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4 min read | अपडेटेड July 08, 2026, 08:32 IST
सारांश
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण 8 जुलाई 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें 3 पर्सेंट तक बढ़ गई हैं, जिससे दुनिया भर में महंगाई का डर फिर से बढ़ गया है।

बुलियन मार्केट में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। | Image: Shutterstock
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक और भारतीय बाजारों में अचानक भारी हलचल देखने को मिल रही है। 8 जुलाई को सोने और चांदी की कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव आने की पूरी आशंका बनी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच रात भर हुए ताजा सैन्य विवाद के बाद निवेशकों में चिंता काफी बढ़ गई है, जिसका सीधा असर कमोडिटी मार्केट पर देखने को मिल रहा है। इस तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई है, जिसने बाजार का पूरा मूड बदल दिया है।
दरअसल, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर हमला कर दिया था, जिसके जवाब में अमेरिकी सेना ने रात भर ईरान पर नए हवाई हमले किए हैं। इस बड़ी सैन्य कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच जारी अंतरिम शांति समझौता पूरी तरह खतरे में पड़ गया है, जो युद्ध को समाप्त करने के लिए किया गया था। इस नए तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में अचानक जोरदार तेजी आ गई है और यह 3 पर्सेंट तक उछल गया है। अमेरिकी WTI क्रूड ऑयल 3 पर्सेंट की बढ़त के साथ 72 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है, जबकि ब्रेंट क्रूड भी करीब 2.5 पर्सेंट की तेजी के साथ 76 डॉलर प्रति बैरल के नजदीक पहुंच गया है।
क्रूड ऑयल की कीमतों में आई इस अचानक तेजी की वजह से बाजार में एक बार फिर से महंगाई बढ़ने का बड़ा डर पैदा हो गया है। महंगाई की इसी चिंता के कारण सोने और चांदी के बाजारों में भी उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड यानी हाजिर सोना भारी उतार-चढ़ाव के साथ 4,120 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। वहीं स्पॉट सिल्वर भी 60 डॉलर प्रति औंस के करीब बनी हुई है। हालांकि कीमती धातुओं की इस चाल में फिलहाल हल्की सुस्ती देखी जा रही है, लेकिन भारतीय बाजार यानी एमसीएक्स पर सोने और चांदी की कीमतें इस वैश्विक ट्रेंड का पालन कर सकती हैं या इनमें एक बार फिर गिरावट भी देखने को मिल सकती है। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से सोने-चांदी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं, क्योंकि डॉलर इंडेक्स बढ़कर 101.12 के ऊपर चला गया है।
बाजार के बड़े निवेशक इस समय अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की जून में हुई मीटिंग के मिनट्स का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। जून की मीटिंग में फेडरल रिजर्व का रुख काफी सख्त रहा था, इसलिए निवेशक अब आने वाले मिनट्स से यह समझने की कोशिश करेंगे कि फ्यूचर में ब्याज दरों को लेकर बैंक की क्या पॉलिसी रहने वाली है। तेल की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई बढ़ने की आशंका से सितंबर महीने में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना काफी बढ़ गई है। बाजार में अब सितंबर में ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावना 50 पर्सेंट तक आंकी जा रही है, जो कि एक दिन पहले तक केवल 46 पर्सेंट थी।
इस बीच, ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को जारी डेटा से पता चला है कि मई महीने में अमेरिका का व्यापार घाटा बढ़कर 77.6 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। यह मार्च 2025 के बाद का सबसे बड़ा व्यापार घाटा दर्ज किया गया है, जिसने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। दूसरी तरफ, घरेलू बाजार में इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन यानी आईबीजेए द्वारा 7 जुलाई की शाम को जारी किए गए सोने के रिटेल बिक्री रेट्स के मुताबिक, फाइन गोल्ड का रेट 14,408 रुपये रहा। इसके अलावा 22 कैरेट सोने की कीमत 14,063 रुपये, 20 कैरेट सोने की कीमत 12,823 रुपये और 18 कैरेट सोने की कीमत 11,671 रुपये दर्ज की गई है। वैश्विक हालातों को देखते हुए आने वाले दिनों में इन कीमतों में और बदलाव हो सकता है।
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