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Monetary Policy: कल आएगा मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी का फैसला, रिजर्व बैंक से क्यों है रेपो रेट घटाने की उम्मीद?

Upstox

4 min read | अपडेटेड February 06, 2025, 12:34 IST

सारांश

Repo Rate Cut by RBI MPC: गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार, 7 फरवरी को रेपो रेट कटौती को लेकर मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी के फैसले का ऐलान करेंगे। लंबे वक्त से कमिटी ने ब्याज दरों में कटौती नहीं की है।

आखिरी बार साल 2020 में की थी रेपो रेट में कटौती

आखिरी बार साल 2020 में की थी रेपो रेट में कटौती

भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (Monetary Policy Committee, MPC) की बैठक शुक्रवार, 7 फरवरी को खत्म हो जाएगी। शुक्रवार सुबह 10 बजे RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा मॉनिटरी पॉलिसी स्टेटमेंट जारी करेंगे। माना जा रहा है कि इसमें रेपो रेट (Repo Rate) को 25 बेसिस पॉइंट (bps) घटाकर 6.25% पर लाने का ऐलान किया जा सकता है।

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अगर ऐसा होता है तो यह लंबे वक्त के बाद ब्याज दर की कटौती होगी। कमिटी ने इसके पहले लगातार 11 बार इसे बरकरार रखने का फैसला किया है। 6 सदस्यों वाली पॉलिसी कमिटी की बैठक बुधवार, 6 फरवरी को शुरू हुई थी। गवर्नर संजय मल्होत्रा के पदभार संभालने के बाद यह पहली MPC है। मल्होत्रा ने पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास की जगह ली है।

ब्याज दर में कटौती से फायदा

रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर कोई केंद्रीय बैंक, (भारत में RBI) कमर्शल बैंकों को फंड्स की कमी पड़ने पर पैसे देती है। वित्त सचिव तुहीन कांत पांडेय ने मंगलवार को कहा था कि सरकार ने फिस्कल डेफिसिट को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं और अब MPC को आर्थिक वृद्धि को बल देने के लिए ब्याज दर में कटौती पर फैसला करना है। पांडेय ने कहा था कि अगर महंगाई को नियंत्रित किया जाता है तो मॉनिटरी पॉलिसी में ढील से और भी फायदा हो सकता है।

आखिरी बार कब घटाया था?

महंगाई दर फिलहाल रिजर्व बैंक के दायरे में ही है लेकिन रुपये में हो रहा बदलाव चिंता का सबब बना हुआ है। ऐसे में MPC के फैसले पर निगाहें टिकी हुई हैं। रिजर्व बैंक ने आखिरी बार मई 2020 में रेपो रेट को 40 बेसिस पॉइंट्स से घटाकर 4% किया था। कोविड-19 की महामारी के दौरान लॉकडाउन को देखते हुए अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए ऐसा किया गया था।

हालांकि, इसके बाद रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध को देखते हुए मई 2022 से RBI ने ब्याज दर बढ़ाना शुरू किया जो मई 2023 तक चलता रहा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब ब्याज दर कटौती के लिए सही समय है। केंद्रीय बजट ने हाल ही में ऐसी कई योजनाओं का ऐलान किया है जिनसे उपभोग केंद्रित मांग में वृद्धि हो सकती है। ऐसे में ब्याज दरों में कटौती इन कोशिशों को रफ्तार देगी।

यही कटौती का सही समय

BofA Securities की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के टैरिफ टालने के बाद बाजार स्थिर हो रहा है। ऐसे में घरेलू हालात पर फोकस लौट आया है। वृद्धि और मुद्रास्फीति से जुड़ा डेटा, मॉनिटरी पॉलिसी में ढील की ओर इशारा करता है। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि फरवरी की MPC बैठक में रेपो रेट को 25 bps कम किया जाएगा।

रिपोर्ट में यह भी उम्मीद जताई गई है कि कैश रिजर्व रेशियो (Cash reserve ratio, CRR) में भी 50 bps की कटौती की जाएगी या ओपन मार्केट ऑपरेशन्स के जरिए बॉन्ड खरीदकर लिक्विडिटी बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। इससे फॉरन एक्सचेंज मार्केट में हो रहे बदलावों के असर को कम किया जा सकेगा।

महंगाई दर की स्थिति

इसके पहले दिसंबर 2024 की बैठक में रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फीति का अनुमान मौजूदा वित्त वर्ष 2024-25 में 4.5% से बढ़ाकर 4.8% कर दिया था। तत्कालीन गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था कि खाद्य पदार्थों पर बने हुए दवाब के चलते दिसंबर की तिमाही में हेडलाइन मुद्रास्फीति बढ़े रहने की आशंका है। सितंबर और अक्टूबर के दौरान खाद्य पदार्थों की बढ़ी कीमतों के कारण Consumer price index (CPI) तेजी से उछला था। हालांकि, अक्टूबर में 6.21% रहने के बाद खुदरा मुद्रास्फिति दिसंबर में 5.22% पर खिसक गई थी।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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