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3 min read | अपडेटेड May 28, 2025, 06:35 IST
सारांश
देश में फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के जनवरी-मार्च क्वार्टर में सालाना आधार पर FDI में 24.5% की गिरावट देखने को मिली और यह 9.34 अरब डॉलर रह गया। हालांकि, पूरे फाइनेंशियल ईयर (2024-25) के दौरान देश में FDI का इनफ्लो 13% बढ़कर 50 अरब डॉलर हो गया।

FY25 में FDI में दिखी 14% की रिकॉर्ड तेजी
Foreign Direct Investment (FDI) का रोल भारतीय अर्थव्यवस्था में काफी अहम माना जाता है। देश में फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के जनवरी-मार्च क्वार्टर में सालाना आधार पर FDI में 24.5% की गिरावट देखने को मिली और यह 9.34 अरब डॉलर रह गया। मंगलवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। हालांकि, पूरे फाइनेंशियल ईयर (2024-25) के दौरान देश में FDI का फ्लो 13% बढ़कर 50 अरब डॉलर हो गया। फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में यह 44.42 अरब डॉलर था। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मार्च क्वार्टर में एफडीआई का फ्लो 9.34 अरब डॉलर रहा जो जनवरी-मार्च 2023-24 के दौरान आए 12.38 अरब डॉलर एफडीआई से कम है।
पिछले फाइनेंशियल ईयर के अक्टूबर-दिसंबर क्वार्टर में भी ग्लोबल आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण एफडीआई फ्लो सालाना आधार पर 5.6% घटकर 10.9 अरब डॉलर रहा था। फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के दौरान कुल एफडीआई 14% बढ़कर 81.04 अरब डॉलर हो गया। यह पिछले तीन सालों में सबसे अधिक है। फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में यह 71.3 अरब डॉलर रहा था। कुल एफडीआई में इक्विटी फ्लो, दोबारा निवेश की गई इनकम और अन्य कैपिटल शामिल होते हैं।
फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के दौरान सिंगापुर 14.94 अरब डॉलर फ्लो के साथ एफडीआई का सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरा। इसके बाद मॉरीशस (8.34 अरब डॉलर), अमेरिका (5.45 अरब डॉलर), नीदरलैंड (4.62 अरब डॉलर), यूएई (3.12 अरब डॉलर), जापान (2.47 अरब डॉलर), साइप्रस (1.2 अरब डॉलर), ब्रिटेन (79.5 करोड़ डॉलर), जर्मनी (46.9 करोड़ डॉलर) और केमैन आइलैंड्स (37.1 करोड़ डॉलर) का स्थान रहा।
हालांकि, इन आंकड़ों से पता चलता है कि फाइनेंशियल ईयर 2023-24 के मुकाबले 2024-25 में नीदरलैंड, जापान, ब्रिटेन और जर्मनी से आने वाले एफडीआई में कमी आई है। भारत में आने वाले एफडीआई में सिंगापुर की हिस्सेदारी 30%, मॉरीशस की 17% और अमेरिका की 11% है। सेक्टर वाइज डेटा के हिसाब से सर्विस, बिजनेस, टेलिकॉम, गाड़ियों, मैनुफैक्चरिंग डेवलपमेंट, गैर-पारंपरिक ऊर्जा और रसायनों में एफडीआई फ्लो बढ़ा। हालांकि, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर, निर्माण (बुनियादी ढांचा गतिविधियां) और दवा क्षेत्रों में एफडीआई घटा है।
आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 के दौरान सेवा खंड में एफडीआई बढ़कर 9.34 अरब डॉलर हो गया जबकि 2023-24 में यह 6.64 अरब डॉलर था। गैर-पारंपरिक ऊर्जा में एफडीआई प्रवाह 2023-24 में 3.76 अरब डॉलर था जो पिछले फाइनेंशियल ईयर में बढ़कर चार अरब डॉलर हो गया। आंकड़ों से पता चला है कि फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में महाराष्ट्र को सबसे अधिक 19.6 अरब डॉलर का एफडीआई हासिल हुआ। इसके बाद कर्नाटक (6.61 अरब डॉलर), दिल्ली (छह अरब डॉलर), गुजरात (लगभग 5.7 अरब डॉलर), तमिलनाडु (3.68 अरब डॉलर), हरियाणा (3.14 अरब डॉलर) और तेलंगाना (2.99 अरब डॉलर) का स्थान रहा। कुल एफडीआई इक्विटी फ्लो में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी सबसे अधिक 39% रही जबकि कर्नाटक की 13% और दिल्ली की 12% हिस्सेदारी रही।
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