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4 min read | अपडेटेड April 30, 2026, 07:42 IST
सारांश
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया है। दरों को 3.5 पर्सेंट से 3.75 पर्सेंट की रेंज में स्थिर रखा गया है। यह 2026 में लगातार तीसरा मौका है जब दरों को नहीं छेड़ा गया है। जेरोम पॉवेल की यह आखिरी मीटिंग थी।

Fed ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।
अमेरिका के केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व ने बुधवार को एक बहुत बड़ा फैसला लेते हुए अपनी बेंचमार्क ब्याज दरों में कोई भी बदलाव नहीं करने का ऐलान किया है। साल 2026 के दौरान यह लगातार तीसरी बार है जब केंद्रीय बैंक ने दरों को जस का तस रखा है। यह फैसला एक ऐसे समय में लिया गया है जब अमेरिकी अर्थव्यवस्था कई तरह की परेशानियों से जूझ रही है। एक तरफ ईरान के साथ युद्ध के हालात बने हुए हैं, तो दूसरी तरफ नौकरियों के बाजार में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। इन सब वजहों से अमेरिका में महंगाई भी तेजी से बढ़ रही है। इन्हीं हालातों को देखते हुए फेडरल रिजर्व ने फिलहाल पुरानी स्थिति को ही बनाए रखने का मन बनाया है।
फेडरल रिजर्व ने फेडरल फंड्स रेट को उसकी मौजूदा सीमा यानी 3.5 पर्सेंट से 3.75 पर्सेंट पर ही बनाए रखने का फैसला किया है। यह वही ब्याज दर होती है जो बैंक आपस में शॉर्ट टर्म लोन के लिए एक दूसरे से लेते हैं। बाजार के जानकारों और निवेशकों को पहले से ही इस बात की पूरी उम्मीद थी कि इस बार भी दरों में किसी तरह की कटौती या बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। एक्सपर्ट्स के टूल्स ने भी पहले ही यह साफ कर दिया था कि बैंक के अधिकारी मौजूदा दर को ही आगे भी जारी रखेंगे। दरों को स्थिर रखने का यह कदम अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाने की एक कोशिश माना जा रहा है।
बुधवार को हुई यह मीटिंग फेडरल रिजर्व के चेयरमैन के तौर पर जेरोम पॉवेल की आखिरी मीटिंग थी। उन्होंने इस बेहद महत्वपूर्ण पद पर पूरे आठ साल का लंबा समय बिताया है। पॉवेल का कार्यकाल इसी महीने 15 मई को पूरा होने वाला है। उनकी विदाई से पहले ही अमेरिका के अगले फेड चीफ को लेकर हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पद के लिए केविन वारश को चुना है और उनके नाम का नामांकन भी कर दिया है। सीनेट बैंकिंग कमेटी ने भी उनके नाम को आगे बढ़ाने के लिए अपना वोट दे दिया है। इसके बाद अब केविन वारश अगले महीने पॉवेल की जगह लेने के और भी करीब पहुंच गए हैं।
केविन वारश एक ऐसे समय में फेडरल रिजर्व की कमान संभालने जा रहे हैं जब देश की अर्थव्यवस्था पर काफी ज्यादा दबाव है। एक तरफ राष्ट्रपति ट्रंप लगातार मांग कर रहे हैं कि ब्याज दरों में कटौती की जानी चाहिए ताकि बाजार में पैसा बढ़े। वहीं दूसरी तरफ महंगाई के आंकड़े काफी डराने वाले हैं। पिछले महीने ही अमेरिका में महंगाई दर अपने पिछले दो साल के सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गई थी। फेडरल रिजर्व के सामने सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि अगर वह ब्याज दरों में कटौती करता है, तो इससे बाजार में नकदी बढ़ेगी और महंगाई और भी ज्यादा आउट ऑफ कंट्रोल हो सकती है।
कब तक हो सकती है ब्याज दरों में कटौती?
ब्याज दरों में राहत मिलने की उम्मीद फिलहाल काफी कम नजर आ रही है। ईरान युद्ध और घरेलू बाजार के बिगड़े हालातों को देखते हुए फेडरल रिजर्व अब बहुत ही संभलकर कदम उठा रहा है। कई बड़े अर्थशास्त्रियों का मानना है कि महंगाई के मौजूदा स्तर को देखते हुए बैंक जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेगा। जानकारों के मुताबिक, फेडरल रिजर्व साल 2026 के अंत तक या शायद 2027 की शुरुआत तक भी ब्याज दरों में कोई कटौती करने से बच सकता है। फिलहाल पूरा जोर महंगाई पर लगाम लगाने और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने पर दिया जा रहा है। आने वाले महीनों में केविन वारश की नीतियां यह तय करेंगी कि अमेरिकी बाजार किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
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