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  1. India-US trade deal: भारत को सतर्क रहने, सूझबूझ से काम करने की जरूरत, रघुराम राजन ने दिए ये सुझाव

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India-US trade deal: भारत को सतर्क रहने, सूझबूझ से काम करने की जरूरत, रघुराम राजन ने दिए ये सुझाव

Upstox

3 min read | अपडेटेड July 18, 2025, 17:56 IST

सारांश

India-US trade deal: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर इस सप्ताह वाशिंगटन में पांचवें दौर की बातचीत हुई है। भारत अमेरिकी प्रशासन की तरफ से अप्रैल में घोषित 26 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ को हटाए जाने की मांग कर रहा है।

India-US trade deal

रघुराम राजन ने कहा कि विकसित देश कृषि क्षेत्र को काफी सब्सिडी देते हैं और यह हमें ध्यान रखने की जरूरत है।

India-US trade deal: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर जारी बातचीत के दौरान भारत को खासकर कृषि क्षेत्र को लेकर ‘बहुत सतर्क’ रहने और ‘सूझबूझ’ के साथ काम करने की जरूरत है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक राजन ने कहा कि विकसित देश कृषि क्षेत्र को काफी सब्सिडी देते हैं और यह हमें ध्यान रखने की जरूरत है।
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कृषि उत्पादों के आयात से किसानों को हो सकता है नुकसान: राजन

उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि दर फिलहाल छह-सात फीसदी के दायरे में स्थिर हो गई है। हालांकि वैश्विक व्यापारिक अनिश्चितताओं के चलते इसमें थोड़ी गिरावट हो सकती है।

राजन ने कहा, ‘‘कृषि जैसे क्षेत्रों में व्यापार समझौते काफी जटिल हो जाते हैं क्योंकि हर देश अपने उत्पादकों को सब्सिडी देता है। भारत के उत्पादक अपेक्षाकृत छोटे हैं और उन्हें कम सब्सिडी मिलती है। ऐसे में यदि कृषि उत्पादों का निर्बाध आयात होने लगे तो इससे हमारे किसानों को नुकसान हो सकता है।’’

वाशिंगटन में पांचवें दौर की बातचीत

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर इस सप्ताह वाशिंगटन में पांचवें दौर की बातचीत हुई है। भारत अमेरिकी प्रशासन की तरफ से अप्रैल में घोषित 26 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ को हटाए जाने की मांग कर रहा है। इसके अलावा भारतीय इस्पात एवं एल्युमीनियम पर लगे 50 फीसदी और वाहनों पर 25 फीसदी शुल्क से राहत देने की मांग रखी गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारत के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौता इंडोनेशिया के साथ हुए समझौते की तर्ज पर ही होगा। इसका मतलब है कि कृषि क्षेत्र में आयात की अनुमति देना एक अहम मुद्दा बनने जा रहा है।

RBI गवर्नर ने दिए ये सुझाव

पूर्व RBI गवर्नर ने सुझाव दिया कि विकसित देशों से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को बढ़ावा देकर दुग्ध उत्पादों जैसे क्षेत्रों में मूल्यवर्धन को बढ़ाया जा सकता है, जिससे देश के दुग्ध उत्पादकों को फायदा होगा। राजन ने कहा, ‘‘इसके बजाय हमें यह नहीं कहना चाहिए कि हम अन्य देशों से अधिक दूध के आयात का स्वागत करते हैं, बल्कि हमें समझदारी से रणनीति बनानी चाहिए।’’

इस समय शिकागो बूथ (शिकागो विश्विद्यालय) में वित्त के प्रोफेसेर राजन ने कहा, "इस सबके लिए बहुत सतर्क रहने और बहुत सूझबूझ के साथ बात करने की जरूरत है। मुझे उम्मीद है कि हमारी सरकार के अधिकारी इसी काम में लगे हुए हैं।"

भारत का क्या है रुख?

दरअसल भारत ने कृषि और डेयरी उत्पादों को आयात रियायत दिए जाने की अमेरिकी मांग पर अपना रुख कड़ा किया हुआ है। भारत ने अब तक किसी भी व्यापार समझौते में अपने साझेदार को इन क्षेत्रों में टैरिफ में रियायतें नहीं दी हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अमेरिका की ओर से लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ के मुकाबले कुछ अधिक अवसर भी मिल सकते हैं। अगर अमेरिका द्वारा चीन या अन्य एशियाई देशों पर टैरिफ भारत से ज्यादा हैं, तो कुछ विनिर्माण गतिविधियां भारत का रुख कर सकती हैं।

राजन ने कहा कि भारत ने कुछ क्षेत्रों में संरक्षणवादी रवैया अपनाया है, लेकिन उन क्षेत्रों में उचित प्रतिस्पर्धा लाने और शुल्कों में कटौती से अर्थव्यवस्था को लाभ मिल सकता है।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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