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  1. मूडीज की रिपोर्ट ने बना दिया 'मूड', झटकों से निपटने में भारत की अर्थव्यवस्था बेहतर स्थिति में

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मूडीज की रिपोर्ट ने बना दिया 'मूड', झटकों से निपटने में भारत की अर्थव्यवस्था बेहतर स्थिति में

Upstox

2 min read | अपडेटेड May 05, 2026, 16:08 IST

सारांश

उभरते बाजारों पर अपनी रिपोर्ट में मूडीज ने कहा कि क्लियर और भरोसेमंद मॉनिटरी पॉलिसी फ्रेमवर्क, मुद्रास्फीति अपेक्षाओं का स्थिर रहना और जरूरत पड़ने पर एक्सचेंज रेट्स का समायोजित हो पाना, इन सभी कारणों से भारत भविष्य के झटकों से निपटने के लिए अच्छी स्थिति में है।

भारतीय अर्थव्यवस्था

भारत उभरते बाजारों में सबसे मजबूत अर्थव्यवस्थाः मूडीज

भारत उभरते बाजारों में 2020 के बाद से सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था बना हुआ है और इसके बड़े विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange (Forex) Reserves) ने ग्लोबल झटकों के दौरान मुद्रा की अस्थिरता को कंट्रोल करने और विश्वास को मजबूत करने में मदद की है। साख तय करने वाली एजेंसी मूडीज रेटिंग्स ने मंगलवार को यह बात कही। उभरते बाजारों पर अपनी रिपोर्ट में मूडीज ने कहा कि क्लियर और भरोसेमंद मॉनिटरी पॉलिसी फ्रेमवर्क, मुद्रास्फीति अपेक्षाओं का स्थिर रहना और जरूरत पड़ने पर एक्सचेंज रेट्स का समायोजित हो पाना, इन सभी कारणों से भारत भविष्य के झटकों से निपटने के लिए अच्छी स्थिति में है। मूडीज ने कहा कि उभरते देशों में भारत ‘बेहतर स्थिति’ में है और भविष्य में किसी भी तनाव के समय में देश मजबूत सुरक्षा बनाए रखेगा।

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रेटिंग एजेंसी ने और क्या कुछ कहा?

रेटिंग एजेंसी ने कहा, ‘घरेलू वित्त पोषण पर भारत की निर्भरता स्थानीय बाजारों की मजबूती और बेहतर भंडार से संतुलित होती है। हालांकि, भारत का अपेक्षाकृत उच्च ऋण बोझ और कमजोर राजकोषीय संतुलन लगातार झटकों से निपटने के लिए उपलब्ध गुंजाइश को सीमित करता है।’ इसमें कहा गया कि हाल के दबाव से पहले ही भारत ने स्थिरता को समर्थन देने वाले महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले लिए थे। मूडीज ने कहा कि पिछले पांच सालों में कई बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं ने ग्लोबल लेवल के कई बड़े झटकों को जोखिम उपाय बढ़ाए बिना और तेज वृद्धि या बाजार पहुंच खोए बिना सहन किया है। यह नीतिगत ढांचे में स्थायी सुधार, सुरक्षा उपायों और अनुकूल बाहरी परिस्थितियों को दर्शाता है। मूडीज ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं की अस्थिर वित्तीय परिस्थितियों में उनके वित्त पोषण लागत और बाजार पहुंच के आधार पर उनकी जुझारू क्षमता का आकलन किया।

दबाव के कौन से चार दौर का हुआ विश्लेषण?

इसमें भारत, इंडोनेशिया, मेक्सिको, मलेशिया, थाईलैंड, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया, तुर्किये और अर्जेंटीना जैसे बड़े उभरते बाजार देशों पर ध्यान केंद्रित किया गया। साथ ही दबाव के चार दौर का विश्लेषण किया गया। इनमें 2020 की शुरुआत में कोविड-19 वैश्विक महामारी की शुरुआत, 2022 में ग्लोबल मुद्रास्फीति में उछाल और उससे जुड़ा अमेरिकी फेडरल रिजर्व का कड़ा मॉनिटरी पॉलिसी रुख, 2023 की शुरुआत में अमेरिकी क्षेत्रीय बैंकिंग संकट और 2025 में नए सिरे से टैरिफ दबाव शामिल हैं।

भाषा इनपुट के साथ

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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