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3 min read | अपडेटेड March 28, 2025, 11:25 IST
सारांश
फाइनेंशियल ईयर में किसी भी समय कमरे का किराया 7,500 रुपये प्रतिदिन से अधिक वसूलने वाले होटल को अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए ‘निर्दिष्ट परिसर’ (specified premises) माना जाएगा।

भारतीय होटलों की रेस्तरां सर्विस को लेकर क्या बदला नियम
सेंट्रल बोर्ड ऑफ इंडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBIC) यानी कि केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड ने 27 मार्च को कहा कि फाइनेंशियल ईयर में किसी भी समय कमरे का किराया 7,500 रुपये प्रतिदिन से अधिक वसूलने वाले होटल को अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए ‘निर्दिष्ट परिसर’ (specified premises) माना जाएगा और ऐसे परिसरों के अंदर दी की जाने वाली रेस्तरां सर्विसेज पर इनपुट टैक्स क्रेडिट के साथ 18% जीएसटी लगेगा।
1 अप्रैल, 2025 से, ऐसे रेस्तरां जो होटलों के अंदर चलाए जाते हैं, उनकी करयोग्यता आपूर्ति के मूल्य (लेन-देन मूल्य) के आधार पर होगी। यह ‘घोषित शुल्क’ (डिक्लेयर्ड टैरिफ) की व्यवस्था की जगह लेगा। सीबीआईसी ने स्पेसीफाइड परिसर में रेस्तरां सर्विसेज को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, ‘1 अप्रैल, 2025 से शुरू होने वाले पीरियड के लिए, पिछले फाइनेंशियल ईयर में होटल में रहने का पैसा, यानी इसके लिए किया गया ट्रांजैक्शन, यह निर्धारित करने का आधार होगा कि होटल रहने की सर्विसेज देने वाला परिसर चालू फाइनेंशियल ईयर में अनिवार्य रूप से स्पेसीफाइड परिसर की कैटेगरी में आता है या नहीं।’
सीबीआईसी ने ‘स्पेसीफाइड परिसर’ को ऐसे परिसर के रूप में परिभाषित किया है, जहां से सप्लायर ने पिछले फाइनेंशियल ईयर में ‘होटल में रहने’ की सर्विस दी है और जिसमें रहने की किसी भी यूनिट की आपूर्ति का मूल्य 7,500 रुपये प्रति इकाई प्रति दिन या उससे अधिक है। ऐसी होटल के अंदर रेस्तरां सर्विसेज पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के साथ खुद ही 18% जीएसटी लगेगा। होटलों के अंदर रेस्तरां सर्विसेज जिनके कमरे का किराया पिछले फाइनेंशियल ईयर में 7,500 रुपये प्रति दिन से अधिक नहीं रहा है, उन पर आईटीसी के बिना 5% जीएसटी बना रहेगा।
साथ ही, जिस होटल की अगले फाइनेंशियल ईयर से कमरे का किराया 7,500 रुपये से अधिक वसूलने का प्लान है, वे चालू फाइनेंशियल ईयर की 1 जनवरी से 31 मार्च के बीच जीएसटी अधिकारियों के सामने ‘ऑप्ट इन’ यानी व्यवस्था में शामिल होने की घोषणा कर सकते हैं। साथ ही, नए रजिस्ट्रेशन की मांग करने वाले होटलों को उक्त परिसर को ‘स्पेसीफाइड परिसर’ घोषित करते हुए इसे प्राप्त करने के 15 दिन के अंदर इस व्यवस्था को अपनाने के बारे में जानकारी देनी होगी। सीबीआईसी ने कहा कि यह व्यवस्था होटल में रहने की सर्विस के सप्लायर को परिसर को ‘स्पेसीफाइड परिसर’ के रूप में घोषित करने का ऑप्शन भी देगी, ताकि परिसर में स्थित रेस्तरां, सर्विस की आपूर्ति पर 18% की दर के साथ आईटीसी का लाभ उठा सकें।
ईवाई टैक्स पार्टनर सौरभ अग्रवाल ने कहा कि अनुपालन को सरल बनाने के लिए, सीबीआईसी ने अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न जारी किए हैं। इसके जरिए साफ किया गया है किअगर पिछले वित्त वर्ष में होटल आवास का मूल्य 7,500 रुपये प्रति दिन से अधिक है, तो परिसर आईटीसी के साथ 18% जीएसटी के अधीन होगा। अगर मूल्य पिछले वित्त वर्ष में 7,500 रुपये से अधिक नहीं है, तो होटल खुद से ‘स्पेसीफाइड परिसर’ वर्गीकरण के लिए विकल्प चुन सकते हैं, घोषणा तब तक वैध रहेगी जब तक वे उससे बाहर निकलने का विकल्प नहीं चुनते हैं। अग्रवाल ने कहा, ‘इस व्यवस्था से वार्षिक फाइलिंग की आवश्यकता खत्म हो जाएगी। हर परिसर के लिए अलग-अलग घोषणाएं आवश्यक हैं और निर्दिष्ट परिसर के बाहर स्थित रेस्तरां के लिए, आईटीसी के बिना जीएसटी दर 5% है।’
(भाषा इनपुट के साथ)
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