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3 min read | अपडेटेड January 19, 2026, 18:16 IST
सारांश
एक्सपर्ट्स का कहना है कि Budget 2026 में सिर्फ बड़ी घोषणाओं के बजाय जमीनी स्तर पर काम पूरा कराने पर जोर होना चाहिए। उनका मानना है कि रूफटॉप सोलर और कमर्शियल-इंडस्ट्रियल ग्राहकों के लिए हाइब्रिड सॉल्यूशन को बढ़ावा दिया जाए, ताकि बिजली उत्पादन विकेंद्रीकृत हो।

भारत अगस्त 2025 में 250 GW से ज्यादा नॉन-फॉसिल पावर क्षमता का आंकड़ा पार कर चुका है।
नवंबर 2025 तक देश ने रिकॉर्ड 44.5 GW रिन्यूएबल कैपिसिटी जोड़ी, जो पिछले साल इसी अवधि में जोड़ी गई 24.72 GW से काफी ज्यादा है। कुल रिन्यूएबल एनर्जी कैपिसिटी सालाना आधार पर 23% बढ़कर 253.96 GW हो गई है, जिसमें सबसे बड़ा योगदान सोलर एनर्जी का है, जो बढ़कर 132.85 GW तक पहुंच चुकी है।
Jakson Group के चेयरमैन समीर गुप्ता का कहना है कि Budget 2026 में सिर्फ बड़ी घोषणाओं के बजाय जमीनी स्तर पर काम पूरा कराने पर जोर होना चाहिए। उनका मानना है कि रूफटॉप सोलर और कमर्शियल-इंडस्ट्रियल ग्राहकों के लिए हाइब्रिड सॉल्यूशन को बढ़ावा दिया जाए, ताकि बिजली उत्पादन विकेंद्रीकृत हो, ग्रिड पर दबाव कम पड़े और क्लीन एनर्जी तेजी से अपनाई जा सके।
OMC Power के CEO रोहित चंद्रा के अनुसार भारत का क्लीन एनर्जी सफर अब एक अहम मोड़ पर है। अब जरूरत है सस्ते और लंबे समय के ग्रीन फाइनेंस की, ताकि डिस्ट्रीब्यूटेड सोलर और हाइब्रिड सिस्टम को बड़े पैमाने पर लगाया जा सके। साथ ही उन्होंने कॉर्बन मोनेटाइजेशन जैसे सिस्टम को मजबूत करने की बात कही, जिससे कंपनियों को साफ ऊर्जा अपनाने में फायदा हो।
Premier Energies के CBO विनय रुस्तगी ने कहा कि रिन्यू्एबल एनर्जी सरकार की प्राथमिकता रही है और उद्योग को उम्मीद है कि बजट 2026 में R&D और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए इंसेंटिव मिलेंगे। खासकर सोलर मॉड्यूल बनाने में इस्तेमाल होने वाले ingots और wafers के घरेलू उत्पादन को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है, ताकि भारत आत्मनिर्भर बन सके।
Volks Energie के CEO पियूष गोयल ने बताया कि रिन्यूएबल एनर्जी में सबसे बड़ी चुनौती ग्रिड की तैयारी है। उन्होंने ट्रांसमिशन नेटवर्क, ग्रिड मॉडर्नाइजेशन, डिजिटल ग्रिड मैनेजमेंट और फोरकास्टिंग सिस्टम के लिए ज्यादा फंडिंग की जरूरत बताई, ताकि बड़ी मात्रा में रिन्यूएबल बिजली को आसानी से ग्रिड में शामिल किया जा सके। Solex Energy के CMD चेतन शाह ने सोलर पैनल, बैटरी और एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के रिसायक्लिंग के लिए इंसेंटिव की मांग की। उनका कहना है कि पर्यावरण के लिहाज से मजबूत एनर्जी इकोसिस्टम बनाने के लिए यह बहुत जरूरी है।
EY India के analysts का मानना है कि अगर रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश पर 200% ग्रीन क्रेडिट्स दिए जाएं, तो कंपनियां सस्टेनेबल प्रैक्टिसेज अपनाने के लिए और ज्यादा प्रेरित होंगी और उनकी कंपटीटिवनेस भी बढ़ेगी। Fujiyama Power Systems के MD पवन गर्ग के अनुसार इंडस्ट्री को पूरी सोलर वैल्यू चेन में सपोर्ट की उम्मीद है। इसमें रेशनाइलज्ड GST स्ट्रक्चर, सस्ता लॉन्ग-टर्म ग्रीन फाइनेंस और ट्रांसमिशन व एनर्जी स्टोरेज में ज्यादा निवेश शामिल है।
अगर Budget 2025 की बात करें, तो सरकार ने Ministry of New & Renewable Energy को ₹26,549.38 करोड़ दिए थे, जो पिछले साल के मुकाबले 53% ज्यादा थे। PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana के लिए ₹20,000 करोड़ और PM-KUSUM योजना के लिए ₹2,600 करोड़ का प्रावधान किया गया था।
कुल मिलाकर, रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को Budget 2026 से ऐसे फैसलों की उम्मीद है जो फाइनेंसिंग, मैन्युफैक्चरिंग, ग्रिड इन्फ्रा और पॉलिसी क्लैरिटी को मजबूत करें, ताकि भारत अपने क्लीन एनर्जी टारगेट्स समय पर हासिल कर सके।
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