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7 min read | अपडेटेड January 31, 2025, 17:38 IST
सारांश
Economic Survey 2025 Highlights: बजट सत्र के पहले दिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आर्थिक सर्वेक्षण के जरिए देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े अलग-अलग ट्रेंड्स संसद के सामने रखेंगी। इस विस्तृत डॉक्युमेंट में न सिर्फ अर्थव्यवस्था के सामने खड़ी चुनौतियों का जिक्र होता है, बल्कि उन्हें सुलझाने के लिए सुझाव भी दिए जाते हैं।

हर साल बजट के पहले पेश होता है आर्थिक सर्वेक्षण।
Economic Survey 2025: साल 2025 का बजट सत्र शुरू हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन के साथ शुरू होने वाले सत्र के पहले दिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) पेश कर दिया ह। इसमें पिछले साल अलग-अलग सेक्टर्स में देखे गए उतार-चढ़ाव का ब्योरा मौजूद है। इसके साथ ही सीतारमण संसद को बताएंगी कि भारत की अर्थव्यवस्था ने बीते साल में क्या-क्या हासिल किया है।
हर बजट के पहले आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाता है। इसके अंदर न सिर्फ देश के सामने खड़ी वित्तीय चुनौतियों का जिक्र होता है, बल्कि गरीबी हटाने, जलवायु परिवर्तन से निपटने जैसे मुद्दों पर ऐक्शन प्लान का सुझाव भी दिया जाता है।
पिछले साल आर्थिक सर्वेक्षण ने 6.5%-7% के बीच ग्रोथ प्रॉजेक्ट की थी जबकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 6.6% का एस्टिमेट लगाया था।
आर्थिक सर्वे वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के आर्थिक डिविजन में चीफ इकॉनमिक अडवाइजर के सुपरविजन में तैयार किया जाता है।
पहला आर्थिक सर्वे 1950-51 में बजट दस्तावेजों के साथ ही आया था। 1960 के दशक में इसे बजट से अलग कर दिया गया और बजट से एक दिन पहले पेश किया जाने लगा।
अप्रैल-नवम्बर 2024 में, निवल वृद्धि 95.6 लाख तक पहुंच गई, जो मुख्य रूप से युवाओं के कारण थी। 18-25 वर्ष की आयु के श्रमिकों ने निवल वेतन वृद्धि में 47% का योगदान दिया।
यह औपचारिक रोजगार की ओर बढ़ते रुझान को दर्शाता है, जो सामाजिक सुरक्षा और स्थिरता तक श्रमिकों की पहुंच को बढ़ाता है।
बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र स्थिर और अच्छी तरह से पूंजीकृत बना हुआ है, और अर्थव्यवस्था की वित्तपोषण आवश्यकताओं को पूरा कर रहा है। जबकि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) द्वारा ऋण वितरण में दोहरे अंकों में वृद्धि हो रही है, वहीं हाल के महीनों में वृद्धि में नरमी आई है। ऐसा उच्च आधार और उन क्षेत्रों में विनियामक सख्ती के कारण हुआ है जहां उच्च वृद्धि देखी गई थी।
निवेश गतिविधि में मंदी अस्थायी हो सकती है। पूंजी निर्माण में सुधार के संकेत दिख रहे हैं। जुलाई- नवंबर 2024 में केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय 8.2% बढ़ा है और इसमें और तेजी आने की उम्मीद है।
वित्त वर्ष 25 की पहली छमाही में औद्योगिक क्षेत्र में 6% की वृद्धि हुई। पहली तिमाही में 8.3% की मजबूत वृद्धि देखी गई, लेकिन तीन प्रमुख कारकों के कारण दूसरी तिमाही में वृद्धि में नरमी हुई।
सबसे पहले, गंतव्य देशों से कमजोर मांग और प्रमुख व्यापारिक देशों में आक्रामक व्यापार और औद्योगिक नीतियों के कारण विनिर्माण निर्यात में काफी कमी आई।
दूसरा, औसत से अधिक मानसून के मिश्रित प्रभाव रहे - जबकि इसने जलाशयों को फिर से भर दिया और कृषि को बढ़ावा दिया, इसने खनन, निर्माण और कुछ हद तक विनिर्माण जैसे क्षेत्रों को भी बाधित किया।
तीसरा, पिछले और वर्तमान वर्षों में सितंबर और अक्टूबर के बीच त्योहारों के समय में बदलाव के कारण वित्त वर्ष 25 की दूसरी तिमाही में वृद्धि में मामूली मंदी आई ।
वित्त वर्ष 25 की पहली छमाही में कृषि विकास स्थिर रहा, दूसरी तिमाही में 3.5% की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछली चार तिमाहियों की तिलना में सुधार दर्शाता है। स्वस्थ खरीफ उत्पादन, सामान्य से बेहतर मानसून और पर्याप्त जलाशय स्तर द्वारा कृषि विकास में सहायता मिली।
अर्थव्यवस्था में कुल मांग के दृष्टिकोण से, स्थिर मूल्यों पर निजी अंतिम उपभोग व्यय (private final consumption expenditure at constant prices, PFCE) 7.3% तक बढ़ने का अनुमान है, जो ग्रामीण मांग में पलटाव से प्रेरित है। PFCE का जीडीपी में योगदान FY24 में 60.3% से बढ़कर FY25 में 61.8 % होने का अनुमान है।
सरकार ने पिछले 5 साल में बुनियादी ढांचे के विकास पर फोकस रखा है। अहम इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर्स पर कैपिटल खर्च वित्त वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच 38.8% की दर से बढ़ा है: आर्थिक सर्वे
मौजूदा वित्त वर्ष में चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद कैपिटल खर्च में जुलाई 2024 से नवंबर 2024 के बीच तेजी देखी गई: आर्थिक सर्वे
आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के मुताबिक अप्रैल-दिसंबर के बीच मुद्रास्फीति कम होकर 4.9% पर आ गई।
अब शनिवार 1 फरवरी, 2025 को सीतारमण पेश करेंगी बजट। तब तक के लिए अडजर्न संसद।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद के सामने पेश किया 2024-25 का आर्थिक सर्वेक्षण।
सभापति धनखड़ ने इंडियन नेशनल लोकदल के अध्यक्ष और 5 बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे ओम प्रकाश चौटाला को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी। उन्होंने प्रतिष्ठित फिल्ममेकर और पद्मश्री श्याम बेनेगल के निधन को भी देश के लिए अपूर्णीय क्षति बताया।
उपराष्ट्रपति और राज्य सभा के सभापति जगदीप धनखड़ सदन को कर रहे हैं संबोधित।
कुछ ही देर में संसद के सामने 2024-25 का आर्थिक सर्वेक्षण पेश करेंगी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण।
द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रनिर्माण में करदाताओं की भूमिका को स्वीकार करते हुए बताया कि सरकार ने टैक्स से जुड़ी प्रक्रिया को आसान किया है। फेसलेस असेसमेंट्स ने पारदर्शिता को बढ़ाया है और टैक्स से जुड़े विवादों को कम किया है।
उन्होंने कहा कि देश के युवा, महिलाएं हर क्षेत्र में भारत को आगे लेकर जा रहे हैं। विकसित देश भी भारत के UPI ट्रांजैक्शन से प्रभावित हैं। हम डिजिटल टेक्नॉलजी का इस्तेमाल सामाजिक न्याय और समानता के लिए कर रहे हैं।
राष्ट्रपति ने सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए आदिवासियों, महिलाओं, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए लाई गईं योजनाओं का जिक्र किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने अभिभाषण की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय डॉ. मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए की। उन्होंने मौनी अमावस्या पर महाकुंभ में मची भगदड़ में मारे गए लोगों पर शोक भी व्यक्त किया।


संसद के बजट सत्र के पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन।
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