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3 min read | अपडेटेड April 07, 2025, 18:45 IST
सारांश
भारत के कुल वस्तु निर्यात में अमेरिका का योगदान लगभग 18%, आयात में 6.22% और द्विपक्षीय व्यापार में 10.73% है। दूसरी ओर चीन की भारतीय निर्यात में हिस्सेदारी लगभग 4% और आयात में 15% है।

अमेरिका के जवाबी टैरिफ से निपटने का रास्ता बनाने में जुटा भारत
Ministry of Commerce यानी कि वाणिज्य मंत्रालय अमेरिकी टैरिफ वृद्धि के बीच निर्यातकों के लिए नए बाजारों की खोज में मदद करने की कोशिश करने के साथ ही चीन जैसे देशों से आयात में संभावित वृद्धि की निगरानी के लिए एक टास्क ग्रुप का गठन भी कर रहा है। सूत्र ने बताया कि वाणिज्य मंत्रालय निर्यातकों को सस्ती दरों पर लोन देने में समर्थन देने के लिए अपने निर्यात प्रमोशन मिशन की शुरुआत में भी तेजी ला रहा है। इसके अलावा यूरोपीय संघ, ओमान, न्यूजीलैंड और ब्रिटेन के साथ प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को लेकर बातचीत भी जारी है।
मंत्रालय ने संबंधित अधिकारियों को भारत से निर्यात को बढ़ावा देने के लिए ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चीन और फ्रांस जैसे 20 चिह्नित देशों के साथ द्विपक्षीय बैठकों की एक सीरीज आयोजित करने का निर्देश भी दिया है। निर्यात प्रमोशन के लिए चिह्नित देशों में ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, बांग्लादेश, चीन, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, इटली, जापान, नीदरलैंड, रूस, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, सऊदी अरब, दक्षिण कोरिया, तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन, अमेरिका और वियतनाम शामिल हैं। भारतीय निर्यातकों के लिए इन देशों में अपार अवसर हैं। ये घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आए हैं, जब निर्यातकों और उद्योगों ने अमेरिका द्वारा भारत पर अतिरिक्त 26% आयात शुल्क लगाए जाने से नुकसान की आशंका जताई है।
सरकार एमएसएमई निर्यातकों को आसान शर्तों पर लोन देने, उनके लिए फैक्टरिंग सेवाओं को मजबूत करके वैकल्पिक वित्तपोषण साधनों को बढ़ावा देने और अन्य देशों के गैर-शुल्क कदमों से निपटने के लिए सहायता प्रदान करने के लिए योजनाएं तैयार कर रही है। इन योजनाओं पर वाणिज्य, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और वित्त मंत्रालय काम कर रहे हैं। इन योजनाओं को वित्त वर्ष 2025-26 के केंद्रीय बजट में घोषित निर्यात प्रमोशन मिशन के तहत तैयार किया जा रहा है।
सरकार ने बजट में देश के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 2,250 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ एक निर्यात प्रमोशन मिशन शुरू करने की घोषणा की थी। उद्योग जगत ने यह भी चिंता जताई है कि चीन जैसे देश अपने एक्सपोर्ट सरप्लस का रुख भारत की तरफ कर सकते हैं। चीन को अमेरिका में 54% टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है।
सूत्रों ने कहा कि वाणिज्य मंत्रालय की जांच शाखा Directorate General of Trade Remedies (डीजीटीआर) को ऐसे आयातों पर ध्यान केंद्रित रखने के लिए कहा गया है। वित्त वर्ष 2023-24 में अमेरिका 119.71 अरब डॉलर मूल्य की वस्तुओं के द्विपक्षीय व्यापार के साथ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। वहीं चीन 118.39 अरब डॉलर के व्यापार के साथ भारत का दूसरा बड़ा व्यापारिक साझेदार था। भारत के कुल वस्तु निर्यात में अमेरिका का योगदान लगभग 18%, आयात में 6.22% और द्विपक्षीय व्यापार में 10.73% है। दूसरी ओर चीन की भारतीय निर्यात में हिस्सेदारी लगभग 4% और आयात में 15% है। ** (भाषा इनपुट के साथ)**
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