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3 min read | अपडेटेड June 10, 2025, 12:55 IST
सारांश
Foreign Direct Investment (FDI) ट्रेंड में गिरावट को लेकर काफी बातें हो रही हैं। हालांकि पीयूष गोयल का मानना है कि ऐसा कुछ नहीं है और ऐसे बदलाव आते-जाते रहते हैं। उन्होंने FDI को लेकर कुछ अहम डेटा भी शेयर किए हैं।

एफडीआई ट्रेंड में कोई गिरावट नहींः पीयूष गोयल
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का मानना है कि भारत में Foreign Direct Investment (FDI) यानी कि विदेशी प्रत्यक्ष निवेश में कोई गिरावट की प्रवृत्ति नहीं है, हालांकि पीरियॉडिक उतार-चढ़ाव कभी-कभी ग्लोबल इंटरेस्ट रेट में बदलाव के कारण हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारत में नए सिरे से विदेशी पूंजी प्रवाह (Foreign capital flow) देखने को मिला है। साथ ही सरकार सुझावों के लिए तैयार है और देश में एफडीआई को बढ़ावा देने के लिए नए उपायों को अपनाएगी। गौरतलब है कि पिछले 11 फाइनेंशियल ईयर्स (2014-25) में भारत ने 748.78 अरब अमेरिकी डॉलर के एफडीआई को आकर्षित किया, जो पिछले 11 साल (2003-14) में 143% की वृद्धि दर्शाता है।
इसके अलावा, एफडीआई के स्रोत देशों की संख्या 2013-14 में 89 से बढ़कर 2024-25 में 112 हो गई, जो भारत की बढ़ती ग्लोबल अपील को इन्वेस्टमेंट डेस्टीनेशन के रूप में दर्शाती है। गोयल ने कहा, ‘इन आंकड़ों को देखते हुए, मुझे नहीं लगता कि कोई गिरावट की प्रवृत्ति है, समय-समय पर कुछ बदलाव हो सकते हैं और ऐसा अन्य देशों में इंटरेस्ट रेट साइकलों में बदलाव के कारण होता है। इसलिए अगर कुछ देशों में बॉण्ड प्रतिफल अधिक हो जाता है, तो पैसा उन देशों में प्रवाहित होता है। हमने एक बार फिर भारत में पैसा वापस आते देखा है।’
उन्होंने कहा कि 2024-25 में भारत को कुल 81 अरब अमेरिकी डॉलर का एफडीआई हासिल हुआ, जो पिछले तीन सालों में सबसे अधिक है। गोयल ने कहा कि 81 अरब अमेरिकी डॉलर के साथ भारत एफडीआई वृद्धि के पथ पर वापस आ गया है। उन्होंने कहा, ‘हम एक ऐसी सरकार हैं जो (सुझाव) सुनती है। हम सुझावों के लिए तैयार हैं और हम हमेशा नए उपाय अपनाने के लिए तैयार हैं।’
वाणिज्य और उद्योग मंत्री, स्विट्जरलैंड के नेताओं और कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करने के लिए आधिकारिक यात्रा पर यहां पहुंचे हैं। इसका यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार एवं निवेश को बढ़ावा देना है। फाइनेंशियल ईयर 2021-22 में सबसे ज्यादा 84.83 अरब अमेरिकी डॉलर का एफडीआई हासिल हुआ था। भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 2024-25 की जनवरी-मार्च तिमाही में सालाना आधार पर 24.5 प्रतिशत घटकर 9.34 अरब डॉलर रह गया, लेकिन ओवरऑल फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में यह 13% बढ़कर 50 अरब डॉलर रहा था।
फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में सिंगापुर 14.94 अरब अमेरिकी डॉलर के प्रवाह के साथ एफडीआई का सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरा। इसके बाद मॉरीशस (8.34 अरब अमेरिकी डॉलर), अमेरिका (5.45 अरब अमेरिकी डॉलर), नीदरलैंड (4.62 अरब अमेरिकी डॉलर), संयुक्त अरब अमीरात(3.12 अरब अमेरिकी डॉलर), जापान (2.47 अरब अमेरिकी डॉलर), साइप्रस (1.2 अरब अमेरिकी डॉलर), ब्रिटेन (79.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर), जर्मनी (46.9 करोड़ अमेरिकी डॉलर) और केमैन आइलैंड्स (37.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर) का स्थान रहा। सेक्टर्स की बात करें तो सर्विस, ट्रेड, टेलीकॉम, मोटर वेहिकल, मैनुफैक्चरिंग ग्रोथ, गैर-परम्परागत ऊर्जा और केमिकल सेक्टर में इन्वेस्टमेंट बढ़ी।
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