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  1. सोने-चांदी की चमक फीकी, रिकॉर्ड स्तर से 24% टूटा गोल्ड, सिल्वर 47% लुढ़की, इन फैक्टर्स पर टिकी नजर

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सोने-चांदी की चमक फीकी, रिकॉर्ड स्तर से 24% टूटा गोल्ड, सिल्वर 47% लुढ़की, इन फैक्टर्स पर टिकी नजर

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड June 24, 2026, 18:51 IST

सारांश

Gold-Silver Price: इस साल की शुरुआत में सोना और चांदी दोनों ने रिकॉर्ड स्तर छुए थे। सोना 5,417 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया था, लेकिन वहां से करीब 24 फीसदी गिर चुका है। वहीं चांदी जनवरी में 117 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी और उसके बाद लगभग 47 फीसदी टूट चुकी है।

Gold-Silver Price

Gold-Silver Price: गिरावट से पहले दोनों कीमती धातुओं ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया था।

Gold-Silver Price: सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है। आज मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना 3.40 फीसदी की गिरावट के साथ 141460 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर आ गया। दूसरी तरफ चांदी में भी आज MCX पर 3.69 फीसदी की गिरावट नजर आई और यह 217346 रुपये प्रति किलो के स्तर पर ट्रेड करता दिखा। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी सोना 3.76 फीसदी गिरकर 3,979.59 डॉलर प्रति औंस पर था। वहीं चांदी तो 5.34 फीसदी टूटकर 58.48 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।
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रिकॉर्ड ऊंचाई से काफी नीचे आए भाव

इस साल की शुरुआत में सोना और चांदी दोनों ने रिकॉर्ड स्तर छुए थे। सोना 5,417 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया था, लेकिन वहां से करीब 24 फीसदी गिर चुका है। वहीं चांदी जनवरी में 117 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी और उसके बाद लगभग 47 फीसदी टूट चुकी है।

पिछले दो सालों में जबरदस्त तेजी देखी गई थी

गिरावट से पहले दोनों कीमती धातुओं ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया था। 2025 में सोना 65 फीसदी से ज्यादा चढ़ा था और 2024 में इसमें 28 फीसदी की तेजी आई थी। वहीं चांदी ने 2025 में 148 फीसदी और 2024 में 22 फीसदी का रिटर्न दिया था। इसी वजह से मौजूदा गिरावट को कई विशेषज्ञ मुनाफावसूली और बाजार की बदलती परिस्थितियों का असर भी मान रहे हैं।

क्यों टूट रहे हैं सोना और चांदी?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक सोना और चांदी पर सबसे बड़ा दबाव मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड्स का है। जब अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तब निवेशकों को सरकारी बॉन्ड जैसे साधनों में बेहतर रिटर्न मिलता है। चूंकि सोना और चांदी कोई ब्याज नहीं देते, इसलिए उनकी आकर्षण कम हो जाती है।

इसके अलावा अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने हालिया बैठक में ब्याज दरों को भले ही नहीं बदला, लेकिन आगे सख्ती बरतने के संकेत दिए हैं। फेड चेयरमैन के सख्त रुख ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है, जिससे डॉलर मजबूत हुआ और कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ गया।

मध्य पूर्व तनाव कम होने का भी असर

अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच समझौते के बाद मध्य पूर्व में तनाव कुछ कम हुआ है। इससे सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में सोने की मांग भी कमजोर पड़ी है। साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने भी सोने-चांदी को सहारा नहीं दिया।

आगे ये फैक्टर्स रहेंगे अहम

एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक अमेरिकी डॉलर मजबूत बना रहता है और फेड का रुख सख्त रहता है, तब तक सोना और चांदी दबाव में रह सकते हैं। निवेशकों की नजर अब अमेरिका के पर्सनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर (PCE) महंगाई आंकड़ों पर रहेगी, क्योंकि इन्हीं आंकड़ों से आगे ब्याज दरों की दिशा तय होने के संकेत मिल सकते हैं।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

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