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4 min read | अपडेटेड April 02, 2025, 12:33 IST
सारांश
Donald Trump Tariff Announcement: बुधवार 2 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति भारत समेत दुनिया के कई देशों पर टैरिफ का ऐलान करने जा रहे हैं। वाइट हाउस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक ट्रंप के ऐलान के फौरन बाद ये टैरिफ लागू हो जाएंगे। कनाडा जैसे कुछ देश जहां जवाबी टैरिफ की तैयारी में हैं, वहीं ब्रिटेन को उम्मीद है कि बातचीत के जरिए टैरिफ के फैसले को बदलवाया जा सकेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऐलान के फौरन बाद लागू हो जाएंगे टैरिफ। (तस्वीर: Shutterstock)
ये कहना है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का जो बुधवार, 2 अप्रैल को वाइट हाउस के रोज गार्डन में कार्यक्रम के दौरान दुनिया के तमाम देशों पर टैरिफ लगाने के लिए तैयार हैं।
वाइट हाउस प्रेस सेक्रटरी कैरलाइन लेविट के मुताबिक टैरिफ के ऐलान के फौरन बाद ये लागू हो जाएंगे। ऐसे में ना सिर्फ देशों के जवाब बल्कि बाजार के रवैये को लेकर भी अटकलें लगने लगी हैं।
भारतीय समयनुसार रात करीब 1:30 टैरिफ ऐलान के बाद फौरन लागू होने से संभव है कि देश पहले जवाबी टैरिफ लगा दें और बातचीत का दौर उसके बाद शुरू हो।
हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अभी तक टैरिफ को लेकर निर्णायक खाका तैयार नहीं हुआ है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार तक वाइट हाउस के सलाहकार ट्रंप को टैरिफ प्लान पर विकल्पों का सुझाव दे रहे थे। संभावना जताई गई है कि टैरिफ ऐलान के कुछ घंटे पहले ही आखिरी फैसला किया जा सकेगा।
लेविट के मुताबिक अमेरिकी कृषि उत्पादों पर भारत 100%, डेरी उत्पादों पर यूरोपियन यूनियन 50%, चावल पर जापान 700% और मक्खन-चीज पर कनाडा 300% टैरिफ लगाता है। इसे लेकर ट्रंप ने लगातार भारत समेत दूसरे देशों को निशाने पर लिया है। यहां तक कि 2 अप्रैल को उन्होंने ‘लिबरेशन डे’ कह डाला है।
ट्रंप को भरोसा है कि टैरिफ लगने से देश में निवेश और नौकरियां तेजी से पैदा की जा सकेंगी। उन्होंने X (पहले ट्विटर) पर कहा है कि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल से कहीं ज्यादा निजी निवेश देश में आने वाला है।
इसके पहले जिन देशों पर टैरिफ की तलवार लटक रही है, वे पहले से तैयारी में जुटे हुए हैं। इसी कड़ी में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रंप से बातचीत भी की। इस दौरान कार्नी ने ट्रंप को जवाबी टैरिफ लगाने की चेतावनी भी दे डाली है। उनका कहना है कि कनाडा के कर्मियों और अर्थव्यवस्था की रक्षा के लिए सरकार जवाबी टैरिफ लगाएगी।
कार्नी ने मंगलवार को मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लॉडिया शेनबॉम से भी चर्चा की है। बिना टैरिफ के जिक्र के दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाकर अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और अनुचित व्यापार कार्रवाई से लड़ने की प्रतिबद्धता जाहिर की।
वहीं, यूरोप ने भी दो टूक कहा है कि जरूरत पड़ी तो उसके पास ट्रंप के टैरिफ हाइक का जवाब देने के लिए ‘मजबूत प्लान’ है। यूरोपियन यूनियन की एग्जिक्युटिव उर्सुला वॉन डर लेयन का कहना है कि हम नहीं चाहते हैं कि जवाब देना पड़े लेकिन जरूरत पड़ी तो हमारे पास प्लान है और हम उसे इस्तेमाल करेंगे।
ऐस्टन यूनिवर्सिटी बिजनेस स्कूल की एक स्टडी के हवाले से बीबीसी रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी ऐलान और उसके बाद जवाबी टैरिफ के असर से दुनिया को $1.4 ट्रिलियन की चपत लग सकती है। व्यापार पर असर होने, कीमतों के बढ़ने से कई देशों के लिए चुनौती खड़ी हो सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक अकेले यूके की इकॉनमी को 1% का घाटा हो सकता है जिससे उसकी ग्रोथ गिरेगी और लोगों के ऊपर टैक्स का बोझ पड़ सकता है। हालांकि, ब्रिटेन को उम्मीद है बातचीत के जरिए टैरिफ के फैसले को पलटवाया जा सकता है। इसलिए हो सकता है कि वह जवाबी टैरिफ जैसा ऐक्शन ना ले।
ट्रंप ने पड़ोसी देशों- कनाडा और मेक्सिको पर सीमा के रास्ते अवैध इमिग्रेंट्स और नशीले पदार्थों की तस्करी को लेकर 25% टैरिफ लगाया था जबकि इसमें हाथ होने का आरोप जड़ते हुए चीन पर भी 20% का टैरिफ लगाया था।
वहीं, यूरोपियन यूनियन के उत्पादों पर 20% टैरिफ के प्लान का ऐलान किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक ऐसा होता है जो आयरलैंड जैसे देशों को सबसे ज्यादा घाटे का सामने करना पड़ सकता है जो अमेरिका को निर्यात पर काफी निर्भर हैं।
ट्रंप ने अमेरिका के बाहर से आने वाली गाड़ियों पर भी 25% टैरिफ लगाया है जबकि आशंका है कि फार्मा सेक्टर पर भी 35% तक टैरिफ का खतरा पैदा हो गया है।
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