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4 min read | अपडेटेड April 09, 2026, 13:35 IST
सारांश
Donald Trump ने एक बार फिर NATO पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब अमेरिका को जरूरत थी तब NATO साथ नहीं आया, और आगे भी नहीं आएगा। उन्होंने ग्रीनलैंड का जिक्र करते हुए भी तंज कसा।

ईरान के खिलाफ अमेरिका के हमलों में NATO देशों ने साथ नहीं दिया, जिससे Donald Trump नाराज हैं।
अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच बढ़ते तनाव के चलते NATO के टूटने की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। Donald Trump के प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर संकेत दिया है कि अमेरिका NATO से बाहर निकलने पर विचार कर सकता है। कहा जा रहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका के हमलों में NATO देशों ने साथ नहीं दिया, जिससे ट्रंप नाराज हैं।
व्हाइट हाउस के अनुसार ट्रंप का मानना है कि NATO सहयोगी “टेस्ट में फेल” हो गए, क्योंकि जब अमेरिका को उनकी जरूरत थी, तब उन्होंने मदद नहीं की। Leavitt ने कहा कि यह दुखद है कि पिछले छह हफ्तों में NATO ने अमेरिका का साथ नहीं दिया, जबकि अमेरिका ही उनकी सुरक्षा पर खर्च करता है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप NATO के साथ इस मुद्दे पर “सीधी और खुली बातचीत” करना चाहते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या NATO से बाहर निकलने का विकल्प अभी भी टेबल पर है, तो Leavitt ने साफ कहा कि यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर ट्रंप पहले भी बात कर चुके हैं और अब फिर से Mark Rutte के साथ चर्चा करेंगे।
इसी बीच NATO प्रमुख Mark Rutte वॉशिंगटन में ट्रंप से मिलने पहुंचे ताकि इस तनाव को कम किया जा सके। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने पहले भी ट्रंप को ग्रीनलैंड को अमेरिका में मिलाने की कोशिश छोड़ने के लिए मनाया था। लेकिन माहौल अभी भी काफी तनावपूर्ण है।
Donald Trump ने एक बार फिर NATO पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब अमेरिका को जरूरत थी तब NATO साथ नहीं आया, और आगे भी नहीं आएगा। उन्होंने ग्रीनलैंड का जिक्र करते हुए भी तंज कसा। The Wall Street Journal की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ट्रंप प्रशासन उन NATO देशों को “सजा” देने की योजना बना रहा है, जिन्होंने ईरान युद्ध के दौरान अमेरिका और इजराइल का साथ नहीं दिया।
The Wall Street Journal की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका कुछ NATO देशों से अपने सैनिक हटा सकता है और उन्हें उन देशों में भेज सकता है जिन्होंने सहयोग किया। इस योजना में अमेरिका पूरी तरह NATO से बाहर नहीं निकलेगा, क्योंकि ऐसा करने के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होती है। फिलहाल यह योजना शुरुआती चरण में है, लेकिन इसे लेकर प्रशासन के भीतर गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है। अभी यूरोप में अमेरिका के करीब 84,000 सैनिक तैनात हैं।
कुछ खास देशों पर अमेरिका की नाराजगी ज्यादा है। Spain ने ईरान ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी विमानों को अपने एयरस्पेस से गुजरने नहीं दिया। Germany ने युद्ध की आलोचना की, जिससे अमेरिका नाराज हो गया। Italy ने सिसिली के एयरबेस का इस्तेमाल देने से मना कर दिया था, जबकि France ने शर्त रखी कि ईरान पर हमले करने वाले विमान उनके बेस पर लैंड नहीं करेंगे। इस प्लान के तहत सिर्फ सैनिक हटाना ही नहीं, बल्कि यूरोप में कुछ अमेरिकी सैन्य बेस बंद करने पर भी विचार हो रहा है। खासकर स्पेन और जर्मनी में बेस बंद होने की संभावना बताई गई है।
यूरोपीय देशों का कहना है कि उन्हें पहले से युद्ध की कोई जानकारी ही नहीं दी गई थी, इसलिए शुरुआत में वे कोई ठोस मदद नहीं कर पाए। यह पूरा विवाद Iran के साथ युद्ध के बाद और गहरा गया है। ट्रंप के सत्ता में लौटने के बाद टैरिफ जैसे मुद्दों के चलते यूरोप के साथ रिश्ते पहले ही खराब थे।
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