवा संगठनों ने इस हड़ताल में शामिल न होने का फैसला किया है। इन राज्यों के एसोसिएशन का कहना है कि वे दवाओं की सप्लाई को रुकने नहीं देंगे ताकि मरीजों को कोई दिक्कत न हो।
मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि दवा दुकानों के बंद होने से मरीजों को, विशेष रूप से उन लोगों को जो जीवन रक्षक दवाओं पर निर्भर हैं, बहुत गंभीर समस्या हो सकती है। इसके साथ ही अस्पतालों की सप्लाई चेन पर भी इसका बुरा असर पड़ सकता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए कई राज्यों के संगठनों ने इस मामले पर दोबारा विचार किया और रेगुलेटर के पॉजिटिव रुख को देखते हुए काम जारी रखने का फैसला किया। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी सीडीएससीओ के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि जनता की सेहत और मरीजों तक दवाओं की पहुंच सबसे महत्वपूर्ण है। किसी भी समस्या को बातचीत के जरिए हल किया जा सकता है और इस दौरान स्वास्थ्य सेवाएं जारी रहना बेहद जरूरी है।
केमिस्ट संगठन का यह पूरा विरोध सरकार के दो मुख्य नोटिफिकेशन को लेकर है। संगठन की मांग है कि सरकार जीएसआर 220(ई) और जीएसआर 817(ई) नाम के दोनों नोटिफिकेशन को तुरंत वापस ले। साल 2018 में जारी हुए एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के तहत ई-फार्मेसी के लिए रजिस्ट्रेशन, पर्चे की जांच और नियमों को तोड़ने पर पेनल्टी लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन इसे पूरी तरह लागू या वापस नहीं किया गया।
संगठन का कहना है कि इस वजह से ऑनलाइन फार्मेसी बिना किसी स्पष्ट कानून के चल रही हैं। वहीं कोरोना महामारी के दौरान आए दूसरे नियम के तहत दुकानों को घर तक दवा पहुंचाने की मंजूरी मिली थी, जिसका इस्तेमाल अब ऑनलाइन कंपनियां बिना कड़े नियमों के कर रही हैं। दवा संगठन ने हाल ही में नेशनल ड्रग रेगुलेटर से मिलकर अपनी चिंताएं जताई हैं। हालांकि कुछ स्वतंत्र दुकानें बंद रह सकती हैं, पर बड़े स्टोर खुले रहने से काम प्रभावित नहीं होगा।
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