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4 min read | अपडेटेड October 31, 2025, 09:30 IST
सारांश
Gold Price Today 31 Oct: गुरुवार को सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट आई। फेडरल रिजर्व की तीखी टिप्पणी और अमेरिका-चीन ट्रेड डील की उम्मीद से डालर मजबूत हुआ, जिसने सोने को सस्ता कर दिया। हालांकि, इस गिरावट के बीच चांदी की कीमतों में 3,300 रुपये का बड़ा उछाल देखा गया।

दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई।
गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में 1,000 रुपये की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट अमेरिकी फेडरल रिजर्व के बयानों और अमेरिका-चीन व्यापार वार्ता में पॉजिटिव संकेतों के बाद आई।
हालांकि, बाजार में एक हैरान करने वाला रुख भी देखने को मिला। जहां सोना सस्ता हुआ, वहीं चांदी की कीमतों में 3,300 रुपये का जबरदस्त उछाल आ गया। आइए इस पूरी खबर को विस्तार से समझते हैं।
अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, गुरुवार को दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में तेज गिरावट आई। 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 1,000 रुपये गिरकर 1,22,800 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) रह गई। बुधवार को इसका बंद भाव 1,23,800 रुपये प्रति 10 ग्राम था। स्थानीय सर्राफा बाजार में, पिछले कारोबारी सत्र में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 1,24,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। सोने में आई इस गिरावट के पीछे दो बड़े अंतरराष्ट्रीय कारण हैं।
सोने की कीमत गिरने का पहला और सबसे बड़ा कारण अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व का बयान है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) सौमिल गांधी ने बताया कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने उम्मीद के मुताबिक ब्याज दरों में एक चौथाई अंक की कटौती की। लेकिन इसके बाद फेडरल रिजर्व के प्रमुख जेरोम पावेल ने जो बयान दिया, उसने बाजार की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
पावेल ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीखी टिप्पणियां कीं। उन्होंने संकेत दिया कि आगामी दिसंबर की बैठक में दरों में एक और कटौती की बाजार की उम्मीदें जल्दबाजी वाली हो सकती हैं। यानी, फेडरल रिजर्व अब ब्याज दरें घटाने में जल्दबाजी नहीं करेगा। इस बयान के आते ही अमेरिकी बांड यील्ड और डॉलर में मजबूती आ गई। डॉलर के मजबूत होने से सोने पर दबाव बढ़ता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना डॉलर में खरीदा-बेचा जाता है।
सोने की कीमतें गिरने का दूसरा बड़ा कारण अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव का कम होना है। विश्लेषकों के अनुसार, जब भी दुनिया में तनाव या अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक सोने को 'सुरक्षित निवेश' (सेफ हेवन) मानकर उसमें पैसा लगाते हैं।
लेकिन गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ एक संभावित व्यापार समझौते पर सकारात्मक टिप्पणी की। इससे वाशिंगटन और चीन के बीच तनाव कम होने के संकेत मिले। जैसे ही यह खबर आई, सोने की सुरक्षित निवेश की अपील कम हो गई और निवेशकों ने सोने से पैसा निकालना शुरू कर दिया, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ा।
सोने के बिल्कुल उलटा, चांदी की कीमतों में गुरुवार को आग लग गई। चांदी की कीमतें 3,300 रुपये प्रति किलोग्राम की भारी तेजी के साथ 1,55,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) हो गईं। सर्राफा संघ के अनुसार, बुधवार को चांदी की कीमत 1,51,700 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। बाजार विशेषज्ञ चांदी में इस उछाल को औद्योगिक मांग में बढ़ोतरी के तौर पर देख रहे हैं।
घरेलू बाजार के विपरीत, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोने में चार दिन की गिरावट का सिलसिला थम गया। विदेशी बाजार में हाजिर सोना 1.36 प्रतिशत की तेजी के साथ 3,983.87 डालर प्रति औंस हो गया। वहीं, विदेशी बाजारों में हाजिर चांदी 1.21 प्रतिशत बढ़कर 48.14 डालर प्रति औंस पर पहुंच गई।
इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डालर की मजबूती को दर्शाने वाला डालर सूचकांक 0.12 प्रतिशत बढ़कर 99.34 डालर पर पहुंच गया, जिसने घरेलू बाजार में सोने पर दबाव डाला। विशेषज्ञों का कहना है कि व्यापारी अब सर्राफा की दिशा पर स्पष्टता के लिए फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के भाषणों से और संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।
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