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4 min read | अपडेटेड June 02, 2026, 08:35 IST
सारांश
सोने और चांदी की कीमतों में वैश्विक हलचल का असर साफ दिख रहा है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में 3 पर्सेंट से ज्यादा की तेजी आने के बाद सोने पर दबाव बढ़ गया है। दिल्ली में 24 कैरेट सोना 1,59,230 रुपये और मुंबई में 1,59,510 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेंड कर रहा है।

सोने-चांदी की कीमतों का हाल क्या है? Image: Shutterstock
सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी के कारण सोने-चांदी के दामों पर दबाव बनता दिख रहा है। इस बीच देश के दो सबसे बड़े महानगरों दिल्ली और मुंबई में सोने और चांदी के नए रेट जारी कर दिए गए हैं। सोमवार को कच्चे तेल के दामों में हुई 3 पर्सेंट से ज्यादा की बढ़ोतरी ने निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी है कि दुनिया भर के सेंट्रल बैंक महंगाई पर काबू पाने के लिए अपनी मॉनेटरी पॉलिसी को सख्त रख सकते हैं। आमतौर पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सोने की कीमतों पर नेगेटिव असर पड़ता है क्योंकि सोने पर निवेशकों को कोई अलग से यील्ड यानी ब्याज नहीं मिलता है।
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 1 जून को 24 कैरेट सोने का भाव 1,59,510 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया है। वहीं जेवर बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने की कीमत मुंबई के बाजार में 1,46,218 रुपये प्रति 10 ग्राम पर चल रही है। देश की राजधानी नई दिल्ली की बात करें तो यहां 24 कैरेट सोने का रेट 1,59,230 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। इसके साथ ही दिल्ली में 22 कैरेट सोने की कीमत 1,45,961 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। इस तरह दोनों ही बड़े शहरों में सोने की कीमतों में मामूली अंतर देखा जा रहा है।
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी बदलाव देखा गया है। मुंबई में 999 प्योरिटी वाली एक किलोग्राम चांदी का भाव 2,66,760 रुपये पर पहुंच गया है। वहीं नई दिल्ली के सर्राफा बाजार में इसी प्योरिटी की एक किलोग्राम चांदी की कीमत 2,66,300 रुपये तय की गई है। चांदी के दामों में आई इस नरमी का सीधा संबंध ग्लोबल मार्केट में हो रही उथल-पुथल से है। फेडरल रिजर्व की वाइस चेयर मिशेल बोमन ने भी हाल ही में कहा था कि मिडल ईस्ट के संकट का आर्थिक असर महंगाई को बढ़ा सकता है, जिससे निपटने के लिए सख्त मॉनेटरी पॉलिसी की जरूरत पड़ सकती है।
बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच निवेशक इस बात को लेकर उलझन में हैं कि क्या सोने में चल रही पुरानी तेजी फिर से वापस आएगी। इस पर मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा उतार-चढ़ाव के खत्म होने के बाद सोने में दोबारा बंपर तेजी देखने को मिल सकती है। सक्सो बैंक के विश्लेषक ओले हैनसेन का कहना है कि जैसे ही जियोपॉलिटिकल सिचुएशन यानी भू-राजनीतिक हालात स्थिर होंगे और एनर्जी संकट का असर कम होने लगेगा, वैसे ही निवेशकों का पूरा ध्यान उन स्ट्रक्चरल कारणों पर वापस लौट आएगा जिन्होंने पिछले कुछ समय में सोने के बाजार को मजबूत सहारा दिया है।
लॉन्ग टर्म के लिहाज से देखें तो मार्केट पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट्स सोने के फ्यूचर को लेकर काफी पॉजिटिव नजर आ रहे हैं। केसीएम ट्रेड के चीफ मार्केट एनालिस्ट टिम वाटरर के मुताबिक, साल 2026 के अंत तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 5,500 डॉलर के बड़े स्तर को भी छूने की पूरी क्षमता रखता है। हालांकि, इसके लिए कुछ अनुकूल परिस्थितियां होना बेहद जरूरी है, जैसे कि कच्चे तेल की कीमतों में कमी आना और डॉलर के मूल्य में गिरावट होना। इसके अलावा दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों द्वारा सोने की लगातार की जा रही भारी खरीदारी और महंगाई के खिलाफ एक सुरक्षित इनवेस्टमेंट के रूप में सोने की भूमिका इसके फ्यूचर को और भी ज्यादा मजबूत बनाती है।
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