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सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़कर हुई 15%, अब ज्वेलरी खरीदना होगा महंगा, जानिए इंडस्ट्री का हाल

Upstox

3 min read | अपडेटेड May 13, 2026, 14:54 IST

सारांश

सरकार ने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सोने पर टैक्स में भारी बढ़ोतरी की है। इससे सोने की कीमतों में प्रति 10 ग्राम करीब 27,000 रुपये का इजाफा हो सकता है। ज्वेलरी एक्सपोर्टर्स और छोटे मैन्युफैक्चरर्स के लिए वर्किंग कैपिटल की कमी एक बड़ी चुनौती बन गई है।

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सरकार ने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सोने पर टैक्स में भारी बढ़ोतरी की है। | Image: Shutterstock

भारत सरकार ने सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी में भारी बढ़ोतरी करते हुए इसे 6 पर्सेंट से सीधे 15 पर्सेंट कर दिया है। 13 मई से प्रभावी हुए इस फैसले के बाद ज्वेलरी मार्केट में खलबली मच गई है। एक्सपोर्टर्स और ज्वेलरी काउंसिल का मानना है कि इस कदम से आने वाले समय में इंडस्ट्री को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है और तस्करी जैसे खतरे बढ़ सकते हैं।

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ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी काउंसिल (GJC) के चेयरमैन राजेश रोकड़े के मुताबिक, इस ड्यूटी बढ़ोतरी के बाद सोने की कीमतों में बड़ा उछाल आएगा। टैक्स और सेस मिलाकर सोना करीब 27,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक महंगा हो सकता है। उनका कहना है कि इस फैसले से ग्रे मार्केट यानी अवैध बाजार को बढ़ावा मिल सकता है और देश में तस्करी का खतरा बढ़ जाएगा, जो एक पैरेलल इकोनॉमी खडी कर सकता है। कारोबारियों को डर है कि इससे बाजार में अनिश्चितता का माहौल पैदा होगा।

छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा बुरा असर

इस पॉलिसी का सबसे गंभीर असर छोटे और मध्यम दर्जे के यानी MSME मैन्युफैक्चरर्स पर पड़ने की आशंका है। ये कारोबारी ज्वेलरी इंडस्ट्री की रीढ़ माने जाते हैं और फिलहाल कैश यानी लिक्विडिटी की भारी कमी से जूझ रहे हैं। ड्यूटी बढ़ने से उनकी वर्किंग कैपिटल फंस जाएगी और उनके लिए अपना बिजनेस चलाना और भी मुश्किल हो जाएगा। एक्सपोर्टर्स का कहना है कि बैंक गारंटी और अन्य खर्चों की वजह से उनके लिए ग्लोबल मार्केट में मुकाबला करना भी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

सरकार का बड़ा फैसला और मजबूरी

सरकार ने यह कदम पश्चिम एशिया के संकट की वजह से बढ़ते इंपोर्ट बिल और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे दबाव को कम करने के लिए उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोना खरीदने में कमी लाने और बचत करने की अपील की है। आंकड़ों की बात करें तो 2025-26 में भारत का गोल्ड इंपोर्ट 71.98 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, जिसने सरकार की चिंता बढ़ा दी थी। इसी को कंट्रोल करने के लिए 13 मई से एग्री सेस और अन्य शुल्कों में बदलाव किया गया है।

जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के चेयरमैन किरीट भंसाली ने कहा है कि उनकी संस्था 'नेशन फर्स्ट' यानी देश पहले की भावना के साथ खड़ी है। इंडस्ट्री अब ग्राहकों को कम कैरेट वाली ज्वेलरी और पुरानी ज्वेलरी के बदले नई ज्वेलरी लेने के लिए प्रोत्साहित करेगी। हालांकि, काउंसिल का यह भी मानना है कि टैक्स बढ़ाने से इंपोर्ट कम नहीं होता, बल्कि सिर्फ कीमतें बढ़ती हैं। उन्होंने सरकार से बातचीत के जरिए कोई ऐसा रास्ता निकालने की अपील की है जिससे एक्सपोर्ट की ग्रोथ पर असर न पड़े।

ज्वेलरी इंडस्ट्री के तमाम संगठन आज मुंबई में एक बड़ी मीटिंग कर रहे हैं। इस मीटिंग में सरकार के इस फैसले के असर और फ्यूचर की प्लानिंग पर चर्चा की जाएगी। काउंसिल के पदाधिकारियों का कहना है कि वे सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं ताकि कारीगरों, व्यापारियों और ग्राहकों के हितों की रक्षा की जा सके। व्यापार जगत को शांत और कॉन्फिडेंट रहने की सलाह दी गई है क्योंकि इंडियन ज्वेलरी सेक्टर हमेशा मुश्किल समय में मजबूती से वापसी करता रहा है।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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